आखिर क्यों है किसानों को मजबूत करने वाले कानूनों का विरोध

Farm Laws: सरकार ने बिचौलियों से बचने और किसानों को बाजार तक सीधा पहुंचाने के लिए ये कृषि बिल बनाये हैं. इस कानून में साफ लिखा है कि किसान की जमीन पर कब्जा गैर कानूनी होगा.

Source: News18Hindi Last updated on: January 16, 2021, 9:08 pm IST
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आखिर क्यों है किसानों को मजबूत करने वाले कानूनों का विरोध
सरकार ने बिचौलियों से बचने और किसानों को बाजार तक सीधा पहुंचाने के लिए ये कृषि बिल बनाये हैं. (प्रतीकात्‍मक फोटो-AP)
सब्जियों की कीमत बढ़ी हुई है. हर साल हम पाते है कि दिल्ली जैसे शहरों में बैठे हम जैसे लोग महंगी सब्जी या अनाज खरीदने से पीछे नहीं रहते, चाहे कीमत आसमान क्यों न छूने लगे. प्याज या टमाटर हो या फिर इस साल आलू जिसकी कीमत 50 रुपये प्रति किलो से ज्यादा पहुंच जाती है फिर भी उपभोक्ता वो कीमत अदा कर रहे हैं. लेकिन, दूसरी तरफ खबर ये भी आती है कि दूर महाराष्ट्र के लासलगांव में उचित कीमत न मिल पाने के कारण प्याज के किसान मंडी में प्याज फेंक कर चले गये. इस साल कई किसानों ने अपनी गोभी की फसल पर ट्रैक्टर चला दिए क्योंकि उन्‍हें कीमत नहीं मिल रही थी. यानी व्यापारियों की ख़रीद मिट्टी के मोल और बेचना उस मुनाफे पर जिसमें उनके वारे न्यारे हो जाएं.



एक अनुमान के मुताबिक, रबी और खरीफ फसलों का कम से कम 30 फीसदी हिस्सा तो सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य देकर खरीद लेती है. यानी एमएसपी भी एक नियमित अभ्यास है जो बन्द नहीं हुआ है. जाहिर है जिन किसानों ने एमएसपी के तहत नहीं बेची होगी वो निजी व्यापारियों के माध्यम से बाज़ार पहुंच जाती है.



आखिर कौन है इस विसंगति के पीछे. किसानों की फसल बाजार तक पहुंचाने वाला व्यापारी मजे में क्यों है? अगर इसी पर किसान मंथन कर लें तो साफ हो जाएगा कि दिल्ली की सीमा पर बैठा किसान है या फिर मंडियों में किसान की वेश में बैठा व्यापारी. और उनकी मदद कर रहे वो राजनेता जो खुद ही बड़े किसान होने का दम भरते हैं. बाजार समीतियों की स्थापना भी इसी लिए हुई थी कि किसानों को एक निश्चित बाजार की कीमत मिलती रहे. लेकिन मंडी में बैठे लोगों ने इसे व्यापार बना दिया. पंजाब में तो आढ़ती रूपी किसान इतने अमीर हो गए जो करोड़ों का धंधा अनाज से ही कर रहे हैं और गांव का किसान अभी भी फसल लेकर मंडियों में कतार में खड़ा पाया जा रहा है.



सरकार ने बिचौलियों से बचने और किसानों को बाजार तक सीधा पहुंचाने के लिए ये कृषि बिल बनाये हैं. इस कानून में साफ लिखा है कि किसान की जमीन पर कब्जा गैर कानूनी होगा. सरकार एमएसपी को लेकर भी बात करने को तैयार है. लेकिन बात करने को कोई तैयार नही है. कांग्रेस हो या लेफ्ट सबको लग रहा है कि मोदी सरकार को घेरने का मौका हाथ लगा है तो लगे हाथो इस आग में और घी डाल दो. सीमा पर बैठे किसान एक ही सूर अलाप रहे हैं कि बिल वापस लो.



आखिर क्या चाहते हैं ये किसान? क्या ये नहीं चाहते कि गांव का किसान सीधा अपनी फसल को व्यापारी को बेचे. क्या इन्होंने नए कानून के प्रावधानों को ठीक से समझा नहीं है? क्या कारण है कि दिल्ली की सीमा पर बैठा हर किसान सिर्फ क़ानून वापस लेने की बात कर रहा है? क्या पंजाब से आये इन किसानों के आका फिर से पुराने इंस्पेक्टर राज में वापस जाना चाहते हैं? अगर कांग्रेस को इतनी दिक्कत है तो अपने राज्यों खास कर पंजाब विधानसभा से इस कानून को खारिज कर दिल्ली भेज सकते है. वैसे भी कृषि conconcurrent लिस्ट में है. लेकिन कांग्रेस ऐसा भी नहीं कर रही.



कृषि सुधार ही ऐसा बचा था जो देश की आत्मा और अन्नदाता माने जाने वाले किसानों को दशकों पुरानी दास्‍ता से मुक्त कराता. पीएम मोदी का सपना है किसान अपने लिए और बाज़ार के हिसाब से खेती करें ताकी उसकी आमदनी दोगुनी हो. लेकिन, 45 दिनों से ज्यादा और 10 दौर की बातचीत के बाद भी मसला हल नहीं हुआ है. जाहिर है जब इतिहास बदलने वाले सुधार होते हैं तो हलचल होती ही है. इसलिए पीएम मोदी और उनकी सरकार आंदोलन को लेकर वो लचीलेपन अपना रही है ताकि किसानों को कृषि बिल के फायदे नज़र आ जाएं और उनकी आशंकाओं को भी दूर किया जा सके. (यह लेखक के निजी विचार हैं.)
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
ब्लॉगर के बारे में
अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हाएक्जूक्यूटिव एडिटर, न्यूज 18 इंडिया.

अमिताभ सिन्हा News18 India के एक्जिक्यूटिव एडिटर हैं. प्रिंट और टीवी पत्रकारिता में पच्चीस साल से ज्यादा का अनुभव है. पटना 'टाइम्स ऑफ इंडिया' से करियर की शुरुआत की और 'आज तक' में तकरीबन 14 साल तक रिपोर्टिंग की. सात साल से नेटवर्क 18 से जुड़े हुए हैं. हिंदी और अंगरेजी भाषाओं में समान अधिकार से लिखने वाले अमिताभ सिंहा ने देश -विदेश के बहुत से महत्वपूर्ण आयोजनों और घटनाओं की रिपोर्टिंग की है. संसदीय पत्रकारिता का लंबा अनुभव है, साथ ही सरकार की नीतियों और योजनाओं पर खास पकड़ रखते हैं. News18 की हिंदी और अंगरेजी दोनों भाषाओं की वेबसाइट पर लगातार लिखते रहते हैं. उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से प्राप्त की है.

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First published: January 16, 2021, 9:08 pm IST