चूक या पॉलिटिक्स? PM की सुरक्षा की कीमत पर हुई घटना चिंताजनक

हुसैनीवाला के शहीद स्मारक से 30 किमी दूर आंदोलनकारियों द्वारा रास्ता रोके जाने के बाद प्रधानमंत्री का 20 मिनट तक एक ही फ्लाईओवर पर फंसे रहना पूरी सरकार क्या, पूरे देश को झकझोर गया. आखिर देश के सबसे बड़े और सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा घेरे में रहने वाला प्रधानमंत्री पंजाब में बेबस क्यों हो गया? सुरक्षा अधिकारियों ने पीएम मोदी से बात कर वापस दिल्ली लौटने का फैसला ले लिया.

Source: News18Hindi Last updated on: January 5, 2022, 9:38 pm IST
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चूक या पॉलिटिक्स? PM की सुरक्षा की कीमत पर हुई घटना चिंताजनक
पीएम नरेंद्र मोदी 15-20 मिनट फ्लाईओवर पर फंसे रहे.

हार नहीं मानूंगा, रार नई ठानूंगा

काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूं

गीत नया गाता हूं


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानो अपने आदर्श अटल बिहारी वाजपेयी की ये कविता आत्मसात कर ली है. पंजाब में पीएम मोदी की पहली रैली थी, मौसम खराब था-फिर भी पीएम बठिंडा तक जा पहुंचे. आखिर अस्थिरता से जुझ रहे पंजाब के लिए बड़ी सौगात का ऐलान जो करना था. लेकिन राजनीति या फिर यूं कहें कि राजनेताओं के लिए कोई भी राह आसान नहीं होती. इसलिए हुसैनीवाला के शहीद स्मारक से 30 किमी दूर आंदोलनकारियों के रास्ता रोके जाने के बाद 20 मिनट तक एक ही फ्लाईओवर पर फंसे रहना पूरी सरकार क्या, पूरे देश को झकझोर गया. आखिर देश के सबसे बड़े और सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा घेरे में रहने वाला प्रधानमंत्री पंजाब में बेबस क्यों हो गया? सुरक्षा अधिकारियों ने पीएम मोदी से बात कर वापस दिल्ली लौटने का फैसला ले लिया.


बठिंडा हवाई अड्डे पर पीएम मोदी के चेहरे पर कोई तनाव या शिकन नहीं थी. वहां पंजाब सरकार के अधिकारियों की चुटकी लेते हुए कहा कि अपने सीएम चन्नी को धन्यवाद देना की मैं जिंदा लौट आया. ये दिखाता है पीएम मोदी के व्यक्तित्व के दूसरे पहलू को जिसमें तनाव के क्षणों को हंसी का रंग दे देना ही राजनीति का एक असरदार वार होता है. पीएम मोदी का हास्य व्यंग्य का पुट भी देश को नजर आया. आखिर आम आदमी के हित पूरे करने के लिए शपथ जो ली है इसलिए मुठ्ठीभर आंदोलनकारी एक दिन उनका रास्ता रोक तो पाए लेकिन पीएम मोदी ऐसी मानसिकता को भारी नही पड़ने देंगे और पंजाब की तरक्की में बाधा भी नहीं आने देंगे.


पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक

खराब मौसम के बीच पीएम मोदी बठिंडा पहुंचे तो उन्हें पहले हुसैनीवाला जाना था जहां उन्हें राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि देनी थी. बारिश हो रही थी और धुंध थी इसलिए पीएम ने एयरपोर्ट पर आधे घंटे इंतजार किया. जब ये तय हो गया कि हेलिकाप्टर अब नहीं उडेगा, तब ये तय किया गया कि पीएम मोदी अब सड़क के रास्ते से हुसैनीवाला जाएंगे. वहां पहुंचने में 2 घंटे लगने थे.


गृह मंत्रालय के मुताबिक जब राज्य के पुलिस महानिदेशक से अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हरी झंडी मिल गयी तो पीएम मोदी का काफिला निकल पड़ा. हुसैनीवाला से 30 किमी पहले एक प्लाईओवर के ऊपर जब पीएम का काफिला पहुंचा तो पाया कि नीचे का रास्ता आंदोलनकारियों ने रोका हुआ है. पीएम मोदी वहां 15-20 मिनट अपनी गाड़ी में बैठे रहे. और सुरक्षा बल चौकस कि कोई अनहोनी घटना न हो जाए.


