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आखिर ऐसा क्या हुआ विदाई के बाद पति को रास्ते में छोड़ मायके लौट आई दुल्हन!

ETV UP/Uttarakhand
Updated: April 20, 2017, 6:39 PM IST
आखिर ऐसा क्या हुआ विदाई के बाद पति को रास्ते में छोड़ मायके लौट आई दुल्हन!
दहेज को लेकर बारात लौटाने के आपने कई मामले सुने होंगे. लेकिन शायद ही आपने कोई ऐसा किस्सा सुना हो जब विदाई के बाद भी दुल्हन अपने ससुराल नहीं पहुंची. बल्कि आधे रास्ते में ही पति को छोड़ वापस मायके लौट आई. आखिर रास्ते में ही ऐसा क्या हुआ जो सुसुराल जाने की बजाय दुल्हन को वापस मायके लौटने का फैसला करना पड़ा.
ETV UP/Uttarakhand
Updated: April 20, 2017, 6:39 PM IST
दहेज को लेकर बारात लौटाने के आपने कई मामले सुने होंगे. लेकिन शायद ही आपने कोई ऐसा किस्सा सुना हो जब विदाई के बाद भी दुल्हन अपने ससुराल नहीं पहुंची. बल्कि आधे रास्ते में ही पति को छोड़ वापस मायके लौट आई. आखिर रास्ते में ही ऐसा क्या हुआ जो सुसुराल जाने की बजाय दुल्हन को वापस मायके लौटने का फैसला करना पड़ा.

शादी की रस्में पूरी कर ये दुल्हन घर से विदा हुई थी अपनी नई दुनिया बसाने के लिए. लेकिन दुल्हे की कुछ बातें इस दुल्हन को इतनी नागवार लगी कि दुल्हन को अपने पिता के घर वापस लौटने का फैसला करना पड़ा.

दरअसल उत्तरकाशी के पास कोटियाल गांव की युवती की शादी मंगलवार को विश्वनाथ मंदिर में डूंडा गांव के रहने वाले दलवीर बिष्ट के साथ हुई थी. शादी की रस्में पूरी होने के बाद विदाई भी हुई. लेकिन बारात को आधे रास्ते से ही बिना दुल्हन के बैरंग लौटना पड़ा.

दुल्हन का आरोप है कि डूंडा बाजार पहुंचने पर दूल्हे ने दुल्हन से मनमुताबिक दहेज न मिलने पर नाराजगी जताई. जिसके बाद दुल्हन को विदा करने के लिए साथ में गए रिश्तेदारों ने दूल्हे को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन दुल्हे ने एक नहीं सुनी. बीच रास्ते में ही दहेज को लेकर दोनों पक्षों में बहस हो गई. इतना ही नहीं

नौबत गाली गलौच तक आ पहुंची. जिसके बाद दुल्हन ने अपने पिता को सूचना दी. इस पर उसके पिता गांव के कुछ लोगों को साथ लेकर डूंडा गए और अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए दलवीर को समझाने की कोशिश की. लेकिन वह कुछ भी सुनने समझने को तैयार नहीं हुआ.

इस पर दुल्हन ने आधे रास्ते से ही अपने पिता के साथ वापस मायके जाने का फैसला लिया. मामले में बुधवार को दुल्हन के पिता ने उत्तरकाशी कोतवाली में तहरीर दी है.

(उत्तरकाशी से ईटीवी रिपोर्टर हरीश थपलियाल के इनपुट के साथ )
First published: April 20, 2017
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