पाकिस्तान पस्त, मोदी खुश

पीएम की आधी चिंता तो दूर हो ही गयी थी। तभी तो सर्जिकल स्ट्राईक के बाद पहली बार पब्लिक प्लेटफार्म पर आए, तो साफ हो गया कि पीएम कितने रिलैक्स्ड थे।

Source: News18Hindi Last updated on: September 30, 2016, 9:50 pm IST
शेयर करें: Share this page on FacebookShare this page on TwitterShare this page on LinkedIn
पाकिस्तान पस्त, मोदी खुश

नई दिल्ली। उरी के हमले ने पीएम नरेंद्र मोदी के सब्र का बांध तोड़ दिया। एक तरफ सेना के मनोबल का ध्यान रखना था तो दूसरी तरफ देश की जनता के बढते गुस्से की भी चिंता थी लेकिन पीएम मोदी ने किसी को निराश नहीं किया। सर्जिकल स्ट्राईक का फैसला लिया। फैसले को सेना ने मुकाम तक पहुंचाया और सभी सैनिक सकुशल वापस लौट आए, तब देश और दुनिया को बताया। पूरे देश ने समर्थन किया। विपक्ष खुल कर समर्थन में सामने आया। जाहिर है पीएम मोदी खासी राहत महसूस कर रहे होंगे। लेकिन ये तो महज एक शुरुआत हुई है।


पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ठिकाने नष्ट करने के बाद सीमा पर तनाव बढ़ गया है। भारतीय सीमा पर बसे गांव खाली कराए जा रहे हैं। तनाव पीएम मोदी और बाकी राजनेताओं के चेहरों पर नजर आना चाहिए था। लेकिन सिर्फ 24 घंटे के बाद ही माहौल बदला-बदला सा नजर आने लगा है। मौका था एंडोसेन सम्मिट का। बड़े बड़े मंत्री, देश भर से आए अधिकारी स्वच्छता अभियान पर पीएम मोदी को सुनने पहुंचे थे। पूरा देश उम्मीद लगाए बैठा था कि पीएम मोदी सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पहली बार बोलने जा रहे हैं तो पाकिस्तान की तो ईंट से ईंट बजा देंगे, पर पीएम मोदी ने दिखा दिया कि वो बोलते नहीं कर के दिखाते हैं। पीएम मोदी के हाव भाव और तेवर तो ऐसे नजर आ रहे थे, मानों कुछ हुआ ही न हो।



जी हां हम बात कर रहे हैं पीएम मोदी के इत्मिनाम से भरी भाव भंगिमा की। स्वच्छ भारत अभियान के 2 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में मोदी बोले और खूब बोले। पाकिस्तान पर एक शब्द नहीं जाया किया और आम आदमी की जिंदगी से जुडे अनुभवों को स्वच्छ भारत से जोड़ कर ऐसे ऐसे लतीफे मारे कि पूरा विज्ञान भवन हंसी से गूंजता रहा। कभी स्वच्छ भारत में रुमाल के टेंडर पर चुटकुले सुनाकर अधिकारियों की चुटकी ली, तो दूसरी तरफ एक आदमी के मूल स्वभाव पर भी ऐसे-ऐसे लतीफे सुनाए कि सब हंस-हंस के लोट पोट हो गए। हरेक चुटकुला ऐसा कि हॉल में बैठा हर शख्स खुद को भी किरदार समझने लगा, पर हर चुटकुले के पीछे स्वच्छ भारत से जुडी एक सीख छिपी थी।


पीएम ने बताया कि कैसे एक व्यक्ति अपने स्कूटर का ख्याल रखता है। सुबह उठ कर बडे जतन से सबसे पहले उसकी सफाई करता है, पर जब वही व्यक्ति घर से निकल कर सरकारी बस में बैठता है और जैसे ही बगल की सीट खाली देखता है, तब उसकी उंगली बरबस सामने वाली सीट के अंदर चली जाती है। फिर पूरे रास्ते सीट की ऐसी की तैसी कर देता है। पीएम ने चुटकुला सुना कर सबकी चुटकी लेते हुए बस इतना ही कहा कि इस हॉल में बैठे सभी लोगों ने कभी न कभी ऐसे सीट जरुर बर्बाद की होगी। सबके चेहरे पर हंसी तो थी लेकिन दिख ये भी रहा था कि वो कभी न कभी ऐसे ड्रामे में किरदार रहे हैं। पीएम ने लगे हाथों सीख भी दे दी कि भाई अगर स्कूटर अपना है तो देश, सरकार और सरकारी चीज भी अपनी होती है, यानि देश को दुरुस्त रखोगे तो घर भी दुरुस्त रहेगा।


