SC ने असम सरकार से पूछा- परिवार से अलग कर विदेशियों को हिरासत में क्यों रखा?

विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार करके परिजनों से अलग रखने पर सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार को इसपर तत्काल गंभीरता दिखानी चाहिए ताकि किसी का परिवार ना टूटे.

news18 hindi , भाषा
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार करके असम में उनके परिजनों से अलग रखे जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य सरकार को इस पर तत्काल गंभीरता दिखानी चाहिए ताकि परिवार न टूटें. न्यायाधीश मदन बी लोकूर और दीपक गुप्ता की पीठ ने असम की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसीटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता से कहा, 'आप उन्हें उनके परिजनों से ऐसे अलग नहीं कर सकते.'अभिनेता आदिल हुसैन के परिवार में ‘विदेशी’पीठ ने अधिवक्ता गौरव अग्रवाल द्वारा पेश किए गए तथ्यों पर गौर करते हुए कहा कि नजरबंद किए गए इन लोगों को परिवारों से अलग नहीं किया जा सकता है. एएसजी ने अदालत से कहा कि नजरबंद लोगों के साथ परिजनों को नहीं रखा जा सकता था. हिरासत केंद्र में परिजनों के लिए आवश्यक इंतजाम किए जा सकते हैं, लेकिन वे वहां स्थान की उपलब्धता के अधीन होंगे.'जिन्होंने बनाई सरकार, उनसे छिनेगा वोट का अधिकार'पीठ ने राज्य से हिरासत केंद्र में गैस सिलेंडर समेत अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करने के लिए कहा है. हालांकि केंद्र की ओर से पेश हुए एएसजी एएनएस नादकर्णी ने अदालत को बताया कि पूरे देश में विदेशियों को हिरासत केंद्र में रखने को लेकर वे एक नियमावली को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं.इसपर पीठ ने सरकार से कहा कि वह नियमावली को अतिशीघ्र तैयार करें. एएसजी तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि असम के गोलापाड़ा जिले में हिरासत केंद्र के निर्माण के लिए जमीन आवंटित की गई है. साल भर में काम पूरा होने की उम्मीद है. मामले पर केंद्र ने सरकार को बताया कि असम में हिरासत केंद्र के निर्माण के लिए 46.51 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है.

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