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राजस्थान: 3 महीने बाद हाईकोर्ट पहुंचा कांग्रेस के 91 विधायक-मंत्रियों के इस्तीफे का मामला

राजस्थान: 3 महीने बाद हाईकोर्ट पहुंचा कांग्रेस के 91 विधायक-मंत्रियों के इस्तीफे का मामला

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने इस मामले को लेकर हाइकार्ट में जनहित याचिका दाखिल की है. 25 सितंबर 2022 को प्रदेश में कांग्रेस सरकार समर्थित 91 विधायकों ने अपनी अपनी सीटों से स्वैच्छिक त्याग पत्र देने का निर्णय लेते हुए इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से सौंपा था

राजस्थान विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़

राजस्थान विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़

हाइलाइट्स

राजस्थान में इसी साल 25 सितम्बर को कांग्रेस के 91 विधायकों ने इस्तीफा दिया था
उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने इस मामले को लेकर आरोप लगाया है
इस मामले में विधानसभा स्पीकर-सचिव के विरुद्ध जनहित याचिका हाईकार्ट में दायर की गई है

जयपुर. राजस्थान में इसी साल 25 सितम्बर को कांग्रेस के 91 विधायकों के इस्तीफों का मामला अब उच्च न्यायालय में पहुंच गया है. विधानसभा में भाजपा के उप नेता राजेंद्र राठौड़ ने हाईकोर्ट के वकील हेमंत नाहटा के साथ उच्च न्यायालय में पहुंचकर इस संबंध में एक जनहित याचिका दायर की. इस याचिका में  इस बात को आधार बनाया गया है कि विधानसभा अध्यक्ष डा. सी.पी.जोशी ने विधायकों के इस्तीफों पर 2 माह बाद तक कोई निर्णय नहीं लिया है. अब हाईकोर्ट को देखना होगा कि अनुच्छेद 212 का तो अतिक्रमण दायर की गई इस जनहित याचिका में तो नहीं हो रहा है.

याचिका में किन बिन्दुओं को बनाया गया है आधार

25 सितंबर 2022 को प्रदेश में कांग्रेस सरकार समर्थित 91 विधायकों ने अपनी अपनी सीटों से स्वैच्छिक त्याग पत्र देने का निर्णय लेते हुए इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से सौंपा था लेकिन दो महीने पश्चात् भी त्यागपत्रों को स्वीकार नही किया गया है. किसी भी विधानसभा सीट से स्वेच्छा से इस्तीफ़ा दिया जाना विधायकों का अधिकार होता है. 91 विधायकों से जबरन हस्ताक्षर कराए जाने या उनके त्याग पत्र पर किसी अपराधी द्वारा हस्ताक्षर कूट रचित कर दिए जाने की कोई सूचना अध्यक्ष के पास नहीं थी, ऐसे में लिखित में अपने हस्ताक्षरों से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो कर अध्यक्ष को इस्तीफा पेश किए जाने पर उसे अविलम्ब स्वीकार करना अध्यक्ष के लिए विधानसभा प्रक्रिया नियम 173  के अंतर्गत बाध्यकारी है.

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पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बोलीं

91 विधायकों के इस्तीफे के मसले को लेकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह ने कहा कि अभी इस्तीफा मंजूर नही हुआ है, लिहाजा विधायक-मंत्री काम कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि इस्तीफे स्वीकार करने या नहीं करने का मामला विधानसभा अध्यक्ष के क्षेत्राधिकार में आता है और जो भी इस विषय में निर्णय लेंगे वो अध्यक्ष ही लेंगे.

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड ने लगाए आरोप 

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने आरोप लगाया कि इस्तीफों पर तत्काल प्रभाव से निर्णय लेने के संबंध में भाजपा विधायक दल और उसके पश्चात  तत्पश्चात्  विधानसभा अध्यक्ष को कई बार पत्र लिखे गए लेकिन उसके उपरान्त भी इस्तीफ़े स्वीकार नही करने से इस्तीफ़ों को स्वीकार कर लेने की धमकी की आड़ में कांग्रेस सरकार में अशोक गहलोत ज़बरन मुख्यमंत्री बने रहे. इस  योजना को अंजाम दिया जा रहा है. अध्यक्ष के पद व प्रक्रिया का राजनीतिक उद्देश्यों हेतु  दुरुपयोग किया जाना अपेक्षित नहीं है. एक ओर तो 6 बसपा सदस्यों की खिलाफ दलबदल याचिका 3 माह में निस्तारित करने के हाईकोर्ट के 24 अगस्त 2020 को दिए गए आदेशों का सम्मान नही किया जा रहा है तो दूसरी ओर स्वैच्छिक इस्तीफे भी 65 दिनों से स्वीकार नही किये गए  है जबकि अध्यक्ष महोदय ने यह मामला शीघ्र निस्तारित करने का मौखिक आश्वासन दिनांक 18 अक्टूबर को स्वयं मुझे दिया था.

राठौड़ ने कहा कि राजस्थान में वर्तमान राजनीतिक हालात राष्ट्रपति शासन अथवा मध्यावधि चुनाव की ओर इशारा कर रहे हैं. विधानसभा स्पीकर को सरकार समर्थित 91 मंत्री व विधायकों के इस्तीफे अविलंब स्वीकार कराए जाने की मांग न्यायालय से की गयी है.

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Tags: Jaipur news, Rajasthan news, Rajasthan Politics

FIRST PUBLISHED : December 02, 2022, 09:53 IST
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