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जालोर: कोरोना काल में 9 और 6 साल के भाई-बहन ने लिख डाली पूरी रामायण

कोरोना काल (Corona era) में राजस्थान के जालोर जिले के होनहार भाई-बहन ने बड़ा काम किया है. दोनों ने दूरदर्शन पर प्रसारित रामायण (Ramayana) से प्रभावित होकर उसे 21 कॉपियों में लिख डाला.

जालोर: कोरोना काल में 9 और 6 साल के भाई-बहन ने लिख डाली पूरी रामायण
कोरोना काल (Corona era) में राजस्थान के जालोर जिले के होनहार भाई-बहन ने बड़ा काम किया है. दोनों ने दूरदर्शन पर प्रसारित रामायण (Ramayana) से प्रभावित होकर उसे 21 कॉपियों में लिख डाला.

जालोर. कोरोना काल (Corona era) में जहां लोग महामारी के भय में जी रहे थे, वहीं जालोर के भाई-बहन ने पूरी रामायण (Ramayana) ही लिख डाली. इस कार्य में दोनों को करीब 8 माह का समय लगा. यही नहीं इन दोनों भाई-बहन को रामायण के सभी भाग कंठस्थ याद (Memorized) भी हैं. 9 वर्षीय माधव और उसकी 6 साल की बहन अर्चना के मन में कोराना काल के दौरान दूरदर्शन पर प्रसारित रामायण देखकर इसे कागज पर उतारने का विचार आया.

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उसके बाद दोनों भाई-बहनों ने पेन और पेंसिल से यह कार्य शुरू कर दिया. माधव चौथी और अर्चना तीसरी कक्षा में पढ़ती है. रामायण लिखने के लिए उन्होंने 20 कॉपियां काम में लीं. करीब 2100 से कुछ अधिक पेज में यह काम पूरा किया. ये दोनों आदर्श विद्या मंदिर जालोर के विद्यार्थी हैं. खास बात यह है कि दोनों को रामायण के किसी भी भाग के बारे में कभी भी पूछ लिया जाए तो वे कहीं भी नहीं अटकते. उन्हें सब याद है.

पिता का मिला प्रोत्साहन

श्री रामचरितमानस में 7 कांड हैं. दोनों बच्चों ने अपनी कॉपियों में सभी सातों कांड लिख दिए. बालकांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, सुंदर कांड, लंका कांड और उत्तर रामायण. इनमें माधव ने 14 कॉपियों में बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड और उत्तर कांड लिखा. उसके साथ ही अर्चना ने 6 कॉपियों में किष्किंधा कांड, सुंदरकांड और लंका कांड का लेखन किया. चौथी कक्षा में पढ़ने वाले माधव ने बताया कि कोरोना काल में टीवी पर प्रसारित रामायण देखकर उनकी भी रामायण पढ़ने की इच्छा हुई. पहले परिवार के साथ और बाद में दोनों भाई बहन ने मास पारायण और नवाह पारायण में श्री रामचरितमानस का कुल 3 बार पठन किया. इसी दौरान पिताजी के प्रोत्साहन से दोनों ने रामायण लिखने की शुरुआत की.

अजब संयोग

आदर्श विद्या मंदिर के प्रधानाध्यापक सत्यजीत चक्रवर्ती बताते हैं कि इससे बच्चों का संस्कृति और इतिहास से जुड़ाव होता है. वहीं लेखन में सुधार और पढ़ने-लिखने का प्रभाव भी बच्चों पर पड़ता है. दोनों भाई-बहन ने कोरोना काल के 8 माह में रामायण लिखी और रामायण लिखने का कार्य मार्गशीर्ष पूर्णिमा को पूरा किया. संयोग से 550 वर्ष पहले जालोर के इतिहास की महत्वपूर्ण पुस्तक "कान्हड़ दे प्रबंध" का लेखन पंडित पद्मनाथ ने मार्गशीर्ष पूर्णिमा को ही पूरा किया था.

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