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Gobardhan: गोबर से जुड़ा काम कर गांव की महिलाओं ने कमाए 29 करोड़, जानें- कैसे हुई इतनी इनकम?

Gobardhan: गोबर से जुड़ा काम कर गांव की महिलाओं ने कमाए 29 करोड़, जानें- कैसे हुई इतनी इनकम?

छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि गोबर से जुड़ा काम कर राज्य की महिला समूहों ने करोड़ों रुपये की आय की है.

छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि गोबर से जुड़ा काम कर राज्य की महिला समूहों ने करोड़ों रुपये की आय की है.

Success Story of Women of Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने दावा किया है कि गौठान से जुड़ी महिलाओं को अलग-अलग समूहों के माध्यम से करीब 51 करोड़ रुपये की आय हुई है. इसमें से साढ़े 29 करोड़ रुपये सीधे तौर पर गोबर से जुड़े काम करने से उन्हें मिले हैं. सरकार की गोठान विकास और गोधन न्याय योजना के तहत महिलाओं समूहों को आय का दावा राज्य सरकार ने किया है. योजना के तहत मछली पालन, दलहन उत्पादन समेत अन्य कार्य किए जा रहे हैं.

रायपुर. छत्तीसगढ़ में गोबर से जुड़ा काम कर गांव की महिलाओं ने करीब 51 करोड़ रुपयों की कमाई की है. छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल सुराजी गांव योजना के तहत गांव में स्थापित गौठानों को आय उपार्जन की गतिविधियों के केन्द्र के रूप विकसित करने में सफलता मिली है. गौठान अब आजीविका के केन्द्र का स्वरूप लेने लगे हैं. इससे ग्रामीणों को सहजता से रोजगार मिलने के साथ ही उनकी आय में वृद्धि हुई है. सरकार का दावा है कि गौठान से जुड़ी 11 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों ने गौठानों में विभिन्न प्रकार की रोजगार मूलक गतिविधियों को संचालित कर अब तक 50 करोड़ 57 लाख रुपए से अधिक की आय अर्जित की है. यानी कि करीब 51 करोड़ रुपये की इनकम महिलाओं को हुई है.

छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजना और गोधन न्याय योजना ग्रामीण जनजीवन बदलाव लाने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था गतिशील बनाने में काफी मददगार साबित हो रही है. गौठान और गोधन न्याय योजना को पूरे देश में एक आदर्श योजना के रूप में देखा और सराहा जा रहा है. गौठानों में गोधन न्याय योजना के तहत 2 रुपए किलो में गोबर की खरीदी कर उससे वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट प्लस के निर्माण के साथ-साथ अन्य उत्पादों का निर्माण महिला समूहों द्वारा किया जा रहा है. वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट के उत्पादन से महिला समूहों को अब तक 29 करोड़ 46 लाख रुपए की राशि लाभांश के रूप में महिला समूहों को दिए जाने का दावा सरकार ने किया है.


इन कार्यों से हुई इनकम
सरकार का दावा है कि महिला समूहों द्वारा गौठानों में सामुदायिक बाड़ी के माध्यम से सब्जी उत्पादन कर 5 करोड़ 43 लाख रुपए, मछलीपालन से 2 करोड़ 31 लाख, बकरी पालन से एक करोड़ 14 लाख, मुर्गी पालन से एक करोड़ 9 लाख, पशुपालन से 70 लाख, गोबर से दीया, अगरबत्ती, गमला, मूर्तियां एवं अन्य सामग्री के निर्माण से 74 लाख रुपए तथा अन्य आय मूलक गतिविधियों से 9 करोड़ 70 लाख रूपए की आय अर्जित की जा चुकी है. राज्य में गौठानों से 11 हजार 463 महिला स्व-सहायता समूह जुड़े हुए हैं, जिनकी सदस्य संख्या 77 हजार से अधिक है. राज्य में स्वीकृत 10 हजार 591 गौठानों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में एक लाख एकड़ से अधिक शासकीय भूमि सुरक्षित एवं उपयोगी हो गई है.

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सरकार के मुताबिक गौठानों को और अधिक लाभकारी बनाने के लिए इन्हें रूरल इंड्रस्ट्रियल पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है. गोबर से गौठानों में विद्युत उत्पादन की शुरुआत की जा चुकी है. गोबर से प्राकृतिक पेंट के निर्माण की यूनिटें लगाए जाने की प्रक्रिया जारी है. इसके लिए गौ सेवा आयोग और करियप्पा नेशनल पेपर इंस्टीट्यूट जयपुर के मध्य एमओयू हो चुका है. किसानों द्वारा उत्पादित दलहन, तिलहन की प्रोसेसिंग के लिए अब गांव के गौठानों में दाल मिल एवं तेल मिल की स्थापना की जा रही है. प्रथम चरण में राज्य के 148 गौठानों में तेल मिल तथा 188 में दाल मिल लगाए जाने की कार्ययोजना बनाई गई है. इससे उत्पादक कृषकों के साथ-साथ गौठानों से जुड़ी महिला स्व सहायता समूहों की आय बढ़ेगी. उक्त सभी कार्य किसी न किसी रूप में सरकार की गोधन न्याय योजना से जुड़े हैं.

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