आधार डेटाबेस की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल, सॉफ्टवेयर से हैक किए जाने का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, यह सॉफ्टवेयर बाजार में ढाई हजार रुपये में मिल जाता है और इसके जरिए कोई भी आधार के एनरोलमेंट डेटाबेस में लॉग इन कर सकता है.

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आधार डेटा की सुरक्षा को लेकर यूनिक आइडेंटिटीफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) एक बार फिर से सवालों के घेरे में है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आधार के डेटाबेस को सॉफ्टवेयर के जरिए हैक किया जा सकता है. इसके जरिए गंभीर सुरक्षा उपायों को निष्क्रिय कर सकते हैं. इसी डेटाबेस के जरिए आधार के लिए नए लोगों को जोड़ा जाता है.हफिंगटन पोस्ट इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह सॉफ्टवेयर बाजार में ढाई हजार रुपये में मिल जाता है और इसके जरिए कोई भी आधार के एनरोलमेंट डेटाबेस में लॉग इन कर सकता है. इसके बाद कोई भी व्‍यक्ति किसी को भी रजिस्‍टर कर सकता है और आधार नंबर जनरेट कर सकता है.अगर आपके पास हैं एक से ज्यादा बैंक अकाउंट तो संभल जाएं, वरना साफ हो जाएंगे हजारों रुपयेरिपोर्ट में कहा गया है कि इस सॉफ्टवेयर से आधार डेटाबेस के सुरक्षा उपाय तीन जगहों से बंद हो जाते हैं. इसके तहत नए लोगों को जोड़ने से पहले जिस सत्‍यापन की जरूरत होती है उससे बचा जा सकता है. फिर सॉफ्टवेयर का इनबिल्‍ट जीपीएस भी बंद हो जाता है. इसके चलते कोई भी कहीं से भी डेटाबेस को एक्‍सेस कर सकता है. साथ ही यह सॉफ्टवेयर का आंखों की पुतलियों को स्‍कैन करने वाले फीचर की गंभीरता भी कम हो जाती है.वहीं, UIDAI ने एक बयान जारी करते हुए आधार सॉफ्वेयर हैक हो जाने की खबर को बेबुनियाद करार दिया है. कुछ लोग जान-बूझकर लोगों के मन में भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. UIDAI ने कहा है कि किसी भी डेटा को डिस्क में सेव करने से पहले जरूरी सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखा जाता है.UIDAI ने साफ किया कि कोई भी ऑपरेटर आधार बना या अपडेट नहीं कर सकता है. जब तक कोई निवासी स्वयं अपनी बॉयोमेट्रिक डिटेल उसे ना दे दे. (एजेंसी इनपुट के साथ)

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