गृह मंत्रालय का कहना है कि जब पीएम मोदी की यात्रा का प्लान पंजाब की सरकार को पहले ही भेजा जा चुका था तो नियमों के मुताबिक उन्हें सुरक्षा के तमाम इंतजाम करने ही थे जिसमें एक वैकल्पिक रूट भी तैयार रखना होता है. किसी मुश्किल वक्त के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने होते हैं जो सड़क यात्रा को सुरक्षित रखने के लिए होते हैं. लेकिन न कोई वैकल्पिक रूट तैयार था और ना ही अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती हुई थी. इसलिए गृह मंत्रालय ने इसका गंभीरता से संज्ञान लेते हुए इस सुरक्षा में चूक पर पंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को कहा है कि वो जिम्मेदारी तय करें और कड़ी कार्रवाई करें.


क्या पंजाब सरकार ने सुरक्षा से समझौता किया?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया जबकि पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी ने उनकी सुरक्षा में लगी एसपीजी को आश्वासन दिया था कि रास्ता पूरी तरह साफ है. परिपाटी के मुताबिक पीएम जब भी किसी राज्य के दौरे पर होते हैं तो वहां के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी उनके स्वागत के लिए मौजूद होते हैं और उनके साथ ही यात्रा करते हैं.


लेकिन सूत्रों के मुताबिक ये तीनों पीएम के स्वागत में एयरपोर्ट पर नहीं थे. जबकि मुख्य सचिव और डीजीपी की कारें पीएम मोदी के काफिले का हिस्सा भी थीं. इसलिए दिल्ली में सरकारी सूत्रों का कहना है कि क्या पंजाब के इन शीर्ष अधिकारियों को पता था कि पीएम मोदी की सड़क यात्रा पर क्या होने वाला है, इसलिए वो नदारद रहे?


क्या आंदोलनकारियों का पीएम के रास्ते पर उतरना किसी साजिश का हिस्सा था?

हुसैनीवाला से तीस किमी पहले फ्लाईओवर पर जो हुआ वो एक चकित करने देने वाला दृश्य था जिसमें पंजाब पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच सांठ-गांठ साफ नजर आ रही थी. केवल पंजाब पुलिस ही जानती थी कि पीएम का सही रूट क्या है फिर भी रास्ते में वे आंदोलनकारी कैसे पहुंच गए? सरकारी सूत्रों के मुताबिक पुलिस का ऐसा व्यवहार पहले कभी नजर नहीं आया था.


ये पिछले कुछ सालों में पीएम की सुरक्षा में हुई सबसे बड़ी चूक है. देर शाम केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी सामने आयीं. स्मृति ईरानी ने कहा कि कांग्रेस के खूनी इरादे नाकाम रहे. स्मृति ईरानी के पूछा कि पीएम मोदी के सड़क यात्रा के रुट के बारे में सिर्फ पंजाब पुलिस को पता था फिर पंजाब सरकार के अंदर से किसने रास्ते के बारे में जानकारी लीक की? स्मृति ईरानी ने सवाल उठाया कि आखिर पंजाब के डीजीपी ने पीएम मोदी की सड़क यात्रा को हरी झंडी क्यों दी? ऐसे तमाम सवाल हैं जो किसी साजिश की ओर ही इशारा कर रहे हैं.


सुरक्षा मामलों और छापामार लड़ाई की समझ रखने वाले जानते हैं कि किस तरह से हाई वैल्यू टारगेट्स को संकरे रास्ते पर फंसाकर हिट किया जाता है. और जब फ्लाईओवर पर फंसा एक बड़ा हाई प्रोफाईल कॉनवॉय इस प्रकार की गतिविधियों को अंजाम देने के लिए उपयुक्त स्थान होता है क्योंकि लंबा कॉनवॉय रास्ता बंद होने के कारण आगे नहीं जा सकता और तेजी से पीछे भी नहीं हट सकता. पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक इसलिए भी चिंताजनक है कि ये है कि घटना पंजाब की है जिसने आंतक की मार को झेला है और किसान आंदोलन के समय से खालिस्तान समर्थन मुंह उठाने भी लगे हैं. इसलिए इस मामले को यूं रफा-दफा नहीं किया जा सकता. जिम्मेदारी तय करनी जरूरी है.


