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OPINION: शशिकला बनेंगी तमिल राजनीति का केंद्र! साथ जाने को लेकर ऊहापोह में BJP-AIADMK

वीके शशिकला (VK Sasikala) भ्रष्टाचार की सजा काटकर 27 जनवरी को जेल से रिहा हुईं. शशिकला की अब न तो 2017 जैसी राजनैतिक हैसियत बची है और न ही रहने को ठिकाना. फिर भी RSS के वरिष्ठ सलाहकार एस गुरुमूर्ति ने अन्नाद्रमुक (AIADMK) एवं बीजेपी (BJP) को उनसे संबंध बनाए रखने की सलाह दी है.

Source: News18Hindi Last updated on: January 28, 2021, 10:35 AM IST
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OPINION: शशिकला बनेंगी तमिल राजनीति का केंद्र! साथ जाने को लेकर ऊहापोह में BJP-AIADMK
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी की अगुवाई वाली सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक ने कई बार कहा है कि शशिकला को पार्टी में दोबारा शामिल करने की कोई गुंजाइश नहीं है. फाइल फोटो
‘बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले’. चार साल पहले तक एडापड्डी पलानिस्वामी को मुख्यमंत्री बनाकर तमिलनाडु (Tamil Nadu) में किंगमेकर एवं सबसे शक्तिशाली राजनीतिक शख्सियत रहीं वीके शशिकला (VK Sasikala) पर यह शेर सही बैठता है. भीषण भ्रष्टाचार की सजा काटकर पूरे चार साल बाद 27 जनवरी को बेंगलुरू जेल से रिहा हुईं  शशिकला की अब न तो 2017 जैसी राजनैतिक हैसियत बची है और न ही रहने को ठिकाना. उनकी पसंद पलानिस्वामी (Edappadi Palaniswami) तो अब भी मुख्यमंत्री हैं मगर शशिकला की अब अन्नाद्रमुक (AIADMK) में कोई जगह नहीं है. उपमुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वन (O Panneerselvam) हैं जिन्हें पार्टी की महासचिव शशिकला ने कान पकड़ के बाहर कर दिया था. पोएस गार्डन का वह आलीशान बंगला जिस पर दिसंबर 2016 में जयललिता की मृत्यु के बाद शशिकला ने कब्जा कर लिया था अब ‘पुराची तलैवी’ का सरकारी स्मारक है.

शशिकला फिलहाल कोविड-19 संक्रमण के कारण बेंगलुरू के विक्टोरिया अस्पताल में भर्ती रहेंगीं. ताज्जुब यह कि उनके चेन्नई लौटने से पहले ही जयललिता की विरासत पर कब्जे की होड़ शुरू हो गई. मुख्यमंत्री पलानिस्वामी ने उनकी रिहाई के दिन 27 जनवरी को ही जे जयललिता के भव्य, विशाल स्मारक का उद्घाटन कर दिया. समारोह में ओ पन्नीरसेल्वन  सहित उनका समूचा मंत्रिमंडल, पार्टी पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तथा आम लोग शामिल हुए. हालांकि शशिकला के भतीजे एवं अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम के कर्ताधर्ता टीटीवी दिनाकरन ने इसे शशिकला का अगवानी महोत्सव ही बता दिया. राजनीति में शशिकला का प्रभाव इसी बात से सिद्ध है कि तुगलक पत्रिका के संपादक एवं आरएसएस के वरिष्ठ सलाहकार एस गुरूमूर्ति ने अन्नाद्रमुक एवं बीजेपी (BJP) को उनसे संबंध बनाए रखने की सलाह दी है. उनके अनुसार आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता की प्रबल दावेदार द्रमुक को हराने के लिए शशिकला को साथ रखना जरूरी है.

