सरकारी नौकरी पार्ट 2: राजस्थान में डेढ़ लाख नौकरियों की बाढ़, फिर भी युवा बेरोजगार

Updated: March 3, 2017, 8:55 AM IST
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राजस्थान में पिछले पांच साल में दो दर्जन से अधिक भर्तियां निकाली जा चुकी हैं. विभिन्न विभागों के लिए निकाली गई इन भर्तियों में 1 लाख 45 हजार 958 पदों के लिए सरकार ने आवेदन भी मांगे और बहुत सी भर्तियों के एग्जाम भी हो गए. लेकिन, इन सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने वाले करीब 81 लाख 89 हजार अभ्यर्थियों में से अधिकांश युवा आज भी बेरोजगार हैं.

सरकारी नौकरी के लिए योग्यता का दावा पेश करने वाले युवक-युवतियों ने दिन-रात मेहनत की लेकिन, किसी की परीक्षा नहीं हुई तो किसी का परिणाम नहीं आया. एक, दो या तीन नहीं पिछले 5 साल में अटकी ऐसी भर्तियों की फेहरिस्त दिनों दिन लंबी होती जा रही है. ऐसे में महीनों का इंतजार साल गुजरते-गुजरते बेरोजगारी में तनाव और हताशा का कारण बनता जा रहा है.

सरकारी नौकरी पार्ट 2: राजस्थान में डेढ़ लाख नौकरियों की बाढ़, फिर भी युवा बेरोजगार
फोटो- राजधानी जयपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे युवक-युवती.

साल 2013 में 33 हजार विद्यालय सहायक की निकली भर्ती आज भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. इसके लिए आवेदन करने वाले 6 लाख युवा आज भी भाग्य पर भरोसा कर उम्मीद लगाए बैठे हैं. 2013 में पंचायती राज विभाग की ओर से शिक्षक भर्ती थर्ड ग्रेड के 7000 पदों के लिए आवेदन मांगे जिन पर भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद आज तक नियुक्ति नहीं हो सकी है.

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इसी तरह पिछले साल निकाली गई सहायक अभियंता (एईएन) और कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) के 624 पदों, 2013 की जूनियर अकाउंटेंट भर्ती के 3300 पदों और पशुधन सहायक के 1585 पदों पर नियुक्ति भी बाकी है. एलडीसी (लोअर डिविजनल क्लर्क) की 2013 में निकाली गई 7500 पदों पर भर्ती के परीक्षा परिणाम तो जारी कर दिए गए लेकिन अभी तक टंकण का इम्तिहान बाकी है.

राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) में भाग्य आजमाने वालों को भी अभी तक निराशा ही हाथ लगी है. आरएएस- 2013 के 725 पदों के लिए 3 लाख लोगों ने आवेदन किया था, प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है लेकिन नियुक्तियां अब भी शेष हैं. इसी तरह आरएएस- 2016 के 900 पदों पर भी परीक्षा तिथियों में बदलाव किए जाने से देर पर देर होना संभावित है.

शिक्षक भर्ती (सेकेंड ग्रेड) के तहत इसी वर्ष 6000 पदों पर 9 लाख आवेदन दाखिल हो चुके हैं लेकिन परीक्षा तिथियों में बार-बार बदलाव हो रहा है. पिछले वर्ष की पशुधन सहायक के 1585 पदों पर भी नियुक्तियां बाकी हैं. नर्सरी टीचर्स ट्रेनिंग (एनटीटी) के 1000 अभ्यर्थियों के भाग्य का फैसला भी अभी तक अधर में अटका हुआ है.

राजस्थान पुलिस में सब इंस्पेक्टर के 300 पदों की भर्ती के लिए आरपीएससी की ओर से अभी तक परीक्षा आयोजित नहीं हुई है. जबकि पिछले साल की जेल प्रहरी के 925 पदों के लिए परीक्षा देने वाले 3 लाख अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा रद्द कर खिलवाड़ किया जा चुका है.

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इसी तरह राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट) के तहत 15000 सकरारी नौकरियों के लिए आज भी 6.5 लाख अभ्यर्थी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं. नियुक्तियों पर टीएसपी को लेकर मामला हाई कोर्ट पहुंच चुका है.

इन तमाम अटकी भर्तियों के बाद आज भी सरकारी नौकरी युवा वर्ग की पहली चाहत बनी हुई हैं. यूनिवर्सिटी हो या फिर कॉलेज, अपनी डिग्री हासिल करने के बाद ज्यादातर युवाओं में सरकारी नौकरी की आजमाइश देखी जा सकती हैं. कोचिंग संस्थानों की सीढ़ियों पर दिन-रात चढ़ते उतरते ये कदम नहीं थमते. मानो बस इन्हें, मंजिल की तरफ बढते जाना है और अपने उस लक्ष्य को पाना है जो समाज, परिवार और देश में उन्हें प्रतिष्ठा दिलाए.

(जयपुर से महेश दाधीच के सहयोग से)

First published: March 2, 2017
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