सब चैन से सोते हैं तो जाने क्यों जयपुर में 'सफल लोग' अलाव जलाकर रोते हैं

रात में जब प्रदेश में सब चैन से सोते हैं तो जयपुर में 'सफल लोग' अलाव जलाकर अपनी किस्मत को लेकर रोते हैं. ये वे लोग हैं जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से प्रदेश की प्रशासनिक सेवा के लिए सफलता हासिल की लेकिन अब तक नियुक्त ही नहीं हो पाए.

Mahesh Dadhich , News18 Rajasthan
कड़ाके की सर्दी में लोग जब घरों में चैन की नींद सो रहे होते हैं, उस वक्त प्रदेश के बहुत सारे 'सफल लोग' सड़कों पर अलाव जलाकर अपनी किस्मत पर रो रहे होते हैं. ये वे 'सफल लोग' हैं जिनका राजस्थान प्रशासनिक सेवा(आरएएस) अधिकारी हैं जो चयनित तो हो चुके हैं, लेकिन इन्हें नौकरी नहीं मिल पाई हैं. सबकी मेडिकल जांच हो गई, पुलिस वेरिफिकेशन भी हो गया पर नियुक्ति नहीं हुई. लिहाजा इन दिनों वे राजस्थान यूनिवर्सिटी में लगातार धरने पर बैठे हैं.  जब देर रात न्यूज 18 की टीम यहां पहुंची तो यहां अलाव जलाकार गांधीवादी भजनों के सहारे धरनास्थल पर चयनित अभ्यर्थी रात गुजारते नजर आए.इनमें से आरएएस के लिए कई लोगों ने अपनी अच्छी नौकरी छोड़ दी. इन सफल लोगों में एक हैं मुनेश मीणा, जो राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सेवाडी पाली में इतिहास के व्याख्याता पद पर कार्यरत थे. आरएएस भर्ती परीक्षा 2016 में इनका 477 वीं रैंक पर चयन हुआ तो अपनी नौकरी छोड़ दी और शिक्षा विभाग को 15 जून 2018 अपना त्याग पत्र सौंप दिया. इनका त्याग पत्र माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने स्वीकार कर लिया. लेकिन मुनीश आरएएस बनकर भी आरएएस अधिकारी नहीं बन सके. इसका कारण है कि आरएएस भर्ती परीक्षा 2016 के 725 अभ्यर्थियों को अब तक नियुक्ति नहीं मिल पाई है. अमितेश मीणा का चयन भी 633 वीं रैंक पर हुआ. जिन्होंने आरएएस में चयन होने के बाद एसबीबीजे में कैशियर की नौकरी छोड़ दी थी. कुछ ऐसा ही शिप्रा राजवात के साथ भी है जिन्होंने निजी फार्मा कंपनी में अपने पांच लाख रुपए के पैकेज की नौकरी को छोड़ दी थीये भी छोड़ चुके हैं नौकरी भवानी सिंह आईआईसीएल में अभियंता पद से नौकरी छोड़ी ( 18 लाख का पैकेज था)
नरेश कुमार नवोदय विद्यालय में सैकण्ड ग्रेड अध्यापक पद छोड़ा
भीमराज सेंट्रल एक्सरसाइज डिपार्टमेंट में इंस्पेक्टर पद छोडा
आलोक शर्मा सिंडिकेट बैंक में प्रोबेशन ऑफिसर का पद छोडा
अरूण सिंह शेखावत डिस्कॉम में एईएन का पद छोड़ायहां फंसा है पेंच आरएएस परीक्षा के लिए मुख्य परीक्षा में हर वर्ग के पदों की संख्या के पन्द्रह गुना अभ्यर्थियों को बुलाया जाने का नियम है. लेकिन 2016 में प्री के परिणाम में ओबीसी की कट ऑफ जनरल से ज्यादा होने के कारण अदालत में मामला फंस गया. जिसके बाद कोर्ट के आदेशानुसार जनरल और ओबीसी इस अंतर में शामिल अभ्यर्थियों को शामिल करना था. जिसमें अंतिम चयनित 66 अभ्यर्थी वो है जिन्हें ज्यादा बुलाया गया था. अब इनकी नियुक्ति को लेकर मामला उलझा हुआ हैं. अभ्यर्थियों की मांग है कि नियुक्तियों को याचिका के निर्णय के अधीन रख उन्हें नियुक्ति दी जा सकती हैं.ये भी पढ़ें-
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