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पॉलिटिक्स Feb 03, 2017, 02:28 PM

दंगे का दर्द झेलने वाले मुजफ्फरनगर की हर दीवार कुछ न कुछ कहती है...

मुजफ्फरनगर। 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगों की तपिश मुजफ्फरनगर में अब धीरे-धीरे कम होने लगी है. शहर दर्द को भूलकर खुशियों को समेटने के लिए तैयार है. मेट्रो सिटीज की तरह यहां दीवारों पर व्यापार को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों की भरमार नहीं है. यहां की दीवारें आपको कुछ न कुछ सीख देती हैं. ये दीवारें कभी जिंदगी जीना सिखाती हैं तो कभी सांप्रदायिक ताकतों से लड़ना सिखाती हैं और देश को बेहतर बनाने का संकल्प देती हैं. यूपी चुनाव का लाइव कवरेज करने निकली news18hindi.com की टीम आपको दीवारों पर पुते उन लाइनों से रूबरू करवा रही है, जो मुजफ्फरनगर की एक अलग ही मिजाज को बयां करती है... (news18hindi.com)