VIDEO: चट्टानों और पेड़ो की जड़ो से रिसने वाला पानी पीने को मजबूर है यह गांव

छतरपुर09:07 PM IST Apr 29, 2017

आजादी के 69 साल बीत जाने के बाद भी बुंदेलखंड में आज भी कई गांव ऐसे है जो पीढ़ियों से पानी की विकराल समस्या से जूझ रहे है,शासन की तमाम योजनाओं के बाद भी छतरपुर जिले का एक आदिवासी गांव आज भी पहाड़ो की चट्टानों और पेड़ो की जड़ो से आने वाले एक एक बूंद पानी भरने को मजबूर हैं और यह पानी यहां के लोगो के लिए मौत मुंह का पानी बन गया है. हम बाकत कर रहे हैं जिला मुख्यालय से लगभग 100 कि मी दूर स्थित ग्राम पाठापुर गांव की. यहां हालात ये हैं कि ग्रामीण अपनी जान हथेली पर लेकर जोखिम भरी सैकड़ो फिट गहरी खाई में जाकर पहाड़ में बने झरने से बूंद -बूंद पानी इकट्ठा कर लाते है जहां एक बर्तन में बूंद -बूंद पानी भरने के करीब दो से तीन घंटे लग जाते हैं. इनकी यह समस्या आज की नहीं बल्कि करीब 100 साल से है ,कई सरकार आईं और गईं लेकिन यहां के हालात जस के तस बने हुए हैं इन ग्रामीणों की कोई मदद नहीं कर रहा चाहे वह किसी भी पार्टी की सरकार रही हो.

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आजादी के 69 साल बीत जाने के बाद भी बुंदेलखंड में आज भी कई गांव ऐसे है जो पीढ़ियों से पानी की विकराल समस्या से जूझ रहे है,शासन की तमाम योजनाओं के बाद भी छतरपुर जिले का एक आदिवासी गांव आज भी पहाड़ो की चट्टानों और पेड़ो की जड़ो से आने वाले एक एक बूंद पानी भरने को मजबूर हैं और यह पानी यहां के लोगो के लिए मौत मुंह का पानी बन गया है. हम बाकत कर रहे हैं जिला मुख्यालय से लगभग 100 कि मी दूर स्थित ग्राम पाठापुर गांव की. यहां हालात ये हैं कि ग्रामीण अपनी जान हथेली पर लेकर जोखिम भरी सैकड़ो फिट गहरी खाई में जाकर पहाड़ में बने झरने से बूंद -बूंद पानी इकट्ठा कर लाते है जहां एक बर्तन में बूंद -बूंद पानी भरने के करीब दो से तीन घंटे लग जाते हैं. इनकी यह समस्या आज की नहीं बल्कि करीब 100 साल से है ,कई सरकार आईं और गईं लेकिन यहां के हालात जस के तस बने हुए हैं इन ग्रामीणों की कोई मदद नहीं कर रहा चाहे वह किसी भी पार्टी की सरकार रही हो.

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