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‘चाचा रामनाथ कोविंद बहुत ही स्वावलंबी थे, पढ़ाई के लिए स्टेनो की नौकरी करते थे’

Amit Tiwari | News18Hindi
Updated: June 20, 2017, 10:03 AM IST
‘चाचा रामनाथ कोविंद बहुत ही स्वावलंबी थे, पढ़ाई के लिए स्टेनो की नौकरी करते थे’
रामनाथ कोविंद के साथ भतीजा दीपक
Amit Tiwari | News18Hindi
Updated: June 20, 2017, 10:03 AM IST
राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए ने रामनाथ कोविंद (71) को अपना उम्मीदवार बनाया है. वर्तमान में बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद यूपी के कानपुर देहात के रहने वाले हैं. न्यूज़18हिंदी ने इनके भाई प्यारे लाल के बेटे दीपक और भांजे श्याम बाबू से बात करके इनकी पर्सनल लाइफ और कुछ किस्सों के बारे में जाना.

शुरू से ही स्वावलंबी थे चाचा

रामनाथ कोविंद के बड़े भाई प्यारेलाल झिझक में कपड़ों का व्यवसाय करते हैं. उनके बेटे दीपक गांव में स्कूल में सहायक अध्यापक हैं. चाचा के राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने पर गदगद दीपक कहते हैं, “चाचा शुरू से ही स्वावलंबी थे. उनके भाई उन्हें पढ़ाई के लिए पैसे देने की बात करते थे लेकिन वे लेते नहीं थे. उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए कानपुर कचहरी में स्टेनो का भी काम किया.”

दीपक ने कहा, “चाचा को उस समय 125 रुपए मिलते थे और स्कालरशिप भी मिलती थी, लिहाजा उनका काम चल जाता था.”

दीपक ने बताया कि जब भी उन्होंने उनसे मदद की बात की तो वे एक ही बात कहते खुद स्वावलंबी बनों. मैंने भी खुद से यह मुकाम हासिल की है. हालांकि चाचा पढ़ाई के लिए हमेशा प्रोत्साहित करते रहते थे. यही वजह है कि आज उनके परिवार में सभी ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट हैं.

दीपक ने बताया कि अभी पिछले साल अक्टूबर में वे अपने पिता के इलाज के लिए पटना राजभवन में करीब डेढ़ महीने ठहरे थे. वे आज भी सबसे उसी तरह बात करते हैं.

'घर का सदा खाना है पसंद, मिर्च-मसाला नहीं खाते'

रामनाथ कोविंद की माता जी के निधन के बाद उन्होंने गांव छोड़ दिया था और अपने बहन स्व गोमती देवी के कानपुर स्थित आवास पर रहकर ही पूरी पढ़ाई की.

भांजे श्यामबाबू कहते हैं, “ मामा शुरू से ही बहुत ही सरल स्वाभाव के थे. कभी खाना उन्हूने मांगकर नहीं खाया. जो भी मिल गया उसे खा लिया. कभी दुबारा मांगते नहीं थे. जितना मिला उतना ही खा लिया. इतना तक कि खाने में नमक कम है या तेज कभी इसकी शिकायत नहीं की. ”

श्याम बाबू ने कहा कि मामा को घर का बना खाना पसंद है. उन्हें खाने में मिर्च मसाला पसंद नहीं. वे आज भी जब कानपुर आते हैं तो फोन पर बोल देते हैं घर में ही खाना खाऊंगा.

'मां के हाथों से ही खाना खाते थे'

भांजे श्याम बाबु ने कहा कि मामा सिर्फ और सिर्फ मां के हाथों परोसा खाना ही खाते थे. उन्होंने कहा मां बताती थीं कि, ‘एक बार वे घर के किसी काम से बहार चली गईं तो उन्होंने खाना ही नहीं खाया. शाम को जब 6 बजे लौटी तो मामा भूखे बैठे थे. उसके बाद मां ने उन्हें खाना खिलाया. उसके बाद से मां ने कभी उन्हें बिना खाना दिए कहीं नहीं गई.”
First published: June 20, 2017
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