OMG! ये है 'Bhimbetka Rock Shelters' की 15 हजार साल पुरानी पेंटिंग

OMG11:48 AM IST Jul 11, 2017

भारत के दर्शनीय स्थलों की सूची में शामिल भीमबेटका की गुफाएं पर्यटकों के लिए हमेशा से आकर्षण का केंद्र रही हैं. जिसे देखकर आप भी कहेंगे OMG! ये मेरा इंडिया. मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित पुरापाषाणिक भीमबेटका की गुफाएं विंध्य पर्वतमालाओं से घिरी हुई हैं. यह मध्य भारत के पठार के दक्षिणी किनारे पर स्थित विंध्याचल की पहाड़ियों के निचले हिस्से पर स्थित हैं. यहां लगभग 750 गुफाएं हैं, जिनमें 500 गुफाओं में शैल चित्र बने हैं. यहां की सबसे प्राचीन चित्रकारी 15,000 साल पुरानी है. जिन्हें हमारे आदिमानव पूर्वजों के द्वारा बनाई गई हैं. मनुष्यों के चित्रों के अलावा कई गुफाओं में विभिन्न प्राणियों जैसे कि चीता, कुत्ता, छिपकली, हाथी, भैंस के रंगीन चित्र भी देखने को मिलते हैं. चित्रों के अध्ययन से पता चलता है कि ये चित्र काफी लंबी अवधि में बनाए गए हैं. यह समय पेलिओलिथिक युग से मध्यकालीन युग तक का है. साल 1990 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने भीमबेटका को राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित किया था और साल 2003 में ‘यूनेस्को’ ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया. किंवदंतियों के मुताबिक यह स्थल महाभारत के चरित्र भीम से संबंधित है. इसी वजह से इस जगह का नाम भीमबेटका पड़ा. साल 1657 में वी. एस. वाकंकर ने इन पुरापाषाणिक गुफाओं की खोज की.

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भारत के दर्शनीय स्थलों की सूची में शामिल भीमबेटका की गुफाएं पर्यटकों के लिए हमेशा से आकर्षण का केंद्र रही हैं. जिसे देखकर आप भी कहेंगे OMG! ये मेरा इंडिया. मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित पुरापाषाणिक भीमबेटका की गुफाएं विंध्य पर्वतमालाओं से घिरी हुई हैं. यह मध्य भारत के पठार के दक्षिणी किनारे पर स्थित विंध्याचल की पहाड़ियों के निचले हिस्से पर स्थित हैं. यहां लगभग 750 गुफाएं हैं, जिनमें 500 गुफाओं में शैल चित्र बने हैं. यहां की सबसे प्राचीन चित्रकारी 15,000 साल पुरानी है. जिन्हें हमारे आदिमानव पूर्वजों के द्वारा बनाई गई हैं. मनुष्यों के चित्रों के अलावा कई गुफाओं में विभिन्न प्राणियों जैसे कि चीता, कुत्ता, छिपकली, हाथी, भैंस के रंगीन चित्र भी देखने को मिलते हैं. चित्रों के अध्ययन से पता चलता है कि ये चित्र काफी लंबी अवधि में बनाए गए हैं. यह समय पेलिओलिथिक युग से मध्यकालीन युग तक का है. साल 1990 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने भीमबेटका को राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित किया था और साल 2003 में ‘यूनेस्को’ ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया. किंवदंतियों के मुताबिक यह स्थल महाभारत के चरित्र भीम से संबंधित है. इसी वजह से इस जगह का नाम भीमबेटका पड़ा. साल 1657 में वी. एस. वाकंकर ने इन पुरापाषाणिक गुफाओं की खोज की.

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