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Lucknow: लखनऊ की बेटी अमेरिका में असहाय बुजुर्गों का बनीं सहारा, सास की बीमारी के बाद उठाया ये बीड़ा

Lucknow: लखनऊ की बेटी अमेरिका में असहाय बुजुर्गों का बनीं सहारा, सास की बीमारी के बाद उठाया ये बीड़ा

परवीन अंजुम सिद्दीकी यूपी के लखनऊ की रहने वाली हैं और फिलहाल अपने पूरे परिवार के साथ अमेरिका में रहती हैं. वहां परवीन सिद्दीकी बुजुर्गों के लिए सेवा केंद्र चलाती हैं. उनका इरादा यूपी में भी इस तरह के ओल्ड एज होम चलाने का है.

लखनऊ/अंजलि सिंह राजपूतबुजुर्गों को अपने घर से निकालने वाले लोगों को तो आपने बहुत देखा होगा लेकिन क्या आपको पता है कि लखनऊ की एक ऐसी बेटी है जो अमेरिका में असहाय बुजुर्गों को ही अपना परिवार बना कर उनका सहारा बन गई हैं. जी हां हम बात कर रहे हैं लखनऊ की रहने वाली परवीन अंजुम सिद्दीकी की जो अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में तीन वृद्धाश्रम चला रही हैं और आने वाले वक्त में वो लखनऊ व आसपास के इलाकों में भी बुजुर्ग लोगों की सेवा करने के बारे में अवसर तलाशने की सोच रही हैं.

फिलहाल, अमेरिकी में परवीन अंजुम जो ओल्ड एज होम चला रही हैं, उनके नाम हैं फातिमा, अलीशा और होली केयर. लखनऊ, दिल्ली से पढ़ाई करने वाली परवीन अंजुम अपने पूरे परिवार के साथ अब अमेरिका में ही रहती हैं. जब परवीन अंजुम का लखनऊ आना हुआ तो उनसे न्यूज18 लोकल ने खास बातचीत की.

सास की बीमारी ने किया प्रेरित

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परवीन अंजुम सिद्दीकी बताती हैं कि फातिमा उनकी सास का नाम था. सास करीब 13 साल तक बिस्तर पर रहीं, गंभीर बीमारी से वह जूझ रही थीं. सास की सेवा करते करते ही उन्होंने बुजुर्गों की सेवा करने का मन बना लिया. सास का निधन 2014 में हो गया था. इसके बाद उन्होंने ओल्ड एज होम बनाने की शुरुआत की.

परवीन अंजुम ने बताया कि करीब 18 सदस्यों का उनके पास लाइसेंस है और वो इन बुजुर्गों की दिल से सेवा कर रही हैं. उनके खान-पान, कपड़े और दवा तक का ध्यान रखती हैं. हालांकि, ये सेवा पूरी तरह निशुल्क नहीं होती है.

उन्होंने आगे बताया कि अलीशा उनकी बेटी का नाम है इसीलिए एक आश्रम का नाम अलीशा रखा गया. इसके साथ उन्होंने बताया कि अमेरिका में कोई भी अपने मां-बाप को घर से नहीं निकालता है, बल्कि मां-बाप की फिक्र करते हुए कि उनको एक माहौल मिले उनके जैसा और कोई उनका हर पल ध्यान रखे इसलिए वृद्धाश्रम में भेजा जाता है. कई बार तो बुजुर्ग खुद यहां चले आते हैं. उन्होंने बताया कि वहां पर एक बार लाइसेंस मिल गया तो फिर सरकार और वहां के लोग पूरी मदद करते हैं. वहां समय-समय पर बिना बताए अधिकारियों का निरीक्षण भी होता रहता है. अधिकारी अकेले कमरे में भी जाकर बुजुर्गों से बात करते हैं कि उन्हें कैसे यहां पर रखा जा रहा है और व्यवहार कैसा किया जा रहा है, इसकी जानकारी लेते हैं.

लखनऊ में भी शुरू करेंगी सेवा

अंजुम सिद्दीकी ने बताया कि उनके पति अखलाक सिद्दीकी लखनऊ में भी इस तरह के वृद्धाश्रम शुरू करने पर लंबे वक्त से विचार कर रहे हैं. परवीन अंजुम सिद्दीकी ने बताया कि उनकी पढ़ाई लखनऊ और नई दिल्ली से हुई है. शादी के बाद 1993 में वह अपने पति के साथ अमेरिका चली गई थीं.

बुजुर्गों के रहने से घर में होती है बरकतअंजुम सिद्दीकी ने बताया कि बुजुर्गों के घर में रहने से बरकत होती है. ऐसे में उनकी सेवा करें और अगर सेवा नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें सम्मान के साथ वृद्धाश्रम छोड़ दें लेकिन उन्हें घर के बाहर न निकालें. इसके अलावा न ही घर से मारपीट करके निकालें क्योंकि यह ठीक नहीं है. परवीन अंजुम का कहना है कि जैसा कोई आज अपने माता-पिता के साथ करता है, कल उनके बच्चे भी उनके साथ वैसा ही करेंगे.

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Tags: Lucknow news, Up news in hindi

FIRST PUBLISHED : December 09, 2022, 11:45 IST
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