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Lucknow: आखिर क्यों भूल भुलैया की ऐतिहासिक गैलरी हो गई खामोश? 3 साल से रहस्यमयी आवाज बनी सपना

Lucknow Bhool Bhulaiya: लखनऊ के बड़े इमामबाड़े में बनी भूल भुलैया की ऐतिहासिक गैलरी पिछले तीन साल से खामोश हो गई है. दरअसल हुसैनाबाद ट्रस्ट और पुरातत्व विभाग के बीच में चल रही तनातनी और कानूनी लड़ाई के बीच इस गैलरी की मरम्मत का कार्य भी अटक गया है.

रिपोर्ट-अंजलि सिंह राजपूत

लखनऊ. यूपी की राजधानी लखनऊ के बड़े इमामबाड़े में बनी भूल भुलैया की ऐतिहासिक गैलरी अब खामोश हो गई है. पिछले 3 सालों से पर्ययटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहने वाली रहस्यमयी आवाज आना बंद हो गई हैं, क्योंकि पुरातत्व विभाग ने कमजोर होने की वजह से इस ऐतिहासिक गैलरी को बंद कर दिया था. वहीं, हुसैनाबाद ट्रस्ट और पुरातत्व विभाग के बीच में चल रही तनातनी और कानूनी लड़ाई के बीच इस गैलरी की मरम्मत का कार्य भी अटक गया है. इसका खामियाजा देश विदेश से यहां पर आने वाले पर्यटकों को उठाना पड़ रहा है. 40 रुपये का टिकट लेने के बाद भी पर्यटक इस ऐतिहासिक को नहीं देख पा रहे हैं. इतना ही नहीं इस गैलरी के बंद होने की वजह से पूरी भूल भुलैया में जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे पर्यटकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

200 साल पुरानी इस इमारत की मरम्मत की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग के ऊपर होने के बावजूद अभी तक इसकी मरम्मत नहीं की गई है. वहीं, सिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने पुरातत्व विभाग पर भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया है. उनका कहना है कि बजट आने के बावजूद पुरातत्व विभाग इन ऐतिहासिक इमारतों की मरम्मत आखिर क्यों नहीं करवा रहा है.

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ऐतिहासिक गैलरी से आती थी रहस्यमयी आवाज


भूल भुलैया में तीन गैलरियां बनी हुई हैं.जिसमें की पहली गैलरी सबसे ऐतिहासिक गैलरी कहलाती है.इसकी वजह यह है कि इस गैलरी में 163 फीट की दूरी से जब गाइड माचिस चलाता था या चुटकी बजाने की आवाज दूरी पर खड़े पर्यटकों को आवाज एकदम करीब से सुनाई देती थी.यह बेहद दिलचस्प गैलरी होने की वजह से देश विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए यह हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र बनी रहती थी.

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कब और किसने करवाया था निर्माण

लखनऊ के नवाब आसफुद्दौला ने बड़े इमामबाड़े को बेहद शानो शौकत से 1775 से 1797 के बीच बनवाया था. इसी इमामबाड़े में भूल भुलैया बनी हुई है. इसे भी अवध के नवाब आसफुद्दौला ने ही बनवाया था. भूल भुलैया के रहस्य को आज तक कोई भी जा नहीं पाया है कि आखिर इस 330 फीट लंबी सुरंग में आवाज कैसे गूंजती है. हर जगह पर चार रास्ते हैं जिसमें कि 3 गलत और एक सही है. 15 फीट मोटी दीवारें हैं और ढाई फीट मोटा रास्ता है. एकदम मकड़ी के जाले जैसी भूल भुलैया बनी हुई है.

मरम्मत को लेकर खूब चले पत्र

24 जनवरी 2019 को पुरातत्व विभाग ने हुसैनाबाद ट्रस्ट के सचिव को पत्र लिखकर कहा था कि भूल भुलैया की यह गैलरी कमजोर हो गई है. ऐसे में लोगों की आवाजाही कम की जाए ताकि कोई घटना दुर्घटना न हो. वहीं, 30 जनवरी 2019 को अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार वैश्य ने जो कि हुसैनाबाद ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव थे उन्होंने पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर कहा था कि इसकी मरम्मत जल्द से जल्द कराई जाए, क्योंकि देश विदेश से आ रहे पर्यटकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसके बावजूद पुरातत्व विभाग ने इसकी मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया. वहीं 4 फरवरी 2021 को एक बार फिर से अपर नगर मजिस्ट्रेट सेकंड में पुरातत्व विभाग को लेटर लिखकर उन से अनुरोध किया था कि इस गैलरी की मरम्मत जल्द से जल्द कराई जाए, क्योंकि इस ऐतिहासिक देखने से लोग वंचित रह रहे हैं. इस गैलरी की मरम्मत को लेकर पिछले 3 सालों से लगातार दोनों विभागों के बीच कागजी कार्रवाई चल रही है, लेकिन हकीकत में किसी ने इसकी मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया.

हुसैनाबाद ट्रस्ट के अधीन आती हैं ऐतिहासिक इमारतें

हुसैनाबाद ट्रस्ट के अधीन सभी ऐतिहासिक इमारते आती हैं और यह हुसैनाबाद ट्रस्ट जिला प्रशासन के अधीन में आता है. हुसैनाबाद ट्रस्ट का अध्यक्ष जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी सचिव होते हैं. वहीं, इस ट्रस्ट के कुछ अन्‍य सदस्य भी हैं जिसमें हबीबुल हसन और अहमद मेहंदी भी शामिल हैं.

जिलाधिकारी ने कहा जवाबदेही पुरातत्व विभाग की

इस मामले पर जब लखनऊ के जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार से बात की गई तो उनका कहना था कि इस मामले की जानकारी पुरातत्व विभाग को उनसे ज्यादा है.ऐसे में जवाबदेही पुरातत्व विभाग की ही बनती है.

हुसैनाबाद ट्रस्ट करे हमारे साथ बैठक

इस मामले पर पुरातत्व विभाग के अधीक्षण डॉ. आफताब हुसैन का कहना था कि हुसैनाबाद ट्रस्ट उनके साथ बैठक करे. इसके बाद तय किया जाए कि उस बालकनी को मरम्मत के लिए कब से कब तक बंद किया जाए और बाद में जब इसे खोला जाए तो कितने लोगों की संख्या इसमें जा सके यह सब पहले से तय हो जाना चाहिए. उनका यह भी कहना था कि पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 4 से 5 वर्ष पूर्व इस बालकनी को बंद कर दिया गया था. वर्तमान में वह और उनका विभाग बालकनी की स्ट्रक्चरल स्ट्रेंथ और कैरिंग कैपेसिटी का आकलन करने के लिए सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट रुड़की से संपर्क कर रहा है. उनकी रिपोर्ट आने पर इस विषय में कोई निर्णय लिया जाएगा.

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