इंदौर में रोज़ 90 लोगों को काट रहे हैं कुत्ते, परेशान लोग हाईकोर्ट पहुंचे

इंदौर नगर निगम के आंकड़ों की मानें तो शहर में करीब 60 हजार आवारा कुत्ते हैं, जो रोज 90 से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं.

Arun Kumar Trivedi , News18 Madhya Pradesh
इंदौर में कुत्तों के बढ़ते आतंक और नगर निगम की निष्क्रियता को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है. याचिका में कहा गया है कि शहर में रोज 90 से ज्यादा लोगों को आवारा कुत्ते काट रहे हैं. कई इलाकों में बच्चों का घर के बाहर खेलना तक मुश्किल हो गया है. बड़े-बुजुर्ग भी गलियों और कॉलोनियों में निकलने में घबराने लगे हैं. शाम और रात के समय कॉलोनियों के आसपास और सड़कों पर कुत्ते झुंड बनाकर बैठे रहते हैं और पास से निकलने वाले लोगों को अपना शिकार बना लेते हैं. पिछले दो महीने में कुत्तों के काटने की घटनाओं में 30 फीसदी का इजाफा हुआ है.आवारा मवेशियों के खिलाफ तो इंदौर नगर निगम ने मुहिम चलाकर उन्हें शहर से बाहर कर दिया, लेकिन आवारा कुत्तों को लेकर हालत बेहद खराब है. अधिकांश इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक है. रात में सड़कों से गुजरना खतरे से खाली नहीं होता. पांच साल में इंदौर में आवारा कुत्तों की संख्या ढाई गुना बढ़ चुकी है.नगर निगम के आंकड़ों की मानें तो शहर में करीब 60 हजार आवारा कुत्ते हैं, जो रोज 90 से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष फौजिया शेख अलीम का कहना है कि वे मेयर मालिनी गौड़ से आवारा कुत्तों को पकड़ने और उन्हें डॉग हाउस में रखने की तीन-चार सालों से लगातार मांग कर रही हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान ही नहीं दिया जा रहा, इसलिए मजबूर होकर उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी है.

स्मार्ट सिटी में कुत्तों के शिकार लोग
माह                                   पीड़ित
जनवरी 2018                       2495
फरवरी                                 2575
मार्च                                      2653
अप्रैल                                      2562
मई                                         2345
जून                                        2703
जुलाई                                     2847
अगस्त                                       2724


शहर में कुत्तों की बढ़ती तादाद और इनकी संख्या पर नियंत्रण न होना आम लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है. नगर निगम नसबंदी अभियान चला रहा है, इसके बाद भी इनकी संख्या स्थिर होने के बजाय बढ़ती जा रही है. पिछले दो महीनों में कुत्तों के काटने की घटनाएं 30 प्रतिशत तक बढ़ी हैं. वहीं नगर निगम कमिश्नर आशीष सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान और तेज किया जा रहा है और उनकी नसबंदी भी की जा रही है. इसे हाईकोर्ट को भी बताया जाएगा.एक तरफ कुत्तों की काटने की घटनाओं में तेजी से इजाफा हो रहा है, वहीं दूसरी ओर इसका इलाज सिर्फ एक सरकारी अस्पताल में किया जा रहा है. जिला अस्पताल समेत जिले के किसी भी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध ही नहीं हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे जीवनरक्षक दवा होने के कारण हर सरकारी अस्पताल में उपलब्ध रखने का आदेश दिया है. इससे आप समझ सकते हैं कि सरकार इस समस्या को लेकर कितनी गंभीर है.

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