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रामपाल कहता था कि नास्त्रेदमस ने की थी उसके अवतार लेने की भविष्यवाणी

रामपाल कहता था कि नास्त्रेदमस ने की थी उसके अवतार लेने की भविष्यवाणी

सतलोक आश्रम का प्रमुख रामपाल (फाइल फोटो)

सतलोक आश्रम का प्रमुख रामपाल (फाइल फोटो)

वेबसाइट में नास्त्रेदमस के जरिए रामपाल का खासा महिमामंडन किया गया है, ये दावा है कि उसकी फिर वापसी होगी

अदालत से हत्या के दो मामलों में अाजीवन कैद की सजा पा चुका रामपाल अपने भक्तों से लगातार ये कहता था कि वह कबीर का अवतार है. उसके अवतार लेने की भविष्यवाणी 450 साल पहले ही प्रसिद्ध फ्रेंच भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ने कर दी थी.

उसने अपनी वेबसाइट जगतगुरुरामपालजी डॉट ऑर्ग (www.jagatgururampalji.org) में भी ये बात कही है. रामपाल की ये वेबसाइट अंग्रेजी और  हिंदी में है. इसमें उसने विस्तार से अपने बारे में लिखा है.

वेबसाइट में उसके परिचय में कहा गया है, "संत रामपाल जी को नाम दीक्षा 17 फरवरी 1988 को फाल्गुन महीने की अमावस्या को रात में मिली थी. उस समय संत रामपाल महाराज की आयु  37 वर्ष थी. उपदेश दिवस (दीक्षा दिवस) को संतमत में उपदेशी भक्त का आध्यात्मिक जन्मदिन माना जाता है."

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इसी आधार पर वेबसाइट आगे कहती है, " ऊपर जो भी जानकारी है, वो नास्त्रेदमस की उस भविष्यवाणी से पूरी तरह मेल खाती है, जो उन्होंने पृष्ठ संख्या 44-45 पर लिखी है.जिस समय उस तत्वदृष्टा संत का आध्यात्मिक जन्म होगा उस दिन अंधेरी अमावस्या होगी. उस समय उस विश्व नेता की आयु 16, 20, 25 वर्ष नहीं होगी, वह तरुण नहीं होगा, बल्कि वह प्रौढ़ होगा. वह 50 और 60 वर्ष के बीच की उम्र में संसार में प्रसिद्ध होगा. वर्ष 2006 से उसकी प्रसिद्धी शुरू हो जाएगी."

बाबा रामपाल की आधिकारिक वेबसाइट

दावा कि स्थितियां बदलेंगी

इसी परिचय में फिर आगे लिखा है, "भले ही अंजानों ने झूठे आरोप लगाकर संत को बदनाम करने की कोशिश की हो लेकिन संत निर्दोष है. नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी को पढ़कर सोचा जा सकता है कि संत रामपाल अगर इतना बदनाम कर दिया गया है तो वो दुनिया को ज्ञान कैसे देंगे. लेकिन ये मत भूलिए कि पल में परिस्थितियां बदल सकती हैं. तब पूरा संसार संत रामपाल के ज्ञान का लोहा मानेगा." इस बात में दम देने के लिए कबीर की एक चौपाई का भी सहारा लिया गया है-

कबीर, साहेब से सब होत है, बंदे से कछु नांहि।

राई से पर्वत करे, पर्वत से फिर राई।।

रामपाल खुद को कबीर का अवतार मानता था. वो अपने भक्तों से खुद को भगवान बताता था. वो  कबीरपंथ के तौर पर एक अलग धर्म भी बनाना चाहता था. इसका प्रस्ताव भी उसने सरकार को भेजा लेकिन इसे खारिज कर दिया गया.

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"जो विरोध करेंगे वो पश्चाताप करेंगे"

आगे कहा गया है कि नास्त्रेदमस ने कहा है, " विश्व धार्मिक हिंदू संत पचास वर्ष की आयु में अर्थात् 2001 में ज्ञाता होकर प्रचार करेगा. वो विश्व धार्मिक नेता संत रामपाल जी महाराज ही हैं जिनकी अध्यक्षता में भारतवर्ष पूरे विश्व पर राज्य करेगा. पूरे विश्व में एक ही ज्ञान (भक्ति मार्ग) चलेगा. एक ही कानून होगा, कोई दुःखी नहीं रहेगा, विश्व में पूर्ण शांति होगी. जो विरोध करेंगे अंत में वे भी पश्चाताप करेंगे तथा तत्वज्ञान को स्वीकार करने पर विवश होंगे."

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नास्त्रेदमस के जरिए ये दावा भी 

वेबसाइट में ये दावा भी किया गया कि "नास्त्रेदमस कहा है कि उस विश्व विजेता संत के ज्ञान के सामने सभी फीके पड़ जाएंगे. सबको उनके आगे झुकना होगा. " ये भी कहा गया कि नास्त्रेदमस ने ये भी लिखा है, मुझे दुःख इस बात का है कि मेरा संत उपेक्षा का पात्र बना है. हे बुद्धिमान मानव ! उसकी उपेक्षा ना करो. वो इष्टदेव माने जाने के योग्य है.

रामपाल की ये वेबसाइट बार बार ये कहती है कि वो फिर लौटेंगे. इस पूरे परिचय में इतनी बार नास्त्रेदमस का नाम लेकर रामपाल का महिमा मंडन किया गया है कि कोई आश्चर्य में पड़ जाएगा. साइट ये भी दावा करती है कि रामपाल को परमेश्वर ने ही पृथ्वी पर भेजा है.

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