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उदयपुर की महिला में मिली दुर्लभ बीमारी, राजस्थान का पहला केस, दुनियाभर में केवल 200 मामले हैं ऐसे

उदयपुर की महिला में मिली दुर्लभ बीमारी, राजस्थान का पहला केस, दुनियाभर में केवल 200 मामले हैं ऐसे

Kimura Disease: चिकित्सकों के अनुसार यह बीमारी पुरुषों में ज्यादा पाई गई है. महिलाओं में इसकी पुष्टि बहुत कम हुई है.

Kimura Disease: चिकित्सकों के अनुसार यह बीमारी पुरुषों में ज्यादा पाई गई है. महिलाओं में इसकी पुष्टि बहुत कम हुई है.

Rare Kimura Disease Patient Found in Rajasthan: राजस्थान के उदयपुर में एक महिला दुर्लभ बीमारी कीम्यूरा डिजीज से ग्रसित पाई गई है. राजस्थान में इस बीमारी का यह संभवतया पहला केस है. दुनिया में इस बीमारी से जुड़ा पहला केस 1937 में पाया गया था. अब तक पूरी दुनिया में इसके 200 केस मिले हैं. यह बेहद दुर्लभ किस्म की बीमारी (Rare Disease) है. जनरल अस्पताल के चिकित्सकों ने महिला का इलाज किया है. महिला अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है. कीम्यूरा डिजीज में गले और चेहरे पर सूजन तथा गठान हो जाती है. चिकित्सकों के अनुसार यह बीमारी पुरुषों में ज्यादा पाई गई है. महिलाओं में इसकी पुष्टि बहुत कम हुई है.

उदयपुर. देश इस समय कोरोना महामारी (Corona Pandemic) से जूझ रहा है. इस बीच उदयपुर के जीबीएच जनरल अस्पताल में एक महिला में कीम्यूरा नाम की बीमारी (Kimura Disease) की पहचान हुई है. चिकित्सकों के अनुसार यह राजस्थान का पहला मामला हो सकता है. क्योंकि 1937 से अब तक महज 200 मरीजों में ही यह बीमारी मिली है. जीबीएच जनरल अस्पताल के चिकित्सकों ने महिला का इलाज किया है। महिला अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है. इसके साथ ही उसे अस्पताल से डिस्चार्ज भी कर दिया गया है. कीम्यूरा डिजीज में गले और चेहरे पर सूजन तथा गठान हो जाती है.

जीबीएच जनरल अस्पताल की ओपीडी में इस महिला को लेकर उसके परिजन पहुंचे थे. ग्रुप डायरेक्टर डॉ. आनंद झा ने बताया कि डॉ. वीरेन्द्र गोयल ने मरीज को देखकर परिजनों को उसके चेहरे और गले में सूजन तथा गले में गठान की जानकारी दी थी. उसके बाद महिला को भर्ती किया गया और गठान से द्रव्य लेकर उसकी जांच करायी गयी तो कीम्यूरा बीमारी डिटेक्ट हुई.

महिला पूरी तरह से हुई ठीक, अस्पताल से किया डिस्चार्ज
महिला का चिकित्सालय में ही इलाज किया गया और वह पूरी तरह से ठीक होकर अपने घर गई है. डॉ. वीरेन्द्र गोयल ने बताया कि इस बीमारी का पहला रोगी 1937 में मिला था. उसके बाद से अब तक पूरे विश्व में इसके महज 200 रोगी पाये गये हैं. चिकित्सकों के अनुसार यह बीमारी पुरुषों में ज्यादा पाई गई है. महिलाओं में इसकी पुष्टि बहुत कम हुई है.


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केस रजिस्टर्ड करने के लिये डब्ल्यूएचओ को लिखा पत्र
अब अस्पताल प्रबंधन ने इस महिला के रोग के लक्षण और इलाज के तरीके को मेडिकल जनरल में प्रकाशन के लिये भेजा है. इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ को भी केस रजिस्टर्ड करने के लिये पत्र लिखा है. इस महिला का इलाज डॉ. वीरेंद्र गोयल के नेतृत्व में डॉ. जीतेष अग्रवाल, डॉ. हरबीर छाबड़ा और मेडिसिन विभाग की टीम ने किया.

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