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रामनाथ कोविंद की पोती बोली- बाबा ने हमारे गांव को महान बना दिया

Amit Tiwari | News18Hindi
Updated: June 20, 2017, 9:35 AM IST
रामनाथ कोविंद की पोती बोली- बाबा ने हमारे गांव को महान बना दिया
एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की पोती संगीता
Amit Tiwari | News18Hindi
Updated: June 20, 2017, 9:35 AM IST
बाबा को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने का बाद अब हमारा गांव एक महान गांव बन गया है. हमें ख़ुशी है और गर्व भी है. बाबा अब एक ऐतिहासिक हस्ती बन गए हैं. अभी पिछले साल ही 8 अप्रैल को परौंख आए थे और सबसे मिले थे. ये कहना है एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और वर्तमान में बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद की पोती का संगीता का.

न्यूज़18 से बातचीत में संगीता कहती हैं, “बाबा जब भी गांव आते हैं हम सबसे मिलते हैं. जब भी कुछ काम होता तो फोन पर भी बात होती है. आज हमारा गांव जो उनकी जन्मभूमि है एक महान गांव बन गया है. इससे ज्यादा ख़ुशी की बात क्या हो सकती है.”

अगर रामनाथ के कोविंद के सगे संबंधियों की मानें तो उन्हें ‘सादगी के राम’ नाम से पुकारा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. बचपन से ही पढ़ाई में होनहार कोविंद का जन्म कानपुर देहात के डेरापुर के गांव परौंख में 1 अक्टूबर 1945 को हुआ था. पिता मैकूलाल गांव में ही एक छोटी सी दुकान चलाते थे. कोविंद सात भाई बहन में सबसे छोटे थे और कक्षा 8 तक की शिक्षा गांव में ही ली. उसके बाद वे कानपुर चले आए. यहां बीएनएसडी इंटर कॉलेज चुन्नीगंज से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने डीएवी कॉलेज से ग्रेजुएशन और डीसी लॉ कॉलेज से वकालत की पढ़ाई पूरी की.

'पढ़ने में सबसे होशियार थे कोविंद'

उनके सहपाठी बताते हैं कि वे बचपन से ही पढ़ने में बहुत तेज थे. जब सभी खेलते थे तो वे अपने घर के आगे बने चबूतरे पर पढ़ते थे. कोविंद से एक साल सीनियर राजकिशोर कहते हैं कि वे शुरू से ही बहुत होशियार थे. उन्हें रामायण के कई पाठ कंटस्थ याद थे. इसी वजह से गांव के बुजुर्ग अक्सर उनसे रामायण सुना करते थे.  धार्मिक कार्यों के प्रति लगाव उनका शुरू से ही था.

'हम तो उनके गोदी में खेले हैं'

Ramnath Kovind Nephew Anil
एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के भतीजे अनिल


भतीजे अनिल आज गदगद हैं. चाचा का देश के सरवोछ पद पर आसीन होना लगभग तय है. ख़ुशी इतनी थी कि बात करते वक्त गला भर आया. कहा, ”हम तो उनके गोदी में खेले हैं. उनकी भी पैदाईश यहीं की है और चाचा भी यहीं पैदा हुए. आज बहुत ख़ुशी है कि वे इस मुकाम पर पहुंचे.”

इतनी बड़ी हस्ती का परिवार जी रहा है सादगी भरा जीवन

कोविंद के सादगी और इमानदारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे इतने उच्च पदों पर रहे, लेकिन उनका परिवार आज भी सादगी से रहता है. भतीजे अनिल से जब पूछा गया कि चाचा इतने बड़े पदों पर रहे दो बार राज्यसभा सदस्य जाने माने अधिवक्ता भी रहे, फिर राज्यपाल बने, उन्होंने परिवार के लिए क्या किया, जवाब बहुत ही साधारण सा था. “ वे इतने सीधे साधे हैं कि उन्होंने किसी अन्य तरीके से परिवार की मदद के लिए सोचा ही नहीं. जो जहां है सब लोग कमाते खाते हैं. सब ख़ुशी से हैं और क्या चाहिए. हां गांव के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया है. बैंक की शाखा खुलवाई, कॉलेज बनवाया, चार ट्यूबवेल लगवाए. और भी बहुत कुछ कर रहे हैं.

भतीजों की है कपड़ों की दुकान

कोविंद के बड़े भाई प्यारेलाल कानपुर के झींझक में अपने बेटे के साथ रहते हैं. उनके बेटे की कपड़ों की दुकान है. दूसरे भाई मोहनलाल के बेटे सुरेश भी झींझक में रहते हैं और उनकी भी कपड़ों की दुकान है. इतने बड़े हस्ती के सगे संबंधी होने के बावजूद ये लोग सादगी से ही जीवन यापन कर रहे हैं. इतना ही नहीं इन्हें इसका कोई मलाल नहीं है बल्कि गर्व है.
First published: June 20, 2017
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