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Lucknow: गोमती नदी के गऊ घाट से हटा पीपे वाला पुल, अब ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव से कर रहे सफर

लखनऊ शहर के गऊ घाट से रोजाना हजारों लोग जर्जर नाव के जरिए गोमती नदी के एक छोर से दूसरे छोर पर जान जोखिम में डालकर जाने पर मजबूर हैं. दरअसल गोमती नदी में जलस्तर बढ़ने की वजह से पीपे वाला पुल 4 महीने के लिए हटा दिया जाता है. जानें पूरी कहानी...

अंजलि सिंह राजपूत

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक तरफ मेट्रो फर्राटा भर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ इसी शहर के गऊ घाट से रोजाना हजारों लोग जर्जर नाव के जरिए गोमती नदी के एक छोर से दूसरे छोर पर जान जोखिम में डालकर जाने पर मजबूर हैं. वजह यह है कि यहां पर बना अस्थाई पीपे वाला पुल गोमती नदी में जलस्तर बढ़ जाने की वजह से साल में 4 महीने हटा दिया जाता है. साफ है कि सिर्फ 8 महीने ही यह पुल रहता है. अंग्रेजों के जमाने का बना यह पुल फैजुल्लागंज को गऊ घाट से जोड़ता है.

इसके अलावा कई दूसरे गांव जैसे दाउदनगर, दौलतगंज और घैला को गऊ घाट (मेहंदी घाट) से जोड़ने का काम भी यही पुल करता है. लोगों के लिए यह पुल आने और जाने के लिए एकमात्र लाइफ लाइन था, लेकिन अब इस पुल के हट जाने से मजबूरी में जर्जर नाव से हजारों की संख्या में लोग जान हथेली पर लेकर गऊ घाट तक आ रहे हैं. इस नाव के जरिए रोज स्कूल के बच्चे, किसान, मजदूर और कॉलेज के छात्र अपने गांव से शहर की ओर आते हैं.


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रस्सी से चलती है नाव
दाउदनगर, दौलतगंज, घैला और फैजुल्लागंज को जोड़ने वाला यह पुल अंग्रेजों के जमाने से ही अस्थाई बना हुआ है. आज आजादी के 75वें साल हो जाने के बावजूद यहां के लोगों को स्थाई पुल नहीं मिल पाया है. कागजी कार्रवाई शासन-प्रशासन तो इसे बनाने के लिए बहुत करता है, लेकिन सिर्फ फाइलों तक ही इसे बनाने का काम सीमित रह जाता है. नगर निगम की ओर से लोगों को आने जाने के लिए एक नाव दे दी गई है. इस एक नाव के जरिए ही लोग आते जाते हैं. जब तक नाव दूसरे छोर पर होती है तो पहले छोर पर खड़े लोग लंबा इंतजार करते हैं तब कहीं जाकर उनका नंबर आता है. इस नाव को चलाने के लिए सिर्फ एक लंबी सी रस्सी बांध दी गई है. एक छोर से दूसरे छोर पर उसी को पकड़कर घसीटते हुए लोग गोमती नदी को पार करते हैं.

दो लोगों की हो चुकी है मौत
समाजसे‌वी ऋद्धि गौड़ ने बताया कि इस पुल को स्थाई बनाने के लिए कई बार शासन प्रशासन और सरकार तक से कहा गया, लेकिन आज तक यह पुल लोगों को स्थाई रूप में नहीं मिल पाया है.उन्होंने बताया कि इस पुल से गिरने की वजह से अब तक दो लोगों की मौत भी हो चुकी है. इसके बावजूद अधिकारी पता नहीं किस बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं.

पुल नहीं बना तो देंगे धरना
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रदेश महासचिव अजय त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने इस पुल को बनवाने के लिए धरना प्रदर्शन भी किया था, रैली भी निकाली थी. कई बड़े मंत्रियों और अधिकारियों से भी मिल चुके हैं. इसके बावजूद आज तक यह पुल नहीं बन पाया है. अभी जल्दी में उन्होंने लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद से मुलाकात करके उनको भी इस पुल को बनवाने के लिए एक पत्र सौंपा है. लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा. उन्होंने बताया कि अगर यह पुल इस साल नहीं बना तो धरना प्रदर्शन करेंगे और तब तक नहीं हटेंगे जब तक इस पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो जाता.

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