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राष्ट्रपति चुनाव: पीएम मोदी और अमित शाह का मास्टरस्ट्रोक हैं रामनाथ कोविंद!

Amit Tiwari | News18Hindi
Updated: June 20, 2017, 10:41 AM IST
राष्ट्रपति चुनाव: पीएम मोदी और अमित शाह का मास्टरस्ट्रोक हैं रामनाथ कोविंद!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रामनाथ कोविंद
Amit Tiwari | News18Hindi
Updated: June 20, 2017, 10:41 AM IST
17 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में लामबंद हो रहे विपक्ष को बिखेरने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एक बार फिर मास्टरस्ट्रोक दांव खेला है.

राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी को लेकर चल रहे सस्पेंस से सोमवार को पर्दा उठाते हुए अमित शाह ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को एनडीए का प्रत्याशी घोषित किया है. रामनाथ कोविंद कानपुर के देहात से आते हैं और दलित वर्ग का नेतृत्व करते हैं. दो बार राज्य सभा सांसद रहे कोविंद पार्टी के अनुसूचित जाति और जनजाति मोर्चे के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के समय में पार्टी का प्रमुख दलित चेहरा रहे कोविंद काफी सौम्य और सरल स्वाभाव के हैं. यही वजह है कि अब जब उनके नाम की घोषणा राष्ट्रपति पद के लिए हो चुकी है तो विपक्ष को भी उन्हें नकारने में दिक्कत हो सकती है.



वजह यह है कि एक तो कोविंद बेदाग़ छवि के नेता हैं, दूसरा दलित वर्ग से आते हैं, और तीसरा यह की वे संघी हैं. इस स्थिति में कांग्रेस और बसपा समेत कई विपक्षी पार्टी उनके नाम पर पशोपेश में पड़ सकती हैं. कोविंद के नाम का विरोध करना उनके लिए धर्म संकट जैसी स्थिति होगी.

सूत्रों की मानें तो एक या दो दलों के अलावा सभी विपक्षी पार्टियां कोविंद के नाम पर अपनी सहमति दे चुकीं हैं. यही वजह है कि अमित शाह ने आज इसका औपचारिक ऐलान कर दिया.

इसके अलावा पार्टी ने आरएसएस को भी नाराज नहीं किया है. दरअसल आरएसएस के साफ़ निर्देश थे कि सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए ऐसे नाम की घोषणा होनी चाहिए जो दलित होने के साथ-साथ संघ से जुड़ा हो. और ऐसे में कोविंद ही एक ऐसा चेहरा थे जो आरएसएस के मापदंड पर सही उतर रहे थे.

पॉलिटिकल पंडितों के मुताबिक बीजेपी ने कोविंद के सहारे मोदी के उत्तर प्रदेश से लगाव और दलितों के प्रति पार्टी का झुकाव दोनों पर निशाना भी साधा है.

वरिष्ठ राजनैतिक समीक्षक और पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी ने कहा, 'रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के पीछे तीन बातें हैं पहला तो यह कि बीजेपी में मोदी युग का उदय हो चुका है और वाजपेयी अडवाणी युग का अंत. दूसरा यह कि कोविंद कट्टर आरएसएस होने के साथ भी बेदाग छवि के हैं. लिहाजा कांग्रेस समेत अन्य विपक्ष के लिए अब धर्म संकट खड़ा हो गया है. तीसरा यह कि बीजेपी ने एक सन्देश यह दिया है कि दलितों का पार्टी में अच्छा भविष्य है. जिस तरह से गुजरात और हाल में सहारनपुर में जातीय हिंसा हुई उसके बाद कोविंद को राष्ट्रपति पद के लिए खड़ा करके पार्टी ने दलितों को अपनी तरफ आकर्षित करने का काम किया है.'

अब एक बात तो तय है कि अगर कोविंद के नाम पर विपक्ष भी सहमत हो जाता है तो देश के प्रधानमंत्री और देश के राष्ट्रपति दोनों ही उत्तर प्रदेश से होंगे.
First published: June 19, 2017
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