राजस्थान में छात्रसंघ के नतीजों से सकते में कांग्रेस-BJP, बढ़ी सियासी चिंता

राजस्थान विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश के छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने सत्ता के लिए संघर्ष कर रही बीजेपी और कांग्रेस पार्टियों में खलबली मचा दी है.

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राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने प्रदेश में सत्ता के लिए संघर्ष कर रहीं दोनों प्रमुख पार्टियों में खलबली मचा दी है. कांग्रेस और बीजेपी के छात्र संगठनों को नकारते हुए प्रदेश के पढ़े-लिखे युवाओं ने निर्दलीयों पर विश्वास जताया है. प्रदेश की 26 यूनिवर्सिटीज के 10 लाख से अधिक युवा मतदाताओं की इस छात्र पंचायत ने प्रदेश की सियासत के अब तक के समीकरणों को भी उलझा दिया है. दरअसल, अब तक माना जाता रहा है कि चुनावी साल में छात्रसंघ के नतीजे जैसे होते हैं, विधानसभा में भी उसी अनुरूप सरकार बनती है. यानी एबीवीपी की जीत पर बीजेपी और एनएसयूआई की जीत पर कांग्रेस को बहुमत मिलता है, लेकिन एक दर्जन प्रमुख विश्वविद्यालयों में निर्दलीयों की जीत से यह आकलन भी गड़बड़ा गया है.प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव परिणामों ने कांग्रेस और बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. नतीजों ने साफ कर दिया है कि युवाओं के बीच दोनों ही पार्टियों के छात्र संगठनों को लेकर क्रेज कम हुआ है और निर्दलीयों के रूप में उन्हें विकल्प भी मिल रहा है. एक दर्जन प्रमुख यूनिवर्सिटीज में राजस्थान यूनिवर्सिटी, कोटा यूनिवर्सिटी (कोटा) महाराजा गंगासिंह यूनिवर्सिटी (बीकानेर), वेटरनरी यूनिवर्सिटी (बीकानेर) और बीकानेर कृषि यूनिवर्सिटी में निर्दलीयों को सफलता मिली है. यहां एबीवीपी और एनएसयूआई ने भी पूरा दमखम लगाया, लेकिन उनके उम्मीदवारों को यूथ ने नकार दिया.
छात्रसंघ चुनाव के नतीजे.
प्रदेश की सबसे बड़ी राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने भी दोनों प्रमुख छात्र संगठनों को चौंका दिया. बागी निर्दलीय उम्मीदवार विनोद जाखड़ ने चार हजार से अधिक वोटों से एससी उम्मीदवार की रिकॉर्ड जीत हासिल की.
राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष विनोद जाखड़ और उपाध्यक्ष रेणु चौधरी.
राजस्थान यूनिवर्सिटी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब निर्दलीय एससी उम्मीदवार अध्यक्ष बना है. विनोद ने इस जीत के साथ ही यूनिवर्सिटी में निर्दलीय उम्मीदवार के अध्यक्ष बनने की हैट्रिक पूरी हो गई. लेकिन इसी के साथ एक बार फिर यहां अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और और नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की स्टूडेंट पॉलिटिक्स भी पूरी तरह से फेल हो गई.यूथ का रूझान इसलिए बन सकता है संकटराजस्थान में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव-2018 में 18 लाख से अधिक वो युवा मतदान करेंगे जो 18 साल के हुए हैं और पहली बार वोट डालने वाले हैं. इसी तरह 18 से 24 साल की आयुवर्ग के युवाओं की संख्या करीब 60 लाख है और 25 से 34 साल के मतदाओं का आंकड़ा एक करोड़ 10 लाख से ऊपर है. ऐसे में इतने बड़े वोट बैंक पर यदि छात्रसंघ के नतीजों का थोड़ा बहुत भी असर पड़ता है तो वो सियासत के समीकरण बिगाड़ने के लिए काफी होगा.ये भी पढ़ें- 
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