Home » Photo Gallery » bihar
News18 हिंदी | June 30, 2022, 18:54 IST

तस्वीरों से जानिये खून की अहमियत! गोपालगंज में निकली रक्तदान पर अनोखी जागरूकता रैली

गोपालगंज. रक्तदान महादान होता है - यह हमसब बोलते सुनते आए हैं, मगर रक्तदान किसी की जिदंगी बचाने के लिए कितना अहम होता है, इसे ढेर सारे लोग नहीं सोचते हैं. ऐसे तमाम लोगों को रक्तदान को लेकर जागरूक करने के लिए गोपालगंज में संत निरंकारी समाज ने भव्य रैली निकाली. बैंड-बाजा और झांकी के साथ निकाली गई आकर्षक जागरूकता रैली देखकर हर किसी की आंखें ठहर जा रही थीं. रक्तदान के लिए गोपालगंज में इस तरह की झांकी पहली बार निकाली गई है. इस रैली के वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं. आइए, तस्वीरों में देखें और समझें रक्तदान के लिए जागरूकता की जरूरत.

1/ 6

बैंड-बाजा और आकर्षक परिधान के साथ रक्तदान के लिए निकाली गई ये जागरूकता रैली आंखों को तो आकर्षित कर रही हैं. लेकिन रक्तदान की जरूरत का अहसास आपको सड़क परिवहन मंत्री नितीन गडकरी की बात से होगा, जिन्होंने बताया था कि हर साल देश में 4 करोड़ 50 लाख सड़क हादसे होते हैं. इन हादसों में डेढ़ लाख लोगों की मौत हो जाती है, जबकि साढ़े चार लाख लोग घायल होते हैं. बता दें कि देश में लॉकडाउन के दौरान सड़क हादसों में रिकॉर्ड कमी दर्ज की गई थी, पर अनलॉक के बाद से दोबारा सड़क हादसों में फिर तेजी आ गई है.

2/ 6

धर्म जोड़ता है, तोड़ता नहीं - जैसे स्लोगन की तख्तियों के साथ गोपालगंज की सड़कों पर रक्तदान के लिए जागरूक करती रैली को लोगों ने खूब पसंद किया. लेकिन क्या आपको पता है कि लॉकडाउन से पहले 2017 और 2018 में सड़क हादसों में कितने लोगों की जान गई? राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में सड़क हादसों में 2018 में 1.52 लाख लोगों की मौत हुई थी. 2017 में यह आंकड़ा 1.50 लाख लोगों का था. सड़क हादसों में मारे गए लोगों में से 54% हिस्सा दोपहिया वाहन सवारों और पैदल चलने वालों का था.

3/ 6

दुर्घटना के शिकार व्यक्ति की मौत खून न उपलब्ध हो पाने की वजह से भी होती है. बता दें कि अंतरराष्ट्रीय सड़क संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में 12.5 लाख लोगों की हर साल सड़क हादसों में जान जाती है. दुनिया भर में वाहनों की कुल संख्या का महज 3% हिस्सा भारत में है, लेकिन देश में होने वाले सड़क हादसों और इनमें जान गंवाने वालों के मामले में भारत की हिस्सेदारी 12.06% है. मुमकिन है कि हमारे रक्तदान करने से इनमें से कुछ प्रतिशत लोगों की जान बच सकती है.

4/ 6

भाईचारे की बात आज के दौर में बेहद जरूरी है. हमारी रगों में दौड़ता एक जैसा खून भी इसी भाईचारे का संदेश देता है. रक्तदान इस भाईचारे में बढ़ोतरी ही करता है. इनसानियत और भाईचारे के अलावा इस खून का न कोई धर्म होता है न कोई मजहब. गोपालगंज में रैली के जरिए निरंकारी समाज द्वारा दिया गया यह संदेश रक्तदान को प्रेरित करेगा, यह उम्मीद की जानी चाहिए.

5/ 6

रक्तदान महादान का संदेश देने के लिए सड़कों पर उतरे लोगों के हाथों में स्लोगन की तख्तियां तो थी ही, वे बैंड धुन बजाते हुए लोगों को रक्तदान की अहमियत भी बताते चल रहे थे. इस जागरूकता रैली में एक झांकी भी बनाई गई थी. इस झांकी में सड़क हादसे के शिकार शख्स को दिखाया गया. साथ ही यह भी कि घायल व्यक्ति को खून की कैसी जरूरत होती है और खून देकर कैसे उसकी जान बचाई जा सकती है.

6/ 6

बता दें कि संत निरंकारी संस्थान की ओर से आज जिला मुख्यालय के कोन्हवा स्थित कार्यालय पर रक्तदान शिविर लगाया गया है. इस शिविर का उद्घाटन डीएम डॉ नवल किशोर चौधरी ने किया. शिविर में 500 से ज्यादा लोगों से रक्तदान कराने का लक्ष्य रखा गया है. इस लक्ष्य को लेकर पूरे शहर में जागरूकता रैली निकाली गई. रक्तदान शिविर में जुटाए गए ब्लड रेड क्रॉस सोसाइटी को सौंप दिया जाएगा. ताकि किसी भी जरूरतमंद को खून आसानी से उपलब्ध हो.