गिरते रुपये को थामने में जुटी केंद्र सरकार, PM मोदी ने बुलाई अधिकारियों की मीटिंग

ये रिव्यू मीटिंग शनिवार को हो सकती है. पीएम के साथ मीटिंग में यह तय हो सकता है कि रुपये को किस तरह से मजबूत बनाया जाए और पेट्रोल-डीजल के दाम को कैसे नीचे लाया जाए.

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देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. लोग सरकार से किसी राहत की उम्मीद कर रहे हैं. ऐसे में पेट्रोल-डीजल के बढ़े दाम और डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये को संभालने को लेकर सरकार हरकत में आ गई है. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हफ्ते के आखिर में सीनियर अधिकारियों की मीटिंग बुलाई है. इस रिव्यू मीटिंग अर्थव्यवस्था पर चर्चा होगी.रघुराम राजन बोले- PMO में दी थी हाई-प्रोफाइल धोखेबाजों की लिस्ट, आगे क्या हुआ नहीं पताप्राप्त जानकारी के मुताबिक, ये मीटिंग शनिवार को हो सकती है. इसमें वित्त मंत्री अरुण जेटली भी शामिल होंगे. इसके अलावा कुछ और कैबिनेट मंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है. इस बीच वित्त मंत्रालय ने कहा है कि 'रुपये में निराधार गिरावट नहीं आए' इसके लिए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक हर संभव कोशिश करेंगे.

एक अधिकारी ने अपना नाम न बताने के शर्त पर कहा कि रुपये में पिछले तीन महीनों ने ऐसी गिरावट देखने को नहीं मिली थी. पीएम के साथ मीटिंग में यह तय हो सकता है कि रुपये को किस तरह से मजबूत बनाया जाए और पेट्रोल-डीजल के दाम को कैसे नीचे लाया जाए.केंद्र को रघुराम राजन की चेतावनी, कहा-अर्थव्यवस्था को लेकर सतर्क रहना होगाआर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने ट्वीट में कहा, 'रुपया ज्यादा नीचे नहीं जाए यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार और आरबीआई हर संभव कदम उठायेंगे. रुपये में आज हुआ सुधार इसे दर्शाता है.'लगातार गिर रहा है रुपया
बता दें कि पिछले कुछ दिनों से रुपये में गिरावट और पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार विपक्षी पार्टियों के निशाने पर है. रुपये में गिरावट लगातार जारी है. मंगलवार को भी 24 पैसे गिरकर 72.69 पर बंद हुआ था, जबकि बुधवार को यह 22 पैसे कमजोर होकर 72.91 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. हालांकि, बाद में रुपये को थोड़ी मबजूती मिली और 24 पैसे गिरकर 72.69 पर बंद हुआ था.ये होगा असर
रुपये में गिरावट के बाद देश में महंगाई तो बढ़ाएगी ही, साथ में पेट्रोल-डीजल के रेट भी बढ़ेंगे. इसके साथ-साथ विदेश कर्ज चुकाने के लिए भारत को ज्यादा रकम देने होंगे. इसके साथ-साथ विदेशों में पढ़ाई करने के साथ घूमने में ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे.

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