यूपी में इन दिग्गज नेताओं के बेटे-बेटियों ने लहराया जीत का परचम

Ajayendra Rajan | News18Hindi

Updated: March 12, 2017, 12:24 PM IST
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यूपी में वर्षों से प्रदेश की राजनीति में धमक दर्ज कराने वाले दिग्गज धीरे-धीरे पर्दे के पीछे जा रहे हैं, उनकी जगह नए युवा किरदार ले रहे हैं. इस चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक कई सियासी दिग्गजों ने अपनी विरासत बेटे-बेटियों का सौंप दी.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कैराना के हुकुम सिंह, बाराबंकी से पीएल पुनिया हों या रायबरेली से बाहुबली नेता अखिलेश सिंह और मुख्तार अंसारी जैसे राजनीति के धुरंधरों ने इस बार के चुनाव में अपने बच्चों को उत्तराधिकार सौंपा, इसमें कुछ सफल हुए कुछ हार गए.

यूपी में इन दिग्गज नेताओं के बेटे-बेटियों ने लहराया जीत का परचम
यूपी में वर्षों से प्रदेश की राजनीति में धमक दर्ज कराने वाले दिग्गज धीरे-धीरे पर्दे के पीछे जा रहे हैं, उनकी जगह नए युवा किरदार ले रहे हैं. इस चुनाव में पश्चिम उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक कई सियासी दिग्गजों ने अपनी विरासत बेटे-बेटियों का सौंप दी.

राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह की ऐतिहासिक जीत

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह को इस बार भाजपा ने नोएडा से प्रत्याशी बनाया. पंकज सिंह ने सपा के सुनील चौधरी को एक तरफा मुकाबले में एक लाख से ज्यादा वोटों से हराया. पंकज सिंह को जहां एक लाख 62,417 वोट मिले, वहीं सुनील चौधरी को महज 58,401 वोट मिले.

हुकुमदेव सिंह की बेटी मृगांका हारीं

हुकुमदेव सिंह की बेटी मृगांका को भाजपा ने कैराना विधानसभा का टिकट दिया गया. हुकुमदेव इस सीट पर सात बार जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे. लेकिन मृगांका ऐसा नहीं कर सकीं. उन्हें सपा के नाहिद हसन से हार का सामना करना पड़ा. कैराना में समाजवादी पार्टी के नाहिद हसन ने 98,880 वोट हासिल किए, जबकि हुकुम देव सिंह की बेटी और भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह 77,668 वोट ही हासिल कर सकीं. इनके अलावा राष्ट्रीय लोकदल अनिल कुमार 19,992 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे.

कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह की बड़ी जीत

कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह को  भाजपा ने अतरौली से टिकट दिया. संदीप ने यूके की लीड्स यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन में पोस्ट ग्रैजुएशन किया है. 25 साल के संदीप पर उस सीट को जीतने की चुनौती थी, जिस पर उनके दादा और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने आठ बार जीत हासिल की.

1967 में पहली बार जनसंघ से विधायक बनने के बाद कल्याण सिंह को इस सीट पर सिर्फ एक बार हार 1980 में झेलनी पड़ी.  लेकिन संदीप सिंह ने अपने पहले मुकाबले में ही समाजवादी पार्टी के वीरेश यादव को 50 हजार से ज्यादा मतों से हरा दिया. संदीप को जहां एक लाख 15,397 मत मिले, वहीं वीरेश यादव 64,430 वोट ही हासिल कर सके.

ब्रह्मदत्त द्विवेदी के बेटे मेजर सुनील दत्त द्विवेदी जीते

भाजपा ने ब्रह्मदत्त द्विवेदी के बेटे मेजर सुनील दत्त द्विवेदी को फर्रुखाबाद से टिकट दिया था. मेजर सुनील दत्त द्विवेदी ने कानपुर विश्वविद्यालय से बीएससी किया और मुंबई विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की. मेजर सुनील दत्त द्विवेदी जी ने भारतीय सेना में मेजर रैंक तक सेवाएं दी. सुनील दत्त द्विवेदी ने बसपा के मोहम्मद उमर खान को 40 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. सुनील को जहां 93,626 वोट मिले, वहीं उमर खान 48,199 वोट हासिल कर सके. सपा के विजय सिंह यहां तीसरे नंबर पर रहे.

बृजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भी जीते

बाहुबली छवि के एक और नेता बृजभूषण शरण सिंह इस समय कैसरगंज से भाजपा सांसद हैं. वह पांच बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं. वर्तमान में वे भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष भी हैं. बृजभूषण ने इस बार अपने बेटे प्रतीक भूषण सिंह को राजनीति का अपना उत्तराधिकारी बनाया. प्रतीक को भाजपा ने गोंडा सदर सीट से टिकट दिया. प्रतीक भूषण ने पहले मुकाबले में ही बसपा के मोहम्मद जलील खान को करीब 12 हजार वोट से मात दी. प्रतीक ने जहां 58,254 वोट हासिल किए, वहीं जलील खान 46,576 मत हासिल कर सके. सपा के सूरज खान 41,477 मत के साथ तीसरे और शिवसेना के महेश नारायण तिवारी 35,606 मत के साथ तीसरे नंबर रहे.

अखिलेश सिंह की बेटी अदिति की एकतरफा जीत

बाहुबली विधायक अखिलेश सिंह की बेटी अदिति सिंह भी चुनाव जीतने में कामयाब रही. रायबरेली के निर्दलीय विधायक अखिलेश सिंह की पहचान उत्तर प्रदेश में एक बाहुबली नेता की है. अपराध के कई संगीन मामलों में आरोपी अखिलेश पहले कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में रायबरेली सदर से चुनाव जीतते रहे. बाद में पार्टी ने दूरी बना ली तो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी जेल से उनकी जीत का सिलसिला जारी रहा.  लेकिन अब गिरते स्वास्थ्य की वजह से उन्होंने अपनी बेटी अदिति सिंह को उत्तराधिकार सौंप दिया. अमेरिका से पढ़कर लौटीं अदिति ने अखिलेश को निराश नहीं किया और पहले चुनाव में ही प्रदेश की सबसे बड़ी जीतों में से एक हासिल की. अदिति ने करीब-करीब एकतरफा मुकाबले में बसपा के मोहम्मद शाहबाज खान के 89 हजार से ज्यादा वोटों से मात दी. अदिति ने जहां 1 लाख 28,319 वोट हासिल किए, वहीं बसपा के शाहबाज खान ने 39,156 वोट पाए. इनके अलावा भाजपा की अनीता श्रीवास्तव 28 हजार वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं.

आजम जीते, बेटा अब्दुल्ला भी जीता

उत्तर प्रदेश की समाजवादी राजनीति में आजम खान एक बड़ा नाम माना जाता है. अपने विवादित बोल और मुलायम सिंह यादव से दोस्ती उनकी अहम पहचान है. रामपुर से आजम ने जहां नवीं बार चुनाव ​जीतने का रिकॉर्ड बनाया, वहीं उनके बेटे आजम ने भी पहली बार विधानसभा में पहुंचने का हक हासिल कर लिया.अब्दुल्ला आजम ने भाजपा के लक्ष्मी सैनी को करीब 50 हजार मतों से हराया. अब्दुल्ला आजम को जहां एक लाख 6443 मत मिले, वहीं लक्ष्मी सैनी को 53,347 वोट मिले. वहीं इस सीट पर वर्षों से जीत का परचम लहरा रहे बसपा के नवाब काजिम अली खान 42 हजार वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे.

मुख्तार जीते मगर अब्बास को मिली हार

बाहुबली मुख्तार अंसारी तो मऊ सदर सीट से एक बार फिर जीत गए लेकिन उनके बेटे अब्बास अंसारी जीत हासिल नहीं कर सके. पहली बार मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी को भी बसपा ने घोसी से चुनाव मैदान में उतारा. अब्बास अंसारी अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शूटर हैं. अब्बास अंसारी को भाजपा से फागू चौहान ने करीब सात हजार वोट से मात दी. फागू चौहान को 88298 मत मिले, वहीं अब्बास को 81,295 मत मिले. वहीं सपा के सुधाकर 59,256 मत के साथ तीसरे नंबर पर रहे.

नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल तीसरी बार बने विधायक

नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल एक बार फिर जीत हासिल करने में सफल रहे. हरदोई में नरेश अग्रवाल को यूपी की राजनीति का धुरंधर माना जाता है. इस समय नरेश अग्रवाल सपा से राज्यसभा सांसद हैं. उनका उत्तराधिकार उनके बेटे नितिन अग्रवाल ने बखूबी संभाल लिया है.

नरेश अग्रवाल के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई हरदोई सीट से नितिन ने 2007 में उपचुनाव जीता और पहली बार विधायक बने. इसके बाद 2012 में वह दोबारा विधायक चुने गए और अखिलेश सरकार ने इस युवा चेहरे को मंत्री बनाया. अपने तीसरे चुनाव नितिन अग्रवाल ने करीबी मुकाबले में भाजपा को राजा बख्श सिंह को करीब पांच हजार वोट से हराया. नितिन को जहां 97,735 वोट मिले, वहीं राजा बख्श 92,626 वोट हासिल कर सके.

पीएल पुनिया के बेटे तनुज की सियासत में शुरुआत हार के साथ

पीएल पुनिया के बेटे तनुज पुनिया कांग्रेस के दिग्गज नेता पीएल पुनिया ने भी अपने बेटे तनुज पुनिया को इस बार चुनाव मैदान में उतारा लेकिन तनुज सफल नहीं हो सके. आईआईटी रुड़की से कैमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ले चुके तनुज अभी तक आईएएस की तैयारी कर रहे थे. तनुज पुनिया अपने पहले चुनाव में भाजपा के उपेंद्र सिंह के हाथों हार गए. उपेंद्र सिंह ने जहां एक लाख 11,064 वोट हासिल किए, वहीं तनुज पुनिया को 81,883 वोट मिले.

मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव को मिली हार

मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव को भी अपने पहले मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा. लखनऊ कैंट से भाजपा की डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को एकतरफा मुकाबले में 33 हजार से ज्यादा मतों से हरा दिया. रीता जोशी को 95 हजार 402 मत मिले, वहीं अपर्णा यादव काफी कोशिश के बाद भी महज 61 हजार 606 मत ही हासिल कर सकीं. बसपा के योगेश दीक्षित 26 हजार मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे.

मुलायम के भतीजे अनुराग यादव भी हारे

मुलायम के भतीजे अनुराग यादव भी अपर्णा यादव की तरह चुनाव हार गए. सांसद धर्मेंद्र यादव के भाई अनुराग यादव को सरोजनीनगर की हाइप्रोफाइल सीट पर भाजपा की स्वाति सिंह ने 34 हजार से ज्यादा मतों से करारी शिकस्त दी. स्वाति सिंह ने जहां एक लाख 8,506 वोट हासिल किए, वहीं अनुराग यादव 74,327 वोट ही हासिल कर सके. तीसरे नंबर पर शंकरी सिंह अनुराग से जरा सा पीछे रहे, उन्होंने 71,791 वोट हासिल किए.

स्वामी प्रसाद मौर्य जीते, बेटा उत्कृष्ट हारा

स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कृष्ट मौर्य को भाजपा ने ऊंचाहार सीट से प्रत्याशी घोषित किया. स्वामी प्रसाद मौर्य तो पड़रौना से चुनाव जीतने में सफल रहे लेकिन उत्कृष्ट ऐसा नहीं कर सके. उत्कृष्ट इससे पहले भी बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन सफल नहीं रहे हैं. उत्कृष्ट को नजदीकी मुकाबले में सपा के मंत्री रहे मनोज कुमार पांडेय ने महज दो हजार वोटों से हराया. मनोज को 59,103 वोट मिले, वहीं उत्कृष्ट मौर्य को 57,169 वोट मिले.

लालजी टंडन के बेटे आशुतोष की फिर बड़ी जीत

वहीं लालजी टंडन के बेटे आशुतोष टंडन उर्फ गोपाल टंडन दोबारा जीत के लिए भाग्य आजमा रहे थे. लखनऊ पूर्वी सीट पर गोपाल टंडन ने लगातार दूसरी बार करीब-करीब एक तरफा जीत हासिल की. उन्होंने एक लाख 35,167 मत हासिल कर, कांग्रेस के अनुराग सिंह को करीब 80 हजार मतों से हराया. तीसरे स्थान पर बसपा के सरोज कुमार शुक्ला रहे.

First published: March 12, 2017
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