उत्तराखंड: रिटायरमेंट के बाद भी यहां अफसर करवा लेते हैं एडजेस्टमेंट!

ETV UP/Uttarakhand
Updated: April 20, 2017, 4:41 PM IST
उत्तराखंड: रिटायरमेंट के बाद भी यहां अफसर करवा लेते हैं एडजेस्टमेंट!
उत्तराखंड में नौकरशाही और राजनीतिज्ञों का अलग ही गठजोड़ नजर आ रहा है. जी हां साल दर साल नौकरशाह सरकारी नौकरी से रिटायर तो हो रहे हैं, लेकिन उनका एडजस्टमेंट उतनी ही तेजी से होता है. नौकरशाहों के रिटायर्ड होने के बावजूद सरकारें उनके लिए नई नौकरी का इंतजाम कर ही देती हैं.
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Updated: April 20, 2017, 4:41 PM IST
उत्तराखंड में नौकरशाही और राजनीतिज्ञों का अलग ही गठजोड़ नजर आ रहा है. जी हां साल दर साल नौकरशाह सरकारी नौकरी से रिटायर तो हो रहे हैं, लेकिन उनका एडजस्टमेंट उतनी ही तेजी से होता है. नौकरशाहों के रिटायर्ड होने के बावजूद सरकारें उनके लिए नई नौकरी का इंतजाम कर ही देती हैं.

इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहें प्रदेश में नई भर्तियां खुलने का नाम नहीं ले रही हैं. बेरोजगारों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ रही है. उनके लिए पद सृजित होते नहीं हैं. सरकारें इसके लिए आर्थिक तंगी का हवाला देती हैं.

इसके बावजूद उत्तराखंड में नौकरशाहों की एक लंबी फौज है जो रिटार्ड होने के बावजूद नौकरी कर रहे हैं. जी हां वक्त-वक्त पर सरकारें अपने प्रिय और वफादार नौकरशाहों को रिटायर्ड होते ही दूसरे पदों पर एडजस्ट करने में देर नहीं लगाती हैँ.

प्रदेश में पिछले कुछ सालों में जितने भी मुख्य सचिव रिटायर्ड हुए हैं, उनमें से सभी मुख्य सचिव और सचिव पद से रिटायर होने के पहले ही सरकार की कृपा पाकर सरकारी पदों पर नियुक्ति पा चुके हैं. वहीं ऐसा ही हाल कईं आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का भी है, जिनका रिटायरमेंट के बाद तुरंत एडजस्टमेंट कर दिया जाता है.

वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत का कहना है कि जब राजनेताओं का ब्यूरोक्रेसी पर जोर नहीं रहता है, तब इस तरह के मामले सामने आते हैं. उत्तराखंड में जिस का भी शासन काल रहा हो आधिओकारियो की मौज रही और  0अधिकारी भी सरकार से अच्छे संबध रखते रहे हैं. हालांकि बड़ा सवाल है कि कईं अधिकारी ऐसे भी हैं, जिन्हें सरकारी नौकरी में रहते हुए नाकारा समझा जाता था. वे रिटायरमेंट के बाद सरकार के लिए उपयोगी कैसे साबित हो सकते हैं.

हालांकि इस तरह के सरकारी एडजस्टमेंट पर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट के मुताबिक 10 फीसदी तक तो आफसरों को लाना चाहिए, इससे ज्यादा ठीक नहीं है.

वहीं भाजपा के अनुसार इस तरह के एडजस्टमेंट पर सरकार का अधिकार होता है, क्योंकि प्रदेश के विकास के लिए अच्छे अधिकारियों की सेवानिवृत्त होने के बाद भी जरुरत पड़ सकती है.

(देहरादून से ईटीवी रिपोर्टर किशोर रावत की रिपोर्ट)
First published: April 20, 2017
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