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स्वाद का सफ़रनामा: पहाड़ी फलों का राजा माना जाता है माल्टा, बेहद गुणकारी है यह फ्रूट, इतिहास भी है रोचक

स्वाद का सफ़रनामा: पहाड़ी फलों का राजा माना जाता है माल्टा, बेहद गुणकारी है यह फ्रूट, इतिहास भी है रोचक

Swad Ka Safarnama: नींबू परिवार के अंतर्गत आने वाला माल्टा फल सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है. विटामिन सी से भरपूर माल्टा इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ दांत, मसूड़ों के लिए बेहद लाभदायक होता है. आइए जानते हैं इसका रोचक इतिहास

स्वाद का सफ़रनामा (Swad Ka Safarnama).

स्वाद का सफ़रनामा (Swad Ka Safarnama).

हाइलाइट्स

माल्टा का नियमित सेवन पेट के अल्सर और कब्ज से भी बचाता है.
भूख बढ़ाने की दवा के लिए किया जा रहा है माल्टा का इस्तेमाल.
नींबू परिवार का सदस्य है विटामिन सी से भरपूर माल्टा.

Swad Ka Safarnama: नींबू परिवार के फलों में माल्टा भी शामिल है. लेकिन इसकी कुछ अलग विशेषताएं हैं, जिस कारण इसकी पहचान भी अलग बनी हुई है. विटामिन सी से भरपूर माल्टा शरीर के लिए बेहद गुणकारी है. इसका रस शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. दांतों और मसूढ़ों के लिए भी इसके बेहद लाभकारी माना जाता है. माल्टा हिमालय क्षेत्र में पैदा हुआ और नाम कमाया. इसे पहाड़ी फलों का राजा माना जाता है.

नींबू परिवार का ही एक सदस्य है माल्टा

कुछ फूड एक्सपर्ट का यह भी मानना है कि माल्टा दुनिया का सबसे सेहतमंद फल है. अगर रोज एक गिलास जूस माल्टा का पी लिया जाए तो शरीर को काफी हद तक तंदरुस्त रखा जा सकता है. यह नींबू परिवार का फल है. नींबू पूरी तरह से खट्टा स्वाद लिए होता है, परिवार के बाकी फल या तो खट्टे-मीठे हैं या पूरे मीठा स्वाद छोड़ते हैं. यह सभी फल लगभग एक जैसे नजर आते हैं, लेकिन इनके छिलके और इनके उत्पादन क्षेत्र के आधार पर इनकी पहचान कर ली जाती है. इनमें संतरा सबसे अलग है. छोटे और बड़े साइज में मिलने वाले संतरे का छिलका ओरेंज कलर का होता है. छिलका बेहद चिकना नहीं होता, इसके आसानी से छिला जा सकता है और स्वाद में अधिकतर यह मीठा ही निकलता है.

दांतों और मसूढ़ों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है माल्टा. Image-Canva

मौसमी का रंग हरापन लिए हुए होता है इसमें जूस खूब निकलता है, फांके नहीं होती हैं, लेकिन मीठा जूस खट्टापन लिए हुए होता है. इसी परिवार में किन्नू का छिलका मोटा होता है. इसका केसरिया रंग खासा चमकदार होता है और इसकी विशेषता यह है कि मीठे जूस के मामले में यह नंबर वन है और इसकी ज्यादातर पैदावार पंजाब, हरियाणा आदि के अलावा जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में भी होती है.

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पहाड़ी फलों का राजा माना जाता है

माल्टा इन सबसे कुछ भिन्न है. अगर इसकी उत्पत्ति की बात की जाए तो माना जाता है कि यह हिमालय क्षेत्र के चीनी इलाके में सबसे पहले पैदा हुआ. इसे पहाड़ी फल माना जाता है. वहां फलों का राजा माना जाता है. भारत में इसकी सबसे अधिक पैदावार उत्तराखंड में मानी जाती है और वहां बनने वाले विशेष प्रकार की ‘चटनी’में इसका खूब इस्तेमाल किया जाता है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के कृषि विज्ञानी प्रो़ रंजीत सिंह व प्रो़ एसके सक्सेना द्वारा लिखित पुस्तक ‘Fruits’ में जानकारी दी गई है कि विश्व के अलग-अलग क्षेत्रों में नींबू परिवार के फल उगते है, वह सभी भारत के किसी ने किसी क्षेत्र में जरूर उगाए जाते हैं. इनमें माल्टा भी शामिल है.

जब माल्टा पेड़ पर कच्चा होता है तो हरे रंग का होता है, लेकिन पकने के बाद पीले रंग के पक्के संतरे जैसा हो जाता है. माल्टा स्वाद में हल्का खट्टा व हल्का मीठा होता है. लेकिन यह दोनों स्वाद मिलकर अलग स्वाद बनाते हैं इसलिए यह खाने में बेहद स्वादिष्ट लगता है. विशेष बात यह भी है कि माल्टा पूरे वर्ष बाजार में उपलब्ध रहता है.

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प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, कई बीमारियों को दूर रखता है

पोषक तत्वों के मसले में माल्टा भरपूर है. करीब 100 ग्राम के माल्टा के जूस में विटामिन सी. 53.2 मिलीग्राम, कार्बोहाइडेट 11.75 ग्राम, वसा 0.12 ग्राम, कैलोरी 47.05, प्रोटीन 0.94 ग्राम, फाइबर 0.12 ग्राम, आयरन.0.1 मिलीग्राम, फास्फोरस 14 मिलीग्राम, मैग्नीशियम 10 मिलीग्राम, पोटेशियम 181 मिलीग्राम पाए जाते हैं. इसके अलावा इसमें और भी पोषक तत्व होते हैं. फूड एक्सपर्ट व न्यूट्रिशियन कंसलटेंट नीलांजना सिंह के अनुसार माल्टा मानव शरीर में विटामिन सी की दैनिक आवश्यकता का आधा प्रदान कर सकता है. इसका सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. एक अध्ययन में पाया गया कि नियमित रूप से माल्टा खाने वालों से दांतों व मसूढ़ों की बीमारी का प्रकोप कम हो जाता है. यह आंखों की रोशनी को अच्छा रखने में अहम भूमिका निभाता है. इसका नियमित सेवन पेट के अल्सर और कब्ज से भी बचाता है. बचाती हैं. माल्टा संक्रमण को रोकने में मदद करता है.

माल्टा के छिलके का इस्तेमाल भूख बढ़ाने की दवा के लिए किया जाता है. Image-Canva

इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट के गुण भी पाए जाते हैं, जिसके चलते इसका जूस वजन घटाने में मदद करता है. इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व बेड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं. यह ब्लड शुगर स्तर को कंट्रोल करता है. इसलिए जिन लोगों को शुगर की समस्या है, वे इसे निसंकोच खा सकते हैं. माना जाता है कि इसका रस किडनी को स्टोन से दूर रखता है. माल्टा का छिलका भी बहुपयोगी है. इसके छिलके का इस्तेमाल भूख बढ़ाने की दवा के लिए किया जा रहा है. इसके अलावा कफ को कम करने, अपच, खांसी-जुखाम को रोकने के लिए भी छिलका प्रयोग में लाया जा रहा है. सामान्य तौर पर इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं है, लेकिन अधिक मात्रा में इसके जूस का सेवन करने से पेट गड़बड़ा सकता है. एसिड की समस्या भी हो सकती है. यह दांत भी खट्टे कर सकता है.

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Tags: Food, Lifestyle

FIRST PUBLISHED : January 29, 2023, 07:01 IST
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