द्रविड़ नायकों का सम्मान भी राजनीतिक होड़ का शिकार

तमिलनाडु की पलानीस्वामी सरकार ने द्रविड़ अस्मिता के नायक और तमिलनाडु के पहले मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरै और दो अन्य मुख्यमंत्रियों एमजीआर व जयललिता के नाम पर चेन्नई मेट्रो स्टेशनों का नामकरण करके जबरदस्त राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया है.

Source: News18Hindi Last updated on: August 2, 2020, 11:52 AM IST
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द्रविड़ नायकों का सम्मान भी राजनीतिक होड़ का शिकार
तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति.
तमिलनाडु की एडापड्डी पलानीस्वामी सरकार ने द्रविड़ अस्मिता के नायक और तमिलनाडु के पहले मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरै और दो अन्य मुख्यमंत्रियों एमजीआर व जयललिता के नाम पर चेन्नई मेट्रो स्टेशनों का नामकरण करके जबरदस्त राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया है. विवाद की जड़ मेट्रो नामकरण अभियान में पलानीस्वामी द्वारा अन्नादुरै के साथी और द्रविड़ राजनीति के स्तंभ रहे पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की अनदेखी है. अन्ना के बाद तमिलनाडु की राजनीति में करुणानिधि दूसरे सबसे अधिक लोकप्रिय व प्रभावशाली राजनेता सिद्ध हुए. उनका निधन जयललिता के देहांत के पौने दो साल बाद सात अगस्त 2018 को 94 साल की उम्र में हुआ. इस प्रकार करुणानिधि उपरोक्त तीनों मुख्यमंत्रियों से कहीं अधिक समय, आठ दशक तक राजनीति में सक्रिय रहे. इसके बावजूद अन्ना द्रमुक सरकार द्वारा राजनीतिक पक्षपात का विरोध होना स्वाभाविक है.

सरकारी आदेश के अनुसार अलंदुर मेट्रो स्टेशन का नाम अब अलैनर अन्ना अलंदुर स्टेशन हो गया. इसी तरह सेंट्रल मेट्रो का नाम अब पुराची तलैवर डॉ एमजी रामचंद्रन सेंट्रल मेट्रो स्टेशन हो गया. सीएमबीटी स्टेशन का नाम अब पुराची तलैवी डॉ जे जयललिता सीएमबीटी मेट्रो स्टेशन हो गया मगर कलैनर एम करुणानिधि का नाम सिरे से गायब है. अन्नादुरै मद्रास और तमिलनाडु में कुल मिलाकर सवा दो साल, एमजीआर 10 साल और जयललिता 14 साल तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं. करुणानिधि इन सबसे अधिक करीब दो दशक तक राज्य के पांच बार मुख्यमंत्री, 13 बार विधायक और पूरे पांच दशक द्रमुक के अध्यक्ष रहे. गठबंधन सरकारों को समर्थन देकर उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी पूरा दखल रखा.

इसके बावजूद मुख्यमंत्री पलानीस्वामी द्वारा नामकरण करते हुए अन्नादुरै,अन्ना द्रमुक के संस्थापक एमजी रामचंद्रन और पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के नाम तो याद रखे गए मगर द्रमुक के संस्थापकों में शामिल एम करुणानिधि को भूल गए. यह क्षुद्र राजनीति की ज्वलंत मिसाल है. वैसे मुख्यमंत्री मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने का आधार उच्चस्तरीय समिति की सिफारिश बता रहे हैं मगर द्रमुक समर्थक उनकी नीयत पर सवाल कर रहे हैं. करुणानिधि की पार्टी डीएमके यानी द्रविड़ मुनेत्र कषगम आज भी तमिलनाडु का सबसे प्रभावशाली राजनीतिक दल है. विपक्षी दल होने के बावजूद साल 2019 के आम चुनाव में द्रमुक ने करुणानिधि के बेटे स्टालिन के नेतृत्व में राज्य की 39 लोकसभा सीट में से 38 सीट जीत कर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बखूबी जता दी है.

अन्नादुरै 60 साल में, जयललिता 68 साल में और एमजी रामचंद्रन 70 साल की उम्र में दुनिया से रुखसत हो गए. इन सबके मुकाबले करुणानिधि ने 94 साल की उम्र में अपने इंतकाल तक सात दशक से अधिक समय द्रविड़ राजनीति की. ऐसे में सवाल तो किया जाएगा क्योंकि करुणानिधि सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि अन्नादुरै के दाहिने हाथ भी थे. इसीलिए अन्ना के निधन के बाद उन्हें ही मुख्यमंत्री और द्रमुक का मुखिया बनाया गया था. एमजीआर भी फिल्म जगत में करुणानिधि के ही साथी थे. करुणानिधि रूढ़ियों के खिलाफ अधिकतर सुधारवादी फिल्में लिखते थे और एमजीआर उन पर जीवंत अभिनय करते थे.
बाद में एमजीआर ने करुणानिधि से मनमुटाव के कारण द्रमुक तोड़कर अन्ना द्रमुक पार्टी बनाई और चुनाव जीत कर मुख्यमंत्री बने. जयललिता भी फिल्मों में एमजीआर की हीरोइन की भूमिका करती थीं. धीरे—धीरे वे एमजीआर की इतनी करीबी हो गईं कि जनता ने उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी जयललिता को ही कुबूल किया. एमजीआर की मृत्यु के बाद 1987 में उनके शववाहन से जयललिता को जबरन नीचे उतार कर अपमानित किया गया था. उनकी जगह तमिलनाडु का मुख्यमंत्री भी एमजीआर की पत्नी वी जानकी को ही बनाया गया था. इसके बावजूद पार्टी की बागडोर अंतत: जयललिता के ही हाथों में आई और बाद में चुनाव जीतकर अन्ना द्रमुक ने उन्हीं के नेतृत्व में सरकार बनाई

