OMG! इस मंदिर के नाम पर जारी हो चुका है एक हजार रुपये का सिक्का

OMG11:14 AM IST Jul 07, 2017

तमिलनाडु के पूर्वी तट पर बसा है तंजावुर शहर, जहां राजाराज चोल – I ने 11वीं सदी में बृहदेश्वर मन्दिर का निर्माण करवाया था. बृहदेश्वर मंदिर को राजाराज चोल के नाम पर राजराजेश्वर मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है. इसे तमिल भाषा में बृहदीश्वर कहा जाता है. बृहदेश्वर मंदिर विश्व में अपनी तरह का पहला और एकमात्र मंदिर है जो कि ग्रेनाइट पत्थर से बना हुआ है. बृहदेश्वर मंदिर अपनी भव्यता, वास्‍तुशिल्‍प और केन्द्रीय गुम्बद के कारण पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है. इस मंदिर को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है. यह मंदिर अपनी विशिष्ट वास्तुकला के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है. इसके निर्माण में 1,30,000 टन ग्रेनाइट पत्थरों का प्रयोग हुआ है. जबकि मंदिर के आसपास कहीं भी ग्रेनाइट पत्थर नहीं पाये जाते हैं. मंदिर के शिखर पर स्वर्णकलश स्थित है, जिस पत्थर पर यह कलश स्थित है. उसका भार लगभग 80 टन है और यह एक ही पत्थर से बना है. मंदिर में स्थापित विशाल, भव्य शिवलिंग के कारण ही इसे वृहदेश्वर नाम से जाना जाता है. भारतीय रिजर्व बैंक ने 01 अप्रैल 1954 को एक हजार रुपये का नोट जारी किया था, जिस पर बृहदेश्वर मंदिर की भव्य तस्वीर छपी है. भारत सरकार ने साल 2010 में बृहदेश्वर मंदिर के एक हजार साल पूरे होने के सम्मान में एक हजार रुपये का स्‍मारक सिक्का जारी किया. इस सिक्के की एक ओर सिंह स्‍तंभ के चित्र के साथ हिंदी में ‘सत्यमेव जयते’ खुदा हुआ है. वहीं सिक्के की दूसरी ओर राजाराज चोल- I की तस्वीर खुदी हुई है, जिसमें वे हाथ जोड़कर मंदिर में खड़े हुए हैं. सिक्के पर मंदिर की स्‍थापना के 1000 साल हिंदी और अंग्रेज़ी में लिखे हुए हैं.

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तमिलनाडु के पूर्वी तट पर बसा है तंजावुर शहर, जहां राजाराज चोल – I ने 11वीं सदी में बृहदेश्वर मन्दिर का निर्माण करवाया था. बृहदेश्वर मंदिर को राजाराज चोल के नाम पर राजराजेश्वर मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है. इसे तमिल भाषा में बृहदीश्वर कहा जाता है. बृहदेश्वर मंदिर विश्व में अपनी तरह का पहला और एकमात्र मंदिर है जो कि ग्रेनाइट पत्थर से बना हुआ है. बृहदेश्वर मंदिर अपनी भव्यता, वास्‍तुशिल्‍प और केन्द्रीय गुम्बद के कारण पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है. इस मंदिर को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है. यह मंदिर अपनी विशिष्ट वास्तुकला के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है. इसके निर्माण में 1,30,000 टन ग्रेनाइट पत्थरों का प्रयोग हुआ है. जबकि मंदिर के आसपास कहीं भी ग्रेनाइट पत्थर नहीं पाये जाते हैं. मंदिर के शिखर पर स्वर्णकलश स्थित है, जिस पत्थर पर यह कलश स्थित है. उसका भार लगभग 80 टन है और यह एक ही पत्थर से बना है. मंदिर में स्थापित विशाल, भव्य शिवलिंग के कारण ही इसे वृहदेश्वर नाम से जाना जाता है. भारतीय रिजर्व बैंक ने 01 अप्रैल 1954 को एक हजार रुपये का नोट जारी किया था, जिस पर बृहदेश्वर मंदिर की भव्य तस्वीर छपी है. भारत सरकार ने साल 2010 में बृहदेश्वर मंदिर के एक हजार साल पूरे होने के सम्मान में एक हजार रुपये का स्‍मारक सिक्का जारी किया. इस सिक्के की एक ओर सिंह स्‍तंभ के चित्र के साथ हिंदी में ‘सत्यमेव जयते’ खुदा हुआ है. वहीं सिक्के की दूसरी ओर राजाराज चोल- I की तस्वीर खुदी हुई है, जिसमें वे हाथ जोड़कर मंदिर में खड़े हुए हैं. सिक्के पर मंदिर की स्‍थापना के 1000 साल हिंदी और अंग्रेज़ी में लिखे हुए हैं.

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