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गया के इस पहाड़ पर पितरों को पिंडदान करने से मिलती है मुक्ति! पढ़ें- इस रहस्य से जुड़ी कहानी

गया के इस पहाड़ पर पितरों को पिंडदान करने से मिलती है मुक्ति! पढ़ें- इस रहस्य से जुड़ी कहानी

मोक्ष की धरती के नाम से बिहार के गयाधाम की अपनी एक अलग विशेषता है. ‘प्रेतशिला’ नाम का एक रहस्यमयी पहाड़ एक अलग पहचान को परिभाषित करता है. माना जाता है कि इस पहाड़ पर बड़ी संख्या में लोग हर वर्ष पिंडदान करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से प्रेत आत्माओं को मुक्ति मिल जाती है.

गया के इस पहाड़ से जुड़ी रहस्यमयी बातें प्रचलित हैं.

गया के इस पहाड़ से जुड़ी रहस्यमयी बातें प्रचलित हैं.

कुंदन कुमार/गया. आत्मा और प्रेतआत्माओं से जुड़े किस्से और कहानियां तो आपने अपने घर के बड़े बजुर्गों से काफी सुनी व पढ़ी भी होगी. इस सच्चाई को कहीं न कहीं विज्ञान भी स्वीकार करता है कि हमारे आस-पास नाकारात्मक चीजें होती है. कहते हैं कि जब इंसान अपने शरीर को त्यागता है तो सीधे मृत्युलोक की योनि में अपने पापों को धोने के लिये पहुंच जाता है. उन्हें तृप्त करने के लिए धरती पर लोग श्राद्ध कर्म करते है, ताकि मृत आत्मा को शांति मिल सके. इसी शांति की तलाश में वो खुद भी धरती पर आते है और अपने परिवार के लोगों को किसी न किसी माध्यम से अपनी मौजूदगी का एहसास कराते है. ऐसा ही इस धरती पर रहस्य से भरी एक जगह है जहां आज भी आत्मा भटकती है. उस जगह का नाम गया है. ऐसा माना जाता है कि श्राद्ध कर्म के दौरान यहां पितरों का आगमन होता है और पिंड ग्रहण करके वे परलोक वापस चले जाते हैं.

रहस्यमयी पहाड़ है प्रेतशिलामोक्ष की धरती के नाम से बिहार के गयाधाम में ‘प्रेतशिला’ नाम का एक रहस्यमयी पहाड़ है, जिसपर पिंडदान किया जाता है. ऐसा करने से प्रेत आत्माओं को मुक्ति मिल जाती है. गयाधाम में प्रेतशिला पहाड़ के ऊपर दिखने वाली बड़ी चट्टान का संबंध सीधे परलोक से माना जाता है. गरुड़ पुराण के अनुसार इस शिला की दरारों से ही पितरों का आगमन होता है और वे पिंड ग्रहण कर अपने लोक वापस लौट जाते हैं.

भगवान विष्णु के भक्त गयासुर के शरीर पर बसा है गयापौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के भक्त गयासुर के शरीर पर बसा है गया नगरी. गयासुर ने भगवान से ही यह वरदान मांगा था कि जो भी इंसान मृत्युलोक को प्राप्त करता है और यहां उसका पिंडदान किया जाता है तो आने वाले उन जीवों को नरक नहीं जाना पड़ेगा. गयासुर के इस वरदान के प्राप्त होने के कारण से ही यहां श्राद्ध और पिंडदान करने से आत्मा को तुंरत ही मुक्ति मिल जाती है.

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प्रेतशिला पहाड़ पर आज भी भूत व प्रेत का वास हैप्रेतशिला पहाड़ पर जाने के लिए 676 सीढ़ियां बनी हुई हैं. इस पर्वत के शिखर पर प्रेतशिला वेदी है. कहा जाता है कि अकाल मृत्यु से मरने वाले पूर्वजों का प्रेतशिला वेदी पर श्राद्ध व पिंडदान करने का विशेष महत्व है. इस पर्वत पर पिंडदान करने से पूर्वज सीधे पिंड ग्रहण करते हैं. इससे पितरों को कष्टदायी योनियों से मुक्ति मिल जाती है. मान्यता है कि जिनकी अकाल मृत्यु होती है उनके यहां सूतक लगा रहता है. सूतक काल में सत्तू का सेवन वर्जित माना गया है. उसका सेवन पिंडदान करने के बाद ही किया जाता है. इसलिए लोग प्रेतशिला वेदी पर आकर सत्तू उड़ाते व प्रेत आत्माओं से आशीर्वाद व मंगलकामनाएं मांगते हैं.

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FIRST PUBLISHED : September 25, 2022, 16:35 IST
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