OMG! घर बैठे देखिए भारत का हैरिटेज ट्रांसपोर्ट म्यूजियम

OMG12:46 PM IST Jul 10, 2017

सपनों को उड़ान भरने के लिए सिर्फ हौसले काफी होते हैं. इंसान कदमों से नहीं बल्कि हिम्मत के बल पर छूता है मील का पत्थर और इंसान ऐसा सदियों से करता चला आ रहा है. उसने कभी हार नहीं मानी. वह पैदल चला, फिर हाथ गाड़ी, तांगे, पालकी, इक्के, रेलगाड़ी से होते हुए रेल और हवाई जहाज के सफर तक पहुंचा. आज का इंसान चांद से बातें कर रहा है. रॉकेट से चांद तक का सफर भी कर रहा है. इंसान के उसी सफर को एक म्यूजिएम में कैद किया हरियाणा, गुड़गांव के तरुण ठकराल ने. तरुण ठकराल ने हैरिटेज ट्रांसपोर्ट म्यूजियम बनाकर सदियों पुराने और आधुनिक वाहनों को अपने म्यूजियम में रखा. जिससे लोग जान सकें कि उनके पूर्वजों का सफर कैसा होता था. बेलगाड़ी, तांगे से लेकर लग्ज़री विंटेज कारों का बेड़ा है तरुण ठकराल के इस म्यूजियम में. ठकराल ने जो पहली कार खरीदी थी, वो साल 1932 की बनी शेवरले थी. इनके म्यजियम में लगभग 900 के करीब विभिन्न प्रकार के यातायात के साधन हैं. इनके म्यूजियम में भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी के अलावा कई अन्य देशों की एक से एक गाड़ियां मौजूद हैं. इनमें फोर्ड फेयरलैन स्काईलांइडर, शैवरलेट इंपाला हार्डटॉप सीडन, वॉक्सवैगन बस, फोर्ड सुपर डीलक्स स्टार वैगन लैंड रोवर, जनरल मोटर्स, हिदुस्तान मोटर्स की एंबेसडर प्रमुख हैं. इन्होंने एक इम्पाला कार को आर्ट पीस में तब्दील करके अपने म्यूजियम में टांगी हुई है. इसके अलावा इनके म्यूजियम में कहारों के द्वारा ढोने वाली छोटी-छोटी पालकियां भी हैं. तरुण ठकराल के इस म्यूजियम का सफर शुरू होता है सिंधु घाटी सभ्यता के समय टेरोकोटा से बनने वाली चिड़िया से, जिसमें पहिए लगे हुए हैं. इसका मतलब यह हुआ कि सिंधु घाटी सम्यता के समय लोगों में पहियों प्रचलन आम था. यहां आपको मारुति के पहले भारतीय सड़कों को फर्राटा भरने वाले पुराने स्कूटर और रॉयल एनफ़ील्ड के भी पुराने मॉडल दिखाई देंगे. तरुण ठकराल ने 20 सालों से ज्यादा समय लगा कर इस अद्भुद म्यूजियम को बनाया है. तरुण ठकराल के इस ऐतिहासिक म्यूजियम को देखने के बाद आप भी कहेंगे, OMG! ये मेरा इंडिया.

news18 hindi

सपनों को उड़ान भरने के लिए सिर्फ हौसले काफी होते हैं. इंसान कदमों से नहीं बल्कि हिम्मत के बल पर छूता है मील का पत्थर और इंसान ऐसा सदियों से करता चला आ रहा है. उसने कभी हार नहीं मानी. वह पैदल चला, फिर हाथ गाड़ी, तांगे, पालकी, इक्के, रेलगाड़ी से होते हुए रेल और हवाई जहाज के सफर तक पहुंचा. आज का इंसान चांद से बातें कर रहा है. रॉकेट से चांद तक का सफर भी कर रहा है. इंसान के उसी सफर को एक म्यूजिएम में कैद किया हरियाणा, गुड़गांव के तरुण ठकराल ने. तरुण ठकराल ने हैरिटेज ट्रांसपोर्ट म्यूजियम बनाकर सदियों पुराने और आधुनिक वाहनों को अपने म्यूजियम में रखा. जिससे लोग जान सकें कि उनके पूर्वजों का सफर कैसा होता था. बेलगाड़ी, तांगे से लेकर लग्ज़री विंटेज कारों का बेड़ा है तरुण ठकराल के इस म्यूजियम में. ठकराल ने जो पहली कार खरीदी थी, वो साल 1932 की बनी शेवरले थी. इनके म्यजियम में लगभग 900 के करीब विभिन्न प्रकार के यातायात के साधन हैं. इनके म्यूजियम में भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी के अलावा कई अन्य देशों की एक से एक गाड़ियां मौजूद हैं. इनमें फोर्ड फेयरलैन स्काईलांइडर, शैवरलेट इंपाला हार्डटॉप सीडन, वॉक्सवैगन बस, फोर्ड सुपर डीलक्स स्टार वैगन लैंड रोवर, जनरल मोटर्स, हिदुस्तान मोटर्स की एंबेसडर प्रमुख हैं. इन्होंने एक इम्पाला कार को आर्ट पीस में तब्दील करके अपने म्यूजियम में टांगी हुई है. इसके अलावा इनके म्यूजियम में कहारों के द्वारा ढोने वाली छोटी-छोटी पालकियां भी हैं. तरुण ठकराल के इस म्यूजियम का सफर शुरू होता है सिंधु घाटी सभ्यता के समय टेरोकोटा से बनने वाली चिड़िया से, जिसमें पहिए लगे हुए हैं. इसका मतलब यह हुआ कि सिंधु घाटी सम्यता के समय लोगों में पहियों प्रचलन आम था. यहां आपको मारुति के पहले भारतीय सड़कों को फर्राटा भरने वाले पुराने स्कूटर और रॉयल एनफ़ील्ड के भी पुराने मॉडल दिखाई देंगे. तरुण ठकराल ने 20 सालों से ज्यादा समय लगा कर इस अद्भुद म्यूजियम को बनाया है. तरुण ठकराल के इस ऐतिहासिक म्यूजियम को देखने के बाद आप भी कहेंगे, OMG! ये मेरा इंडिया.

Latest Live TV