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सरल और सौम्य राम नाथ कोविंद का कानपुर से है गहरा रिश्ता

News18Hindi
Updated: June 19, 2017, 2:46 PM IST
सरल और सौम्य राम नाथ कोविंद का कानपुर से है गहरा रिश्ता
देश के राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए के उम्मीदवार बनाए गए रामनाथ कोविंद का उत्तर प्रदेश के कानपुर से गहरा रिश्ता रहा है.
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Updated: June 19, 2017, 2:46 PM IST
देश के राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए के उम्मीदवार बनाए गए रामनाथ कोविंद का उत्तर प्रदेश के कानपुर से गहरा रिश्ता रहा है.

भले ही वह इस समय वह बिहार के राज्यपाल हों लेकिन कानपुर से लगातार उनका जुड़ाव रहा है. यही कारण है कि वह समय-समय पर यूपी का दौरा करते रहे हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी युग के रामनाथ कोविंद यूपी में बीजेपी के सबसे बड़े दलित चेहरा माने जाते रहे हैं.

स्वाभाव से सरल और सौम्य कोविंद का जन्म कानपुर देहात की डेरापुर तहसील के गांव परौंख में हुआ. यह वह दौर था जब चम्बल और यमुना के बीहड़ों में डकैतों का राज हुआ करता था. हालांकि जब राम नाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू की तो उनका पूरा परिवार वहां से दिल्ली शिफ्ट हो गया.

उनके पुराने साथियों के मुताबिक कोविंद का पॉलिटिकल सितारा उस वक्त चमका, जब 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद वह तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव बने. इसके बाद वह बीजेपी नेतृत्व के संपर्क में आए.

कहा जाता है पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय में जिस तरह सिकंदर बख्त पार्टी का मुस्लिम चेहरा हुआ करते थे, उसी तरह राम नाथ कोविंद पार्टी में दलित चेहरा थे.

एक समय ऐसा भी था जब पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर गंभीरता से विचार किया. उस समय वह पार्टी की अनुसूचित जाति एवं जनजाति मोर्चे के अध्यक्ष थे. 1990 में कानपुर के घाटमपुर से रामनाथ कोविंद ने लोकसभा चुनाव भी लड़ा.

बीजेपी को कोविंद को टिकट देने के पीछे संसदीय क्षेत्र में दलित बाहुल्य वोटर होना अहम कारण माना गया. हालांकि इस चुनाव में कोविंद को हार का सामना करना पड़ा.

इसके बाद राम नाथ कोविंद ने कभी भी चुनाव नहीं लड़ा. पार्टी का उन पर भरोसा लगातार कायम रहा, यही कारण था कि 1994 और 2006 में उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया.

इसके बाद कोविंद राष्ट्रीय प्रवक्ता भी बने और 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी का महासचिव बनाकर उन्हें उत्तर प्रदेश भेजा गया, ताकि वह दलित और अति​ पिछड़ों को पार्टी से जोड़ सकें.
राम नाथ कोविंद के करीबियों का कहना है कि वह स्वभाव से बेहद साधारण व्यक्ति हैं.

हालांकि उनका ज्यादातर समय दिल्ली में ही गुजरा है लेकिन कानपुर शहर और कानपुर देहात के लिए उनका प्रेम आज भी उतना ही है. यही कारण है कि कोविंद ने अपने पैतृक घर को गांव की पंचायत को दान दे दिया है. ताकि वहां मिलन केंद्र बने, जहां शादी-विवाह जैसे कार्यक्रम मुफ्त में कराए जा सकें.
First published: June 19, 2017
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