'बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन' पर ट्रंप ने बढ़ाया एक और कदम

आईएएनएस
Updated: April 18, 2017, 7:20 PM IST
'बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन' पर ट्रंप ने बढ़ाया एक और कदम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 'बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन' नीति को लागू करने से संबंधित कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे. इसके तहत अमेरिका अपने एच1बी वीजा कार्यक्रम की भी समीक्षा करेगा.
आईएएनएस
Updated: April 18, 2017, 7:20 PM IST
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 'बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन' नीति को लागू करने से संबंधित कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे. इसके तहत अमेरिका अपने एच1बी वीजा कार्यक्रम की भी समीक्षा करेगा.

'हायर अमेरिकन' नीति के तहत संघीय एजेंसियों को एच1बी वीजा नियमों का सख्ती से पालन करने, फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कार्यक्रमों में सुधार करने और सर्वोत्कृष्ट व्यक्ति को ही एच1बी वीजा प्रदान करने के लिए कहा गया है.

अमरीकी इमीग्रेशन डिपार्टमेंट के अनुसार इस बार एच1बी वीज़ा आवेदकों की संख्या में वर्ष 2016 के मुकाबले बड़ी गिरावट आई है.

पिछले साल 2 लाख 36 हज़ार लोगों ने इसके लिए आवेदन पत्र भरे थे, जबकि इस बार ये संख्या एक लाख 99 हज़ार रही.

अनुमान लगाया जा रहा है कि वीज़ा नियम में इन बदलावों से कई भारतीय कंपनियों को ख़ासा नुकसान हो सकता है.

क्या है H-1B ?
अमेरिकी सरकार हर साल 65,000 एच1बी वीज़ा लॉटरी के ज़रिए जारी करती है.

लेकिन कई आउटसोर्सिंग कंपनियों की इस बात के लिए आलोचना हो रही है कि वो भारी संख्या में वीज़ा आवेदन डालती हैं और ज़्यादा से ज़्यादा वीज़ा हासिल करके टेक्नॉलॉजी से जुड़ी निचले स्तर की नौकरियों में अपने लोगों को भर देती हैं.

एच1बी वीजा ऐसे विदेशी पेशेवरों के लिए जारी किया जाता है जो ऐसे 'ख़ास' कार्य में पूरी तरह से सक्षम होते है. इसके लिए उच्च शिक्षा की ज़रूरत होती है.

कंपनी को नौकरी करने वाले की तरफ से एच 1 बी वीज़ा के लिए इमिग्रेशन विभाग में आवेदन करना होता है. ये व्यवस्था 1990 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने शुरू की थी.

अमरीकी कंपनियां इन वीज़ा का इस्तेमाल उच्च स्तर पर कुशल पेशेवरों को नियुक्त करने के लिए करते हैं. हालांकि अधिकतर वीज़ा आउटसोर्सिंग फर्म को जारी किए जाते हैं.
First published: April 18, 2017
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