जयललिता का दिसंबर 2016 में निधन हो गया था और मुख्यमंत्री पलानिस्वामी खुद को उन्हीं का पादुका सेवक बताकर उनके नेतृत्व में अन्ना द्रमुक द्वारा बनाई गई सरकार चला रहे हैं. जयललिता के बीमार पड़ने पर ओ पन्नीरसेल्वन को मुख्यमंत्री बनाया गया था मगर उनकी मृत्यु के बाद अन्ना द्रमुक में फूट पड़ गई. जयललिता की सेविका रही ससिकला नटराजन ने पन्नीरसेल्वन को पार्टी से निकाल कर खुद को महासचिव तथा पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री घोषित बना दिया. ससिकला को जयललिता के साथ आय से अधिक संपत्ति जमा करने के मामले में साल 2017 में चार साल कैद की सजा हो गई.

कर्नाटक की जेल में बंद ससिकला को पार्टी से निकाला जा चुका है. अलबत्ता उनके भतीजे दिनाकरण अम्मा मक्कल पार्टी बनाकर राजनीति में सक्रिय हैं. ससिकला के जेल जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दखल पर पन्नीरसेल्वम को पार्टी में शामिल करके उपमुख्यमंत्री तथा अन्ना द्रमुक का समन्वयक बनाया गया. जयललिता को हमेशा के लिए अन्नाद्रमुक का महासचिव घोषित करके पलानीस्वामी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बरकरार हैं. साल 2019 के आम चुनाव में अन्ना द्रमुक का सूपड़ा साफ होने से जाहिर है कि जयललिता के बाद उसका भविष्य अनिश्चित है जबकि स्टालिन के नेतृत्व में द्रमुक की पैठ बरकरार है.करुणानिधि के तीन बच्चे-एम के स्टालिन, एम के अलागिरि और कनिमोणी राजनीति में सक्रिय हैं. करूणानिधि का राजनीतिक सफर महज 14 बरस की उम्र में हिंदी विरोधी आंदोलन के साथ ही शुरू हुआ था. उन्होंने अपने साथी छात्रों के साथ द्रविड़ आंदोलन का पहला युवा संगठन‘ तमिल मनावर मंदरम’ बनाया. उन्होंने पहला बड़ा राजनीतिक मोर्चा साल 1953 में कल्लुकुड़ी कस्बे का नाम बदल कर डालमियापुरम किए जाने के खिलाफ निकाला था जिसमें दो लोग मारे गए थे. आंदोलन में करूणानिधि गिरफ्तार हुए और अपनी भाषण कला, व्यंग्यात्मक शैली के कारण अवाम में जल्द ही धारदार नेता के रूप में पैठ गए. उन्होंने अधिकतर फिल्में सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ वाली लिखीं जिनमें द्रविड़ विचारधारा की तार्किक बातों पर जोर रहा.

इस लिहाज से ''पराशक्ति'' फिल्म को उनका द्रविड़ मेनीफेस्टो माना जाता है जिसने तमिल सिनेमा की शक्ल बदल दी और करूणानिधि को राजनीतिक लाभ पहुंचाया. जयललिता और करूणानिधि की मृत्यु और बीजेपी द्वारा पैर पसारने की बढ़ती महत्वाकांक्षा से तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति का भविष्य सवालों के घेरे में है. इसके बावजूद मुख्यमंत्री पलानीस्वामी द्वारा द्रविड़ राजनीति के पुरोधाओं के बीच ही खुलेआम भेदभाव किया जाना क्या द्रविड़ राजनीति को कमजोर नहीं करेगा? (लेखक वरिष्ठ स्तंभकार है. लेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं.)
ब्लॉगर के बारे में
अनंत मित्तल

अनंत मित्तलवरिष्ठ पत्रकार

लेखक वरिष्ठ पत्रकार,लेखक,अनुवादक हैं. प्रिंट, रेडियो, टीवी एवं डिजिटल पत्रकारिता का लंबा अनुभव. जनसत्ता, नवभारत टाइम्स, पीटीआई भाषा, दूरदर्शन आदि समूहों में संपादन, रिपोर्टिंग,प्रोडक्शन संबंधी कार्य किया है.

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First published: August 2, 2020, 11:20 AM IST
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