हिमाचल में बढ़ेगा बस किराया, ये होंगी नईं दरें

हिमाचव प्रदेश में निजी बस ऑपरेटरों की ओर से दो दिन की हड़ताल की गई. यूनियन ने इसे 25 सितंबर तक स्थगित कर दिया गया है.

Nitesh Saini , News18 Himachal Pradesh
हिमाचल प्रदेश में निजी बस ऑपरेटर्स यूनियन के दबाव के चलते जयराम सरकार बस किराये में बढ़ौतरी करेगी. बुधवार को वन एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर और निजी बस ऑपरेटर्स यूनियन में मीटिंग हुई. हालांकि, बढ़ाए गए किराये को लेकर अंतिम मोहर 25 सितंबर को कैबिनेट बैठक में लगेगी.ये होंगी नई दरें
परिवहन मंत्री के आश्वासन के अनुसार, मैदानी क्षेत्र में बस किराया मौजूदा समय में 93 पैसे प्रति किलोमीटर है, इस अब बढ़ाकर 1 रुपये 12 पैसे किया जाएगा. वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों में वर्तमान में 1.45 रुपये से बढ़ाकर 1.75 रुपये कर दिया जाएगा. वहीं, न्यूनतम किराया बढ़ाए जाने को लेकर मंत्री ने ऑपरेटर यूनियन को आश्वस्त किया है. इसको लेकर कैबिनेट की बैठक में ही निर्णय की बात मंत्री ने यूनियन नेताओं से कही है.25 सितंबर तक स्थगित की हड़ताल
प्रदेश में निजी बस ऑपरेटरों की ओर से दो दिन की हड़ताल की गई. यूनियन की ओर से इसे अब 25 सितंबर तक स्थगित कर दिया गया है. मगलवार शाम निजी बस ऑपरेटरों की बैठक मंडी में सीएम के साथ हुई थी. बैठक में मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद निजी बस ऑपरेटर्स ने अपनी हड़ताल को स्थगित कर दिया था. मुख्यमंत्री ने परिवहन एवं वनमंत्री को ऑपरेटर्स के साथ बैठककर समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए थे. इसी कड़ी में बुधवार को परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने ऑपरेटर्स से बैठक की.यूनियन की मांगें
बैठक में परिवहन मंत्री के समक्ष प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए यूनियन नेताओं ने अपनी मांगें रखीं. प्रदेशाध्यक्ष राजेश पराशर ने कहा कि डीजल के दाम में लगातार बढ़ोतरी के चलते वह बसें खड़ी करने को मजबूर हैं. ऑपरेटरों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. हर चीज के दाम में बढ़ोतरी हो चुकी है, लेकिन बस किराया पिछले पांच साल से वही है. इस कारण उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ रहा है. उन्होंने परिवहन मंत्री के समक्ष न्यूनतम किराया 12 रुपए करने की मांग उठाई.मिनी बसों में दस रुपये किराया
अध्यक्ष ने कहा कि सरकार की ओर से बिना नोटिफिकेशन के चलाई जा रही मिनी बस में भी दस रुपये किराया वसूला जा रहा है. उन्होंने कहा कि निजी बस ऑपरेटर्स सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलकर काम करने को तैयार हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगें माने. सैस और ग्रीन टैक्स का निर्णय भी वापस लिया जाए.साथ ही सात साल के बाद बस बदलने के निर्णय को बढाक़र 12 साल किया जाए. क्योंकि 7 साल तो लोन चुकता करने में ही लग जाते हैं. इसके अलावा निजी ऑपरेटर्स की छुट्टियों में बढ़ोतरी की मांग भी यूनियन की ओर से बैठक में उठाई गई है.

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