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हस्तिनापुर में शुरू हुआ बूढ़ी गंगा को जीवित करने का कार्य, प्रशासन को मिली अविरल धारा

हस्तिनापुर में शुरू हुआ बूढ़ी गंगा को जीवित करने का कार्य, प्रशासन को मिली अविरल धारा

हस्तिनापुर स्थित बूढ़ी गंगा की धारा को पुनर्जीवित करने के लिए एक बार फिर से प्रयास शुरू हो गए हैं, मवाना एसडीएम अखिलेश यादव ने बताया कि जहां जहां अवैध कब्जे कर गंगा की धारा को अवरुद्ध कर दिया गया था, उन स्थानों पर से फिर से कार्य किया जा रहा है

विशाल भटनागर, मेरठ. मेरठ से लगभग 45 किलोमीटर दूर कौरव पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है. जब पौराणिक ग्रंथों का अध्ययन करेंगे तो हस्तिनापुर में बूढ़ी गंगा का भी उल्लेख देखने को मिलता है. जोकि कहीं ना कहीं अब अपने अस्तित्व को खोती जा रही है. लेकिन उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश अनुसार अब प्रशासन द्वारा एक बार फिर से बूढ़ी गंगा की धारा को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं. जिससे कि जल्द से जल्द बूढ़ी गंगा अपने उसी अस्तित्व में लौट आए. जिससे हस्तिनापुर की भी पहचान होती थी.

News18local से बात करते हुए हस्तिनापुर के विभिन्न पहलुओं पर रिसर्च करने वाले शोभित विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती ने बताया कि जिस स्थान पर 5000 वर्ष पूर्व भीष्म पितामह मां गंगा मैया का ध्यान करते थे. उससे कुछ ही दूरी पर बूढ़ी गंगा की अविरल धारा का प्रभाव मिला है. जिससे मुख्यधारा से मिलाने का प्रयास किया जा रहा है. वहीं मवाना एसडीएम अखिलेश यादव ने फोन पर बात करते हुए बताया कि बूढ़ी गंगा की धारा को पुनर्जीवित करने के लिए जहां जहां पर भी अवैध कब्जे हुए हैं. उनको चयनित कर जल की धारा को पुनर्जीवित किया जा रहा है

कर्ण घाट से निकलती थीं गंगा
कर्ण मंदिर के महंत स्वामी शंकरदेव बताते हैं कि पौराणिक ऐतिहासिक तथ्य की बात की जाए तो उसमें वर्णन है कि जो हस्तिनापुर में बूढ़ी गंगा का अस्तित्व है. वह कभी कर्ण मंदिर और द्रोपदी घाट से होते हुए जाता था. लेकिन पिछले कई वर्षों में जो इसकी धारा थी. वह मुजफ्फरनगर से तो निर्मल बह रही है. लेकिन हस्तिनापुर के क्षेत्र में धारा की प्रवाह लगभग 10 किलोमीटर दूर चला गई है. उसी अस्तित्व फिर से जीवित करने के लिए यह प्रयास किए जा रहे हैं.

जल निकासी से किसानों को होगा फायदा
अभी तक देखा जाता है कि हस्तिनापुर के खादर क्षेत्र में जब भी बाढ़ आती है. तो किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ऐस में बूढ़ी गंगा का अस्तित्व जीवित होगा. तो जो जल निकासी की समस्या बन जाती है उससे किसानों को सीधा फायदा होगा.

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Tags: Meerut news, Uttar pradesh news

FIRST PUBLISHED : January 30, 2023, 15:05 IST