अमरिंदर बनाम चन्नी

कैप्टन अमरिंदर सिंह भले ही आज बीजेपी के पाले में हों लेकिन जब तक पंजाब सीएम रहे पीएम मोदी के धुर विरोधी रहे. जब तक रहे पीएम मोदी ने तमाम रैलियां की पर कभी कोई अड़चन नहीं आयी. आज उन्होंने सीएम चन्नी के इस्तीफे की मांग कर डाली. कैप्टन अमरिंदर सिंह ट्वीट कर के कहते हैं कि पंजाब में कानूंन व्यवस्था पूरी तरह से फेल हो चुकी है. अगर पाकिस्तान की सीमा से 10 किमी अंदर प्रधानमंत्री को आप सुरक्षित रास्ता नहीं दे सकते तो फिर आपका सत्ता में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है.


सीएम चन्नी ने भी सामने आकर सफाई दी कि अखिरी वक्त रूट बदलने से दिक्कतें तो आएंगी ही लेकिन मसला पीएम की सुरक्षा से जुड़ा है इसलिए चन्नी की कांग्रेस सरकार निशाने पर आ ही गयी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुनिल जाखड़ ने भी चन्नी पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया और कहा कि आज जो हुआ वो स्वीकार नहीं किया जा सकता. ये पंजाबियत के खिलाफ है. पीएम को बीजेपी की रैली के फिरोजपुर जाने के लिए एक सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करना चाहिए था. लोकतंत्र ऐसे काम करता है.


कांग्रेस पर सवाल

बीजेपी आलाकमान की त्योरियां इसलिए चढ़ गयीं क्योकि कांग्रेस के युवा नेता बीवी श्रीनिवास ने इस घटना के तुरंत बाद एक ट्वीट कर सुरक्षा में हुई इस चूक का मजाक बनाने की कोशिश की. श्रीनिवास ने पूछा मोदीजी हाउ इज द जोश. दूसरी तरफ कांग्रेस के नेता विडियो डाल कर ये साबित करने की कोशिश करते रहे कि रैली स्थान खाली था इसलिए पीएम मोदी वापस लौट गए. ये वही कांग्रेस है जिसने अपने दो शीर्ष नेताओं को सुरक्षा में चूक की वजह से ही खोया है. बीजेपी नेताओं के मुताबिक कांग्रेस की पीएम मोदी के प्रति तल्खी जगजाहिर है लेकिन सुरक्षा का मामला गंभीरता से लेना चाहिए था.


गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि पंजाब में कांग्रेस द्वारा बनायी गयी ये घटना इस बात का ट्रेलर है कि कांग्रेस कैसे सोचती है और कैसे काम करती है. इसलिए जो उन्होंने पीएम मोदी के साथ किया है उसके लिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम मोदी की सुरक्षा में जिस तरह की लापरवाही बरती गयी है वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है. राजनीतिक मतभेद के कारण पीएम जैसे संवैधानिक पद की सुरक्षा को ताक पर रखना कांग्रेस की अलोकतांत्रित सोच और उनकी मानसिकता का परिचायक है.


पीएम मोदी खुद ही सुरक्षा के ताम झाम से बचने की कोशिश करते हैं ताकि आम जनता को परेशानी नहीं उठानी पड़े. लेकिन सच्चाई तो यही है कि पीएम नरेन्द्र मोदी पर खतरा बहुत ज्यादा है. इसलिए राज्य सरकार जिसकी भी हो उसे ऐसी लापरवाही से बचना पड़ेगा. आखिर प्रधानमंत्री देश का होता है और उसकी सुरक्षा में दलगत राजनीति आडे़ नहीं आनी चाहिए.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
ब्लॉगर के बारे में
अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हाएक्जूक्यूटिव एडिटर, न्यूज 18 इंडिया.

अमिताभ सिन्हा News18 India के एक्जिक्यूटिव एडिटर हैं. प्रिंट और टीवी पत्रकारिता में पच्चीस साल से ज्यादा का अनुभव है. पटना 'टाइम्स ऑफ इंडिया' से करियर की शुरुआत की और 'आज तक' में तकरीबन 14 साल तक रिपोर्टिंग की. सात साल से नेटवर्क 18 से जुड़े हुए हैं. हिंदी और अंगरेजी भाषाओं में समान अधिकार से लिखने वाले अमिताभ सिंहा ने देश -विदेश के बहुत से महत्वपूर्ण आयोजनों और घटनाओं की रिपोर्टिंग की है. संसदीय पत्रकारिता का लंबा अनुभव है, साथ ही सरकार की नीतियों और योजनाओं पर खास पकड़ रखते हैं. News18 की हिंदी और अंगरेजी दोनों भाषाओं की वेबसाइट पर लगातार लिखते रहते हैं. उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से प्राप्त की है.

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First published: January 5, 2022, 9:38 pm IST
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