Home / News / bihar /

ramanuj of paliganj also martyred in ladakh accident villagers are waiting for the body nodaa

Ladakh Accident: पालीगंज के रामानुज भी शहीद, गांव-घर में पसरा मातमी माहौल

लद्दाख बस दुर्घटना में पालीगंज के शहीद जवान रामानुज कुमार की फाइल फोटो.

लद्दाख बस दुर्घटना में पालीगंज के शहीद जवान रामानुज कुमार की फाइल फोटो.

Army Bus Fell into River: तुरतुक सेक्टर में हुए इस हादसे में पालीगंज के रामानुज की भी जान चली गई. रामानुज के बारे में जब यह खबर पालीगंज के परियों गांव में पहुंची तो पूरे गांव में मातम छा गया. वे यहां रहनेवाले लल्लन यादव के बेटे थे. रामानुज की शहादत की जानकारी जब गांववालों को मिली तो हर किसी के जुबां पर यही था कि देश की खातिर सीमा पर तैनात बेटा आज शाहिद हो गया.

पटना. सीमा पर तैनात 26 जवानों से भरी जो बस लद्दाख की खाई में गिरी, उसने पटना के पालीगंज के लाल रामानुज कुमार को भी लील लिया. कुछ दिन पहले ही रामानुज अपनी बहन की शादी में शामिल होकर लौटे थे.

बता दें कि लद्दाख के तुरतुक सेक्टर में हुई इस दुर्घटना में अब तक भारतीय सेना के 7 जवानों की जान चली गई है, जबकि अन्य गंभीर रूप से घायल हैं. सेना के प्रवक्ता के मुताबिक, ’26 सैनिकों का एक दल परतापुर में ट्रांजिट कैंप से हनीफ सब-सेक्टर में एक अग्रिम स्थान की ओर बढ़ रहा था. सुबह लगभग 9 बजे, थोइस से लगभग 25 किमी दूर वाहन सड़क से फिसलकर लगभग 50-60 फीट नीचे श्योक नदी में जाकर गिरा. इस हादसे में 7 जवानों को अब तक मृत घोषित किया जा चुका है.’

तुरतुक सेक्टर में हुए इस हादसे में पालीगंज के रामानुज की भी जान चली गई. रामानुज के बारे में जब यह खबर पालीगंज के परियों गांव में पहुंची तो पूरे गांव में मातम छा गया. वे यहां रहनेवाले लल्लन यादव के बेटे थे. रामानुज की शहादत की जानकारी जब गांववालों को मिली तो हर किसी के जुबां पर यही था कि देश की खातिर सीमा पर तैनात बेटा आज शाहिद हो गया. गांव-घर में मातमी माहौल बना हुआ है. घर की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है. अब गांव के लोग शाहिद बेटे के पार्थिव शरीर के इंतजार में हैं.


आपके शहर से (पटना)

पटना: प्यार में नहीं तोड़ सकी मजहब की दीवार तो की खुदकुशी, छोड़ गई इमोशनल सुसाइड नोट

मुस्लिम परिवार ने किया हिंदू दोस्त का अंतिम संस्कार, अर्थी निकाली, राम नाम सत्य है के नारे लगाये

चढ़ावे के पैसे के लिए मंदिर परिसर बना अखाड़ा, आपस में भिड़े पुजारियों में जमकर चलीं लाठियां

उपेन्द्र कुशवाहा को RCP सिंह की बुद्धि पर भरोसा, कहा- 7 जुलाई से पहले दे देंगे इस्तीफ़ा

स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ 10 करोड़ रुपए का घोटाला, ऐसे सामने आया फर्जीवाड़ा

OMG: सड़क निर्माण में बिहार ने बनाया रिकॉर्ड, महज 98 घंटे में बन गई 38 Km रोड

बिहार से बाहर झारखंड में VIP के विस्तार की तैयारी, मुकेश सहनी का यह है प्लान...

रणक्षेत्र बना पटना का राजीव नगर, अतिक्रमणकारियों के पथराव में सिटी SP सहित कई पुलिसवाले चोटिल

चिराग पासवान ने भी माना बिहार में NDA मतलब नीतीश कुमार, कहा- CM जल्दी गठबंधन में करेंगे बदलाव

धान की रोपनी कर रहे लोगों पर मौत बनकर गिरी आकाशीय बिजली, एक की गई जान, कई गंभीर

रात के अंधेरे में चोरों ने काटा ATM, सायरन बजा तो कैश छोड़ भागे उल्टे पांव


ग्रामीणों का कहना है कि 1 महीने पहले ही रामानुज अपनी बहन की शादी में छुट्टी पर घर आया था और 26 अप्रैल को वह अपनी ड्यूटी पर लौट गया था. महाराष्ट्र के मराठा रेजिमेंट से 2016 में रिक्रूट हुआ नायक क्लर्क रामानुज देश की सुरक्षा की खातिर लद्दाख में अपनी ड्यूटी देने गया था. लेकिन किसी को क्या मालूम था कि लद्दाख की घाटियों में वह शहादत हो जाएगा.

तीन भाइयों में सबसे छोटा रामानुज 2016 से देश की सुरक्षा में लगा हुआ था. इस शहादत के बाद गांव का हर शख्स कह रहा है कि रामानुज अपने सभी भाइयों में काफी तेज-तर्रार थे. वह जो ठान लेते थे, उसे पूरा करके ही दम लेते थे. उनमें देश सेवा की ललक बचपन से ही थी. शहीद रामानुज का पार्थिव शरीर अभी गांव नहीं पहुंचा है. उम्मीद की जा रही है कि उनका पार्थिव शरीर आज शाम तक पालीगंज आ जाएगा.

Tags:Bihar News, Indian army, Ladakh Border