VIDEO : बुवाई कैसे करें खेत में तो आ धमकते हैं मगर

कोटा07:00 PM IST Jul 26, 2017

कोटा में चंद्रलोई नदी के किनारे बसे एक दर्जन से ज्यादा गांव में बारिश में मगरमच्छ आ धमकते हैं.नदी का जलस्तर बढ़ते ही ये मगरमच्छ पानी के साथ खेत-खलिहान और बस्ती में पहुंचने लगते हैं. सबसे ज़्यादा ख़तरा किसानों को रहता है. बुवाई का वक्त होने के कारण किसान खेतों में काम पर जाते हैं,लेकिन कब मगर उन पर हमला कर दे, कहा नहीं जा सकता.उम्मेदगंज,धाकड़खेड़ी,खेडारसूलपुर,राजनगर,चडिंदा,बोरखंडी,अर्जुनपुरा सहित एक दर्जन गांवों में ये समस्या विकट हो चुकी है. चंद्रलोई नदी में कुछ साल पहले तक यह मगरमच्छ नहीं थे. चंबल घड़ियाल अभयारण्य बनते ही मगर यहां तक आ पहुंचे. 16 किलोमीटर लंबे तक फैली इस नदी में 2000 से ज़्यादा मगरमच्छ हैं. 10 साल में ये सौ गुना बढ़ चुके हैं. इस नदी में साल भर पानी रहता है,लेकिन मगर के डर से लोग इसका उपयोग ही नहीं कर पाते.

sachin ojha

कोटा में चंद्रलोई नदी के किनारे बसे एक दर्जन से ज्यादा गांव में बारिश में मगरमच्छ आ धमकते हैं.नदी का जलस्तर बढ़ते ही ये मगरमच्छ पानी के साथ खेत-खलिहान और बस्ती में पहुंचने लगते हैं. सबसे ज़्यादा ख़तरा किसानों को रहता है. बुवाई का वक्त होने के कारण किसान खेतों में काम पर जाते हैं,लेकिन कब मगर उन पर हमला कर दे, कहा नहीं जा सकता.उम्मेदगंज,धाकड़खेड़ी,खेडारसूलपुर,राजनगर,चडिंदा,बोरखंडी,अर्जुनपुरा सहित एक दर्जन गांवों में ये समस्या विकट हो चुकी है. चंद्रलोई नदी में कुछ साल पहले तक यह मगरमच्छ नहीं थे. चंबल घड़ियाल अभयारण्य बनते ही मगर यहां तक आ पहुंचे. 16 किलोमीटर लंबे तक फैली इस नदी में 2000 से ज़्यादा मगरमच्छ हैं. 10 साल में ये सौ गुना बढ़ चुके हैं. इस नदी में साल भर पानी रहता है,लेकिन मगर के डर से लोग इसका उपयोग ही नहीं कर पाते.

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