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ये हैं सीएम योगी के आठ 'अनमोल रत्न', मठ में बे-रोक-टोक है एंट्री

NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: May 19, 2017, 6:20 PM IST
ये हैं सीएम योगी के आठ 'अनमोल रत्न', मठ में बे-रोक-टोक है एंट्री
Image: File Photo
NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: May 19, 2017, 6:20 PM IST
सीएम योगी के शहर गोरखपुर के 8 महत्वपूर्ण लोग हैं. इन्हें सीएम की तरफ से ग्रीन कार्ड मिला हुआ है. यानी, इन लोगों को कोई सुरक्षा कर्मी उनके पास जाने से नहीं रोक सकता. ये वो कार्ड होल्डर हैं जो काफी सालों से सीएम योगी के नजदीक रहकर सेवा करते रहे हैं.

खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट के मुताबिक, सीएम योगी आदित्यनाथ आतंकियों के टारगेट पर हैं. इसी के चलते लगातार इनकी सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की गई है. इसी कड़ी में गोरक्षपीठ में प्रवास के दौरान उनकी सुरक्षा कड़ी रहती है. मठ में रहने के दौरान पीठ से जुड़े ये आठ शख्स ही अब मंदिर परिसर में आ-जा सकते हैं. इन सबको स्पेशल आई कार्ड जारी किया गया है.

इनका आई कार्ड, इनके आधार नंबर से लिंक है. इस नए आई कार्ड की खासियत ये है कि इन्हें A सीरीज के 001 से लेकर 008 नंबर तक के कार्ड जारी किए गए हैं. कार्ड में एक विशेष तरह का रिबन लगा है और इसी से एक व्हाइट कलर की डिवाइस भी अटैच है.



सबसे पहला नाम योगी के राजनीति गुरू महंत अवैद्यनाथ के साथ काम करने वाले 65 साल के द्वारिका प्रसाद तिवारी का है. इसके अलावा विरेंद्र सिंह भी हैं. द्वारका प्रसाद तिवारी ने न्यूज18 हिंदी से खास बातचीत में बताया कि उन्होंने अपनी सारी जिंदगी मंदिर में ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ और योगी आदित्यनाथ की सेवा करने में लगा दी.

बता दें कि गोरखनाथ मंदिर का पूरा प्रशासकीय कार्य इनके द्वारा ही किया जाता है. इन्हें सभी वीआईपी की पहचान है. ये सीएम योगी के पहले अनौपचारिक गुरू भी कहे जाते हैं. इन्होंने योगी बनने से पहले, आदित्यनाथ को बहुत सा ज्ञान और सहयोग दिया था.

दूसरा नाम वीरेंद्र सिंह, जो बचपन से ही गोरक्षनाथ मंदिर की इस पीठ से जुड़े हैं. कार्यालय के कार्यों में ये द्वारिका तिवारी के खास सहायक माने जाते हैं. सीएम योगी के काफी करीबी माने जाने वाले विरेंद्र सिंह हमेशा योगी के एक फरमान पर खड़े नजर आते हैं. विरेंद्र ने बताया कि उनकी प्राथमिकता होती है कि वो योगी जी के बताए गए कामों को पूरी तत्परता से निभाएं.

वहीं गोरखपुर जिले से लेकर प्रदेश और देश के हर वीवीआईपी लोगों के मोबाइल नंबर उनके जुबान पर हैं. यही वजह है कि योगी के एक इशारे पर ये देश से लेकर विदेश तक में मौजूद योगी समर्थकों से बात करा देते हैं.

तीसरा नाम प्रोफेसर यूपी सिंह का आता है. ये स्वर्गीय वीर बहादुर सिंह यूनिवर्सिटी जौनपुर के पूर्व कुलपति रह चुके हैं. गोरक्षनाथ पीठ से 40 सालों से अधिक समय से जुड़े हैं. मठ के वित्तीय कार्यों का जिम्मा इन्ही के ऊपर रहता है. एक रुपए हो या एक करोड़ का चेक, इनके दस्खत के बिना पैसा नहीं निकल सकता है.

चौथा नाम इंजीनियर पीके मल्ल का है. ये और योगी सन 2000 के पहले से जुड़े हैं. मल्ल हिंदू युवा वाहिनी के पहले प्रदेश कार्यालय प्रभारी थे, लेकिन अब इनकी जिम्मेदारी संगठन में प्रदेश महामंत्री की है. वाहिनी से जुड़ा हर कार्य इंजीनियर मल्ल ही देखते हैं.

पांचवा नाम आता है उमेश सिंह उर्फ बल्लू राय का. उनका परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी इस पीठ की सेवा करता आ रहा है. बल्लू राय 13 सालों से अनवरत योगी आदित्यनाथ की सेवा में लगे हुए हैं. वर्तमान में वे सीएम योगी आदित्यनाथ के निजी सहायक के तौर पर हमेशा योगी के साथ नजर आते हैं और हमेशा उन्हीं के साथ रहते हैं.

छठा नाम आता है विनय गौतम का, जो गोरखनाथ पीठ के फोटोग्राफर जर्नलिस्ट हैं. मीडिया से समन्वय की जिम्मेदारी इन्हीं के पास है. विनय वर्ष 2007 से इस पीठ और योगी आदित्यनाथ की सेवा में लगे हुए हैं.

सातवां नाम आता है दिव्य कुमार सिंह का, जो सीएम योगी के सोशल मीडिया को हैंडल करते है. वो साल 2003 से इस पीठ और योगी आदित्यनाथ से जुड़े हुए हैं. कम्प्यूटर सेक्शन का चार्ज इन्हीं के पास है. सीएम योगी का मेल, फेसबुक और ट्विटर आदि अकाउंट, उनके निर्देश पर मेंटेन होते हैं.

आठवां नाम है डॉ. प्रदीप राव का, जो महाराणा प्रताप जंगल धूसढ़ कॉलेज के प्राचार्य हैं. महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् का समस्त कार्य और योगी आदित्यनाथ द्वारा संपादित समस्त पुस्तकों का प्रकाशन कराने की जिम्मेदारी इन पर है. ये पीठ से 35 वर्षों से भी अधिक समय से जुड़े हैं. जो सीएम योगी के बेहद करीबी बताए जाते है.

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First published: May 19, 2017
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