अजमेर ब्लास्ट: दोषियों को सजा पर फैसला अब 22 मार्च को


Updated: March 18, 2017, 4:25 PM IST
अजमेर ब्लास्ट: दोषियों को सजा पर फैसला अब 22 मार्च को
अजमेर ब्लास्ट मामले में एनआईए की विशेष अदालत की ओर से दोषी ठहराए गए आरोपियों को सजा पर फैसला शनिवार को एक बार फिर टल गया.

Updated: March 18, 2017, 4:25 PM IST
राजस्थान के बहुचर्चित अजमेर ब्लास्ट मामले में एनआईए की विशेष अदालत की ओर से दोषी ठहराए गए आरोपियों को सजा पर फैसला शनिवार को एक बार फिर टल गया. अदालत अब दोनों दोषियों को सजा 22 मार्च को सुनाएगी.

इससे पहले बुधवार, 8 मार्च  को इस मामल में तीन आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया था लेकिन उन्हें सजा पर फैसला 18 मार्च तक टाल दिया गया. 18 मार्च को बचाव पक्ष की दलीलों के बाद कोर्ट ने अब फैलसा 22 मार्च के लिए टाल दिया है.

राजस्थान की अजमेर दरगाह शरीफ में रोजा इफ्तार करने वाले जायरीनों के बीच यह ब्लास्ट 11 अक्टूबर 2007 को किया गया था. इस नापाक हरकत के 9 साल बीत जाने के बाद 8 मार्च को तीन आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया.

गरीब नवाज की दरगाह में  शाम करीब 6:15 पर दरगाह में एक ब्लास्ट हुआ. जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई. वहीं 15 गंभीर रुप से घायल हुए. ब्लास्ट के लिए दरगाह में दो रिमोट बम प्लांट किए गए थे. लेकिन इनमें से एक ही फटा जिससे भारी जनहानि नहीं हुई.

दरगाह में धमाके के बाद कब, क्या हुआ?

11 अक्टूबर 2007 की शाम ब्लास्ट हुआ

14 लोगों को आरोपी बनाया गया

8 आरोपी है जेल में

4 आरोपी अभी है फरार

1 आरोपी जमानत पर रिहा हो गया

1 की गिरफ्तारी से पहले ही हो गई थी मौत

3 को दोषी करार दिया गया

ब्लास्ट से फैसले तक के आंकड़े

442 दस्तावेज साक्ष्य पेश किए गए

149 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए

38 दस्तावेजी साक्ष्य पेश बचाव पक्ष की तरफ से पेश किए गए

2 गवाहों के बयान बचाव पक्ष की तरफ से दर्ज करवाए गए

4 चार्जशीट पूरे मामले में पेश की गई (एक चार्जशीट एटीएस और तीन चार्जशीट

एनआईए द्वारा प्रस्तुत की गई)

2011 में शुरू हुई सुनवाई

6 फरवरी 2017 को अंतिम बहस

26 गवाह पक्षद्रोही साबित हुए( ये सभी गवाह एनआईए के लिए महत्वपूर्ण गवाह थे)

गिरफ्तार आरोपी

स्वामी असीमानंद

देवेन्द्र गुप्ता(दोषी करार)

लोकेश शर्मा

चन्द्रशेखर लेवे

हर्षद सोलंकी

मुकेश बसानी

भरतमोहनलाल रतेश्वर

मेहुल उर्फ मफत

भावेश अरविन्द भाई पटेल (दोषी करार)

सुनील जोशी (दोषी करार) गिरफ्तारी से पहले ही मौत
First published: March 18, 2017
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