सरकारी नौकरी: आरक्षण की भेंट चढ़ीं 40 हजार भर्तियां, अधर में 30 लाख बेरोजगारों का भविष्य

sambrat chaturvedi

Updated: March 3, 2017, 8:54 AM IST
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राजस्थान में गुर्जरों के आरक्षण आंदोलन के बाद सरकारी फैसलों और कानूनी दांव-पेंच में अब तक करीब 40 हजार पदों पर भर्तियां प्रभावित हो चुकी हैं.

सरकारी नौकरी के लिए सालों कड़ी मेहनत करने वाले परीक्षा देने के बाद आज भी परिणाम का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे करीब 30 लाख बेरोजगारों का भविष्य इन भर्तियों के नतीजों के साथ ही अधर में अटका हुआ है.

सरकारी नौकरी: आरक्षण की भेंट चढ़ीं 40 हजार भर्तियां, अधर में 30 लाख बेरोजगारों का भविष्य
राजस्थान में गुर्जरों के आरक्षण आंदोलन के बाद सरकारी फैसलों और कानूनी दांव-पेंच में अब तक करीब 40 हजार पदों पर भर्तियां प्रभावित हो चुकी हैं.

सरकार ने गुर्जरों को आरक्षण दिया, कोर्ट ने भर्ती रोकी

गुर्जर आरक्षण आंदोलन के बाद भाजपा सरकार ने दो साल पहले गुर्जरों समेत पांच जातियों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 5 फीसदी आरक्षण दिया था. इससे पहले मई 2010 से एसबीसी के तहत इन पांच जातियों को 1 फीसदी आरक्षण का लाभ मिल रहा था. अब ये 4% बढ़कर कुल पांच फीसदी कर दिया गया. इसी के साथ प्रदेश में कुल 21% ओबीसी को, 12% एसटी और 16% एससी को और एसबीसी को 5 फीसदी आरक्षण के साथ आरक्षण का कुल आंकड़ा 54% हो गया. लेकिन गुर्जरों को आरक्षण देने वाले आरक्षण विधेयक 2015 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 100 से ज्यादा पेज का फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष 9 दिसंबर को आरक्षण विधेयक-2015 को रद्द कर दिया. हाईकोर्ट में इस मामले सुनवाई और फैसले के बाद से एसबीसी आरक्षण के चलते कई भर्ती परीक्षाओं के परिणाम रोक दिए गए.

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40 हजार पदों पर आरक्षण मामले में नियुक्तियां अटकी

उन्होंने पढाई की, इम्तिहान दिया, और तो और वो अव्वल भी आए. सरकारी नौकरी के लिए चयन भी हो गया लेकिन फिर भी दफ्तर जाने के बजाय सड़कों पर कभी झाडू लगा रहे हैं कभी नारेबाजी कर रहे हैं. अब इसे क्या कहिएगा. किस्मत की बेरूखी या कुछ और ? जी हां, प्रदेश में आरक्षण का आंकड़ा 54 % पहुंचने का मामला कोर्ट में चला तो करीब 10 भर्तियों के 39 हजार 404 पदों पर नियुक्तियां अधर में अटक गईं. इन भर्तियों में अपना भाग्य आजमाने वाले बेरोजगारों की संख्या 30 लाख से अधिक है.

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परीक्षा दे चुके, सफल भी हो चुके हैं ...लेकिन फिर भी इंतजार

नियुक्ति का इंतजार खत्म नहीं होता देख चयनित बेरोजगार अब आंदोलन की राह अपना चुके हैं. कई महीनों से राजधानी जयपुर में धरने पर बैठै हैं. कभी सड़कों पर झाडू हाथ में लिए दिखते हैं तो कभी नारेबाजी में अपनी आवाज बुलंद करते हुए. दरअसल, आवेदन से लेकर इंटरव्यू तक के मुशिकल सफर को भले ही इन्होंने पार कर लिया है. लेकिन आरक्षण के मसले ने इन्हें अब तक बेरोजगार बना रखा हैं. यहीं कारण है कि प्रदेश भर के चयनित व्याख्याता इन दिनों बीकानेर से लेकर जयपुर तक अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर डटे हुए हैं. कई अभ्यर्थी अनशन भी कर रहे हैं.

फोटो- जयपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते बेरोजगार युवा.

(फोटो- जयपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते बेरोजगार युवा.)

परीक्षा में पास लेकिन मंजिल अभी दूर

नियुक्ति के इंतजार में एक अभ्यर्थी विजय आलोरिया कहते हैं कि भर्तियों में बेरोजगारों ने वो सारे पड़ाव पार कर लिए लेकिन किस्मत की बेरूखी ऐसी रही कि अब एसबीसी आरक्षण के मामलों ने महज इनकी नियुक्ति में रोडा अटका दिया. विद्यार्थी मित्रों को एडजस्ट करने के लिए सरकार की पंचायत सहायक की भर्ती भी अब इसकी भेंट चढ़ी. हाल ही में सत्ताइस हजार पदों पर करीब तीन से चार लाख अभ्यर्थियों ने इसे लेकर अपना भाग्य आजमाया. स्कूलों में साक्षात्कार भी हुए. लेकिन इनका परिणाम भी बंद लिफाफे में छिप गया.

(जयपुर से महेश दाधीच के सहयोग से)

First published: March 1, 2017
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