यहां हवा में तैर रहे जानलेवा 'पार्टिकल्स', पता लगाने के लिए खर्च होंगे 1.12 करोड़

Updated: February 20, 2017, 8:28 PM IST
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राजस्थान की राजधानी पिंकसिटी जयपुर की गुलाबी फिजा में गुजर-बसर करने वाले अधिकांश लोगों को यह पता भी नहीं कि हवा में तैर रहे जानलेवा 'पार्टिकल्स' उन्हें किस तरह धीरे-धीरे मौत के मुंह में भेज रहे हैं.

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड खुद इसके स्रोत से अनजान है. लेकिन अब सरकार इन पाटिकल्स (पीएम 2.5) का पता लगाने के लिए 1.12 करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है. इसके लिए राजस्थान सरकार ने आईआईटी कानपुर के एस्पर्ट से हाथ मिलाया है. एक्सपर्ट अब शहर की प्रदूषित हवा पर रिसर्च करेंगे और स्मार्ट सिटी की राह में रोड़ा बने पीएम 2.5 के स्रोस ढूंढ़ेंगे. आईआईटी कानपुर के एक्सपर्ट की इस रिपोर्ट के आधार पर जयपुर में एयर पॉल्यूशन पर नकेल की कवायद शुरू की जाएगी.

यहां हवा में तैर रहे जानलेवा 'पार्टिकल्स', पता लगाने के लिए खर्च होंगे 1.12 करोड़
जयपुर में सरकार पार्टिकल्स (पीएम 2.5) का पता लगाने के लिए 1.12 करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है.

जयपुर में वायु प्रदूषण का दिल्ली जैसा हाल, 5 गुना से अधिक 'पार्टीकुलेट मैटर'

(ग्राफिक- जयपुर में वायु प्रदूषण का दिल्ली जैसा हाल है. राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मानें तो यहां सामान्य हवा की तुलना में पांच गुना से भी अधिक 'पार्टीकुलेट मैटर' (पीएम) यानि जहरीले तत्व घुले हैं. )

उल्लेखनीय है कि चिकित्सीय पत्रिका ‘द लांसेट’की एक रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े हाल ही सामने आए हैं. इनकी माने तो हर साल वायु प्रदूषण के कारण 10 लाख से ज्यादा भारतीय मारे जाते हैं और दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से कुछ शहर भारत में हैं. यही कारण है कि जयपुर में भी एयर पॉल्यूशन कंट्रोल की दिशा में यह पहल की जा रही है.

18 महीने का वक्त लगेगा इस स्टडी में

(जयपुर शहर में  इस विषय पर रिसर्च करेगा आईआईटी कानपुर.)

जयपुर में जिस तेजी ये एयर पॉल्यूशन बढ़ रहा है यहां के हालात बद से बदत्तर होने की आशंका सताने लगी है. इससे पहले की यहां के हालात ज्यादा खराब हो उन्हें सुधारने की दिशा में कोशिशें शुरू कर दी गई हैं. इसी कड़ी में मार्च से शहर की हवा की जांच परख का काम शुरू होने वाला है. अगले 18 महीने तक आईआईटी कानपुर के एक्सपर्ट जुटेंगे. इस दौरान वे यहां पॉल्यूशन बढ़ने की वजह की साइंटिफिक तरीकों से स्टडी करेंगे साथ ही उसकी रोकथाम के तरीके भी बताएंगे.

पहले पीएम 10 अब पीएम 2.5 की जांच

(फोटो- आईआईटी कानपुर के प्रो. मुकेश शर्मा)

आईआईटी कानपुर के प्रो. मुकेश शर्मा बताते हैं कि रेस्पायरेबल पर्टिकुलेट मैटर यानि पीएम 10 के कणों का साइज 10 माइक्रोमीटर होती है. अभी तक इसी का अध्ययन हो रहा था लेकिन इससे छोटे कणों यानि पीएम 2.5 हेल्थ के लिए बेहद खतरनाक हैं. इनका का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या इससे भी कम होता है. यह कण ठोस या तरल रूप में वातावरण में होते हैं. इसमें धूल, गर्द और धातु के सूक्ष्म कण शामिल हैं. सूक्ष्म आकार का होने की वजह से यह आसानी से आपके फेंफड़े तक पहुंच सकता है. और फिर इसके बाद यह खून के जरिये आपके हार्ट तक जा सकता है. प्रो. शर्मा बताते हैं कि इस रिसर्च में हम शहर में इसी पीएम 2.5 की स्थित और स्रोतों का पता लगाएंगे.

कैसे हानिकारक है पीएम 2.5?

हवा में तैरते इन पीएम 2.5 कणों के संपर्क में लगातार रहने वाले लोगों को अस्थमा के साथ हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बहुत बढ़ जाता है. साथ ही कफ, नाक बहना और एलर्जी जैसे लगातार छींकने आने की दिक्कत भी शुरू हो जाती है. डब्ल्यूएचओ की माने तो पीएम 2.5 से बच्चों में फेंफड़े के विकास में बाधा भी पैदा हो सकती है.

चिंताजनक हैं जयपुर में बढ़ते व्हीकल्स, घटता स्वास्थ्य

राजधानी जयपुर में आबादी के दबाव के कारण लगातार व्हीकल्स में इजाफा हो रहा है. व्हीकल्स के पॉल्यूशन के साथ ही इस शहर में लगातार जारी कंस्ट्रक्शन वर्क और नई नई फेसिलिटीज में हुए इजाफे ने यहां पर पॉल्यूशन के पैमानों पर असर भी डाला है.

( फोटो- राजस्थान स्टेड पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और आईआईटी कानपुर के बीच हुआ एमओयू)

राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्ष अपर्णा अरोड़ा ने बताया कि जयपुर की एयर क्वालिटी अब पहले जैसी नहीं रही लेकिन राजस्थान स्टेड पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से जयपुर में एयर क्वालिटी को बेहतर बनाये रखने के लिए आईआईटी कानपुर के एक्सपर्ट से यह एमओयू किया गया है. इसके तहत एक स्टडी करवाई जा रही है. ताकि जयपुर में पॉल्यूशन के सही कारणों का पता लगे और उससे निपटने के लिए असरदार नीति तैयार हो सके.

रिसर्च रिपोर्ट के आधार पर बनेगी नीति!

(जयपुर में पॉल्यूशन के हालात बयां करती तस्वीर)

राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री गजेंद्रसिंह खींवसर ने बताया कि आईआईटी कानपुर में एयर पॉल्यूशन पर लंबे अर्से से काम कर रहे जाने माने में एक्सपर्ट प्रोफेसर मुकेश शर्मा अपनी टीम के साथ गुलाबी नगरी में पॉल्यूशन पर स्टडी करेंगे. इस दौरान वे कई पैमानों पर काम करते हुए अगले 18 महीने में जयपुर में पॉल्यूशन का लेवल, वॉल्यूशन बढ़ने की वजह और पॉल्यूशन में नुकसान पहुंचाने वाले एलिमेंट्स की जानकारी लेंगे. यहां के हालात के स्टेंडर्ड के मुताबिक ये आंकलन किया जाएगा साथ पता लगाएंगे कि जयपुर में पॉल्यूशन बढ़ाने के कौन कौन से जगजाहिर और छिपे हुए कारण हैं. उनमें से कौन से तत्व लोगों की सेहत को ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले हैं. इसी के आधार पर सेहत पर बुरा असर डालने वाले तत्वों के रोकथाम के लिए कौन से आसान तरीकों का अपनाया जा सकता है.

First published: February 20, 2017
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