सरकारी खाते में जमा करने थे 98.50 लाख रुपये, खनन कारोबारी को दे दिए

निदेशक खनन ने प्रणव रस्तोगी की धरोहर राशि 98 लाख, 50 हज़ार को जब्त कर विभागीय खाते में जमा करने के आदेश दिए.

Sunil Navprabhat , News18 Uttarakhand
खनन विभाग में एक बार फिर खनन कारोबारियों और विभागीय अधिकारियों के गठजोड़ का बड़ा खुलासा हुआ है. गठजोड़ ऐसा कि ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए अधिकारियों ने नियम कानूनों की भी परवाह नहीं की और राजकोष को करीब एक करोड़ रुपये की चपत लगा दी. मामला खुला तो विभागीय स्तर पर लीपापोती के प्रयास भी शुरू हो गए हैं.मामला हरिद्वार की तहसील भगवानपुर क्षेत्र में 25 हैक्टेयर क्षेत्रफल के उपखनिज लॉट की नीलामी से जुड़ा हुआ है. इस लॉट की ई-नीलामी में टॉप के तीन बोलीदाताओं को एच वन,  एच टू और एच थ्री की श्रेणी में रखते हुए सबसे पहले एच वन विजय इंटरप्राइजेज को मौका दिया गया. विजय इंटरप्राइजेज बोली अपने नाम छूटने के बाद भी समय पर औपचारिकताएं पूरी नहीं कर पाया तो विभाग ने उसकी 98 लाख 50 हजार की धरोहर राशि ज़ब्त कर ली.नियमानुसार इसके बाद एच टू प्रणव रस्तोगी के नाम टेंडर हो गया लेकिन प्रणव रस्तोगी ने भी इस लॉट को लेने में रूचि नहीं दिखाई. इस पर निदेशक खनन विनय शंकर पांडेय ने 26 अप्रैल को उपनिदेशक खनन, हरिद्वार दिनेश कुमार को प्रणव रस्तोगी की भी विभाग में जमा 98 लाख 50 हजार की धरोहर धनराशि को जब्त कर विभागीय खाते में जमा करने के आदेश दिए.लेकिन, उपनिदेशक दिनेश कुमार ने खनन निदेशक के आदेशों को धता बताते हुए सात मई को 98 लाख, 50 हज़ार की धरोहर राशि चुपचाप प्रणव रस्तोगी को वापस लौटा दी जबकि, ये धनराशि सरकारी खाते में जमा होनी थी. अब विभाग स्पष्टीकरण मांगने जैसी कार्रवाई कर लीपापोती में जुट गया है.

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