आपराधिक मामलों में केवल 6% सांसद-विधायक ठहराये गए दोषी: सरकारी आंकड़ा

बुधवार को यह आंकड़ा जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने प्रस्तुत किया गया. इसमें आगे खुलासा किया गया है कि ओडिशा से सबसे अधिक सांसद एवं विधायक दोषी पाए गए.

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(उत्कर्ष आनन्द)आपराधिक मामलों में सांसदों और विधायकों के दोषी साबित होने की दर 6 प्रतिशत से कुछ ही अधिक है.सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश में केंद्र सरकार की तरफ से संकलित आंकड़ों के अनुसार, कुल 598 मामलों में से 38 मामलों में सजा सुनाई गई है, जबकि अन्य 560 केस में आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया है. दोषी पाए गए सांसदों-विधायकों की दर मात्र 6.35 प्रतिशत है.बुधवार को यह आंकड़ा जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने प्रस्तुत किया गया. इसमें खुलासा किया गया है कि ओडिशा से सबसे अधिक सांसद एवं विधायक दोषी पाए गए. राज्य में मार्च से लेकर अबतक कुल 10 नेताओं को दोषी करार दिया गया है.इसके बाद केरल का नंबर है जहां 8 जनप्रतिनिधियों को दोषी ठहराया गया, लेकिन यहां कुल 147 को दोषमुक्त कर दिया गया. केरल में  कुल 178 केस विशेष अदालतों में स्थानान्तरित किए गए थे.बिहार जहां कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ सबसे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं वहां एक भी मामले में किसी को सजा नहीं मिली. दूसरी तरफ 48 मामलों में सांसदों और विधायकों को मुक्ति मिल गई है. अन्य राज्य जिनमें बड़ी संख्या में निर्दोष शामिल हैं, उनमें तमिलनाडु (68), गुजरात (42), उत्तर प्रदेश (29) और मध्य प्रदेश (28) हैं.बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय की पीआईएल पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. बेंच ने स्पष्ट किया कि वह सांसदों और विधायकों के खिलाफ ट्रायल की प्रगति की निगरानी करेगा और संबंधित राज्यों और हाईकोर्ट से समय-समय पर रिपोर्ट मांगेगा.केस की लापरवाही से संबंधित आंकड़े, उनकी स्थिति और अन्य विशेष अदालतें खोले जाने से संबंधित आंकड़े रखने के लिए कोर्ट ने डिफॉलटिंग राज्यों के मुख्य सचिव और रजिस्ट्रार जनरल को भी निर्देश दिया है.सुप्रीम कोर्ट 10 अक्टूबर को इस केस की अगली सुनवाई करेगा.ये भी पढ़ें: बिहार, बंगाल और केरल के सांसदों-विधायकों पर सबसे ज्‍यादा आपराधिक मामले

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