दूसरा लतीफा गुजरात का था। पीएम ने अपने पुराने वॉलंटियर वाले दिनों को याद करते हुए कहा कि सालों पहले मोरबी जिले में बाढ़ आयी थी। वो बतौर वोलंटियर काम राहत कार्यों के लिए वहां गए थे। पीएम ने बताया कि उन्होंने वहां महीनों काम किया। फिर वापस लौट गए। पर तीन-चार सालों के बाद किसी के बुलावे पर वहां गए और उस स्कूल में भी गए जहां टॉयलेट का निर्माण उन्होंने बाढ़ राहत के दौरान किया था। इसके बाद मोदी ने कुछ ऐसा कहा कि किसी की हंसी नहीं रुकी। पीएम ने बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि उन्होने देखा कि स्कूल में जहां टॉयलेट बने थे वहां बकरियां बंधीं थी। मोदी के पूछने पर वहां के शिक्षकों ने बताया कि वहां ऐसा ही होता है। सीख यहां भी थी।


पीएम ने कहा कि गंदगी के खिलाफ नफरत का भाव रखना होगा, तभी स्वच्छ भारत अभियान सफल होगा। मोदी ने एक बार फिर अपील की, कि इस आंदोलन को जन आंदोलन बनाए बिना सफलता संभव नहीं। पीएम को खुशी इस बात की भी है कि देश भर में बच्चों और युवाओं ने इस मुद्दे को दिल से जोड लिया है। अब इस अभियान को सफल होने से कोई रोक नहीं सकता। जाहिर है बात स्वच्छता अभियान की हो तो पीएम की बाते बताने में पन्ने भर जाएंगे।


अंत में पीएम मोदी और शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू जब तमाम मुख्यमंत्रियों के साथ फोटों खिंचाने पहुंचें, तो फोटोग्राफरों की अफरा तफरी और बैरियर से बाहर निकलने की कोशिशों को देख कर वैंकेया से रहा नहीं गया। वैंकेया ने भी जुमला कह ही दिया कि कोई सीमा रेखा नहीं लांघे. फिर क्या था पीएम समेत पूरा हॉल हंस पड़ा।


हम बात कर रहे थे पीएम के बॉडी लैंग्वेज की। तनाव तो अंश मात्र का नजर नहीं आ रहा था। दरअसल उरी की घटना के बाद विपक्ष से लेकर जनता के बीच सवाल उठने लगे थे कि आखिर विपक्ष में रह कर बड़ी बड़ी बात करने वाले पीएम कुछ करते क्यों नही।


पीएम ने उरी की घटना के बाद ट्वीट करके कहा था कि देश इसे भूलेगा नहीं। कोझिकोडे में पाकिस्तान से आर-पार के संकेत भी दे दिए थे। मोदी और सरकार के मंत्री बार-बार यही दोहराते रहे कि मोदी सरकार कहती नहीं कर के दिखाती है। आखिरकार पीएम मोदी ने वो फैसला ले ही लिया जो सीमा तक पहुंच कर पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने रोक लिया था। पाकिस्तान की सीमा में घुस कर अड्डे और आतंकियों दोनों को नष्ट किया। दुनिया भर में किसी देश ने उंगली तक नहीं उठायी। जाहिर है पीएम की आधी चिंता तो दूर हो ही गयी थी। तभी तो सर्जिकल स्ट्राईक के बाद पहली बार पब्लिक प्लेटफार्म पर आए, तो साफ हो गया कि पीएम कितने रिलैक्स्ड थे।

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
ब्लॉगर के बारे में
अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हाएक्जूक्यूटिव एडिटर, न्यूज 18 इंडिया.

अमिताभ सिन्हा News18 India के एक्जिक्यूटिव एडिटर हैं. प्रिंट और टीवी पत्रकारिता में पच्चीस साल से ज्यादा का अनुभव है. पटना 'टाइम्स ऑफ इंडिया' से करियर की शुरुआत की और 'आज तक' में तकरीबन 14 साल तक रिपोर्टिंग की. सात साल से नेटवर्क 18 से जुड़े हुए हैं. हिंदी और अंगरेजी भाषाओं में समान अधिकार से लिखने वाले अमिताभ सिंहा ने देश -विदेश के बहुत से महत्वपूर्ण आयोजनों और घटनाओं की रिपोर्टिंग की है. संसदीय पत्रकारिता का लंबा अनुभव है, साथ ही सरकार की नीतियों और योजनाओं पर खास पकड़ रखते हैं. News18 की हिंदी और अंगरेजी दोनों भाषाओं की वेबसाइट पर लगातार लिखते रहते हैं. उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से प्राप्त की है.

और भी पढ़ें
    First published: September 30, 2016, 9:50 pm IST

    टॉप स्टोरीज
    अधिक पढ़ें