भारत और चीन से भी खराब है यूरोप के कुछ देशों की हवा की गुणवत्ता

रिपोर्ट में ब्लॉक में सालाना चार लाख समय पूर्व मौतों के लिये सूक्ष्म कणों, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ग्राउन्ड लेवेल ओजोन के उच्च स्तर को जिम्मेदार ठहराया गया है.

news18 hindi , भाषा
यूरोप की एक नियामक संस्था ने मंगलवार को कहा कि ज्यादातर यूरोपीय संघ के देश ब्लॉक के वायु गुणवत्ता मानदंडों को पूरा करने में विफल रहे हैं और हर दिन 1000 से अधिक यूरोप के लोगों की समय से पहले मौत हो जाती है. सड़क दुर्घटना में मरने वालों की तुलना में यह दस गुना ज्यादा है.यूरोपियन कोर्ट ऑफ ऑडिटर्स (ईसीए) यूरोपीय संघ का एक निकाय है जो इस बात की जांच करता है कि ब्लॉक अपने बजट को कैसे खर्च करता है. ईसीए ने कहा कि बुल्गारिया और अन्य पूर्वी यूरोपीय देशों में स्वास्थ्य पर प्रदूषण का खतरनाक प्रभाव चीन और भारत जैसे एशियाई देशों से भी बदतर है.ईसीए ने कहा कि 28 देशों के समूह में विफलताएं अधिक स्पष्ट हैं क्योंकि यूरोपीय संघ के कुछ दिशा-निर्देश विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा सुझाए गए दिशा-निर्देशों की तुलना में कमजोर हैं.रिपोर्ट तैयार करने वाली लक्जमबर्ग स्थित ईसीए के सदस्य जानुस्ज वोचीचोवस्की ने कहा, "वायु प्रदूषण यूरोपीय संघ में स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा पर्यावरण जोखिम है." उन्होंने कहा, ‘‘हाल के दशकों में, ईयू की नीतियों ने उत्सर्जन में कमी में योगदान दिया है, लेकिन वायु की गुणवत्ता में उस दर से सुधार नहीं हुआ है और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर उसका अब भी अच्छा खासा प्रभाव है.’’रिपोर्ट में ब्लॉक में सालाना चार लाख समय पूर्व मौतों के लिये सूक्ष्म कणों, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ग्राउन्ड लेवेल ओजोन के उच्च स्तर को जिम्मेदार ठहराया गया है. एक चार्ट के जरिए दिखाया गया है कि बुल्गारिया, चेक गणराज्य, लातविया और हंगरी में लोग चीन और भारत की तुलना में प्रदूषण की वजह से अपने जीवन के अधिक साल खोते हैं. भारत और चीन इस मामले में दुनिया का अधिक ध्यान आकर्षित करते रहे हैं.चार्ट में दिखाया गया है कि स्वास्थ्य को नुकसान के मामले में रोमानिया चीन की तुलना में थोड़ा बेहतर है, लेकिन भारत की तुलना में बदतर है. लिथुआनिया और पोलैंड बहुत पीछे नहीं थे.अध्ययन में डब्ल्यूएचओ के 2012 के आंकड़ों का हवाला दिया गया है. जहां बुल्गारिया के हर 100 निवासियों ने स्वस्थ जीवन के तकरीबन ढाई वर्ष खो दिए वहीं हंगरी में यह आंकड़ा 1.8, चीन में 1.7 और भारत में लगभग 1.6 साल है.ये भी पढ़ें: प्रदूषण की रोकथाम में चीन, पाकिस्तान से भी पीछे है भारत

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