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एक हार ने बदल दी योगी आदित्यनाथ की जिंदगी!

ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: March 26, 2017, 10:25 AM IST
एक हार ने बदल दी योगी आदित्यनाथ की जिंदगी!
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ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: March 26, 2017, 10:25 AM IST
उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को जानने वाले बताते हैं कि उनकी कट्टर हिन्दूवादी और बागी प्रवृत्‍ति ने ही उन्‍हें यूपी के सत्‍ता में शीर्ष तक पहुंचाया.

बगावत शुरू होती है उनके कॉलेज टाइम से. कोटद्वार के पत्रकार गिरीश तिवारी बताते हैं कि योगी कोटद्वार डिग्री कॉलेज, उत्‍तराखंड में पढ़ते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े थे. वर्ष 1991 में यहां छात्र संघ चुनाव हो रहा था. उन्‍होंने महासचिव पद के लिए टिकट मांगा. लेकिन संगठन ने किसी और को मौका दिया.

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फिर योगी ने एबीवीपी के खिलाफ बगावत कर दी. वह चुनाव बुरी तरह हार गए. पांचवें नंबर पर आए थे. उन्‍हें छात्र नेता अरुण तिवारी ने शिकस्त दी. इस वाकये ने योगी की जिंदगी बदल दी. फिर वे अपने मामा महंत अवैद्यनाथ के पास गोरखपुर स्‍थित गोरखनाथ मंदिर आ गए.



पत्रकार टीपी शाही बताते हैं कि गोरखपुर में भी योगी का बगावती अंदाज देखने को मिला. वर्ष 2002 में उन्‍होंने हिंदू युवा वाहिनी बनाई. इसी साल विधानसभा चुनाव में उनके इस तेवर का भाजपा ने सामना किया.

गोरखपुर सीट से पार्टी ने यूपी के कैबिनेट मंत्री रहे शिव प्रताप शुक्‍ल को प्रत्‍याशी बनाया.जबकि यहां से योगी अपने खास राधा मोहन दास अग्रवाल के लिए टिकट मांग रहे थे. पार्टी ने अपने कैबिनेट मंत्री को टिकट देना उचित समझा. फिर क्‍या था योगी ने अखिल भारतीय हिंदू महासभा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतार दिया.

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योगी का वहां प्रभाव इतना है कि अग्रवाल चुनाव जीत गए और शुक्‍ला को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा था. शुक्‍ला इस समय भाजपा से राज्‍यसभा सांसद हैं.



दिल्‍ली में बीजेपी कवर करने वाले वरिष्‍ठ पत्रकार सुभाष निगम का मानना है कि आक्रामक और बागी तेवर न होता तो शायद ही योगी को पार्टी यहां तक पहुंचाती. इसीलिए उन्‍हें जनता ने भी पसंद किया और पार्टी ने भी. बीजेपी को उनसे डर भी लगता है, उनकी जरूरत भी लगती है. आक्रामकता की वजह से ही वह संघ के चहेते भी हैं.

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First published: March 21, 2017
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