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इस बार आजमगढ़ से नहीं, मैनपुरी से मुलायम लड़ेंगे चुनाव, ये रही वजह

इस बार आजमगढ़ से नहीं, मैनपुरी से मुलायम लड़ेंगे चुनाव, ये रही वजह

बता दें 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह ने मोदी लहर को कुंद करने के लिए मैनपुरी और आजमगढ़ दोनों ही सीटों से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. बाद में उन्होंने मैनपुरी की सीट छोड़ दी थी.

मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) Image: PTI

मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) Image: PTI

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. हालांकि, वे इस बार आजमगढ़ से नहीं बल्कि सपा के गढ़ मैनपुरी से मैदान में उतरेंगे. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में इस बात का ऐलान किया.

अखिलेश यादव ने कहा कि वे पत्नी डिंपल की सीट कन्नौज से चुनाव लड़ेंगे. अखिलेश ने हालांकि ये साफ नहीं किया कि गठबंधन में उनकी पार्टी कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि इस पर भी जल्द ही फैसला हो जाएगा. लेकिन सभी कार्यकर्ताओं को निर्देश दे दिया गया है कि वे अपने-अपने बूथ पर गठबंधन प्रत्याशी को जिताएं.

यह भी पढ़ें: अखिलेश यादव कन्नौज से और मुलायम ​सिंह यादव मैनपुरी से लड़ेंगे लोकसभा चुनाव

बता दें 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह ने मोदी लहर को कुंद करने के लिए मैनपुरी और आजमगढ़ दोनों ही सीटों से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. बाद में उन्होंने मैनपुरी की सीट छोड़ दी थी.

अपने ही गढ़ में सपा के कमजोर होने पर लिया फैसला

लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव और नगर निकाय चुनाव में सपा के पारम्परिक गढ़ में पार्टी की करारी शिकस्त के बाद दिसम्बर 2017 में ही मुलायम सिंह ने ऐलान कर दिया था कि वे आजमगढ़ से चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन्होंने कहा था कि 2019 का चुनाव वे मैनपुरी से लड़ेंगे. ताकि सपा के गढ़ रहे इटावा, एटा, मैनपुरी, कन्नौज और फिरोजाबाद में पार्टी को फिर से मजबूत किया जा सके.

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राजनितिक जानकारों का मानना है कि मुलायम सिंह यादव के आजमगढ़ सीट को अपने पास रखने से कन्नौज, मैनपुरी, इटावा, एटा में समाजवादी पार्टी कमजोर हुई. जिसका असर 2017 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला. पार्टी ने कन्नौज की 5 विधानसभा सीटों में से चार पर हार गई. यही हाल अन्य जगहों पर भी देखने को मिला. यही नहीं 2014 में डिंपल यादव इस सीट पर जीत तो गईं, लेकिन उनके जीत का अंतर काफी कम रहा. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश और मुलायम के कन्नौज और मैनपुरी से चुनाव लड़ने पर एक बार फिर सपा का वोटर एकजुट होगा.

मुलायम और शिवपाल का खासा प्रभाव

समाजवादी पार्टी के गढ़ में मुलायम और शिवपाल की अच्छी खासी पकड़ रही है. लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में एकाधिकार को लेकर यादव कुनबे में छिड़ी जंग का ही असर रहा कि बीजेपी ने समाजवादी किले को आसानी से ढहा दिया. नगर निकाय चुनाव में हार के बाद मुलायम खुद कह चुके हैं कि अगर अखिलेश ने शिवपाल को विश्वास में लेकर चुनाव लड़ा होता तो यह स्थिति नहीं होती.

अब परिवार में सुलह हो चुकी है और सपा मुखिया को मुलायम का आशीर्वाद भी मिल चुका है. ऐसे में गठबंधन कर चुनाव लड़ने वाले अखिलेश यादव 2019 में अपने गढ़ को मजबूत करना चाहते हैं.

 

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Tags: Akhilesh yadav, Mulayam Singh Yadav, Samajwadi party, लखनऊ

FIRST PUBLISHED : June 14, 2018, 13:46 IST
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