जयललिता के काल में भी शशिकला की समानांतर सत्ता थी. पार्टी काडर एवं नेता उन्हें ‘चिनम्मा’ यानी छोटी मां पुकारते तथा उनकी बात का मान रखते थे. शशिकला थेवर समुदाय की हैं जिसका भारी समर्थन एमजीआर के बाद भी अन्नाद्रमुक को उनके कारण मिलता रहा है. थेवर तमिलनाडु की प्रभावशाली अन्य पिछड़ी जाति है जिसके नाराज होने पर अन्नाद्रमुक को सत्ता से हाथ धोने पड़ सकते हैं. थेवरों के सर्वोच्च नेता यू मुथुरामलिंगम थेवर माने जाते हैं. उन्हीं की जयंती 30 अक्टूबर को तमिलनाडु में थेवर जयंती के रूप में मनाया जाता है. मुथुरामलिंगम स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनेता थे. तीन उपजातियों-मारावर, कल्लार एवं अगमुदैयार- को मिलाकर थेवर समुदाय बनता है. अधिकतर दक्षिण तमिलनाडु में बसे थेवर अन्नाद्रमुक के बड़े समर्थक हैं. हालांकि ओ पन्नीरसेल्वन भी थेवर ही हैं और पलानिस्वामी उनके समुदाय के वोट पाने को उन्हें उपयोगी मान रहे हैं मगर शशिकला के आगे वे फीके पड़ते हैं.

इसलिए सुगबुगाहट यह भी है कि बीजेपी के दबाव में पलानिस्वामी अम्मा मक्कल से गठबंधन को तैयार हैं बशर्ते चिनम्मा पार्टी से दूर रहें. साल 2019 के आम चुनाव में अम्मा मक्कल को चार फीसद वोट मिले थे जो अन्नाद्रमुक को मिले वोटों का 15 फीसद थे. इसी वजह से पलानिस्वामी द्वारा अन्नाद्रमुक अध्यक्ष मंडल से खुद को चुनाव में मुख्यमंत्री उम्मीदवार पहले ही घोषित करवा लिया. उन्होंने शशिकला से राबता करने वाले पार्टी पदाधिकारी को बर्खास्तगी की चेतावनी दे दी है. इसके बावजूद चिनम्मा के चेन्नई आने पर अन्नाद्रमुक कार्यकताओं की प्रतिक्रिया की भविष्यवाणी मुश्किल है. यदि उनके स्वागत में कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा तो फिर नेताओं को उनके दरबार में हाजिरी लगाते क्या देर लगेगी? जरा याद कीजिए कि एमजीआर की मृत्यु के बाद उनके शववाहन से धक्के मार कर नीचे उतारी गईं जयललिता आखिरकार अन्नाद्रमुक की नेता बन कर 14 साल मुख्यमंत्री रहीं. उसे हासिल करने को उन्हें संघर्ष तो करना पड़ा मगर फिर मरते दम तक वे जनता की ‘अम्मा’ ही कहलाईं.
चिनम्मा की जेल यात्रा के दौरान तमिलनाडु की राजनीति बहुत बदल गई. अन्नाद्रमुक के प्रबल प्रतिरोधी एम करूणानिधि भी अगस्त 2018 में दुनिया छोड़ चुके. उनके छोटे बेटे स्टालिन ही अब द्रमुक के सर्वेसर्वा हैं. उनका गठबंधन 2019 में लोकसभा की सभी 38 सीट जीत चुका. इसलिए विधानसभा चुनाव में द्रमुक को सत्ता का स्वाभाविक दावेदार समझा जा रहा है. हालांकि इस बीच लोकप्रिय फिल्म स्टार कमल हासन भी जयललिता एवं करूणानिधि रहित राजनीतिक मैदान में मक्कल नीधी मय्यम पार्टी बनाकर खम ठोक रहे हैं. उनकी पार्टी भी लोकसभा चुनाव में करीब साढ़े तीन फीसद वोट पा चुकी. तलैवा रजनीकांत राजनीति में घुसने का एलान करके अपने पांव पीछे खींच चुके. इसके लिए उन्होंने अपनी सेहत को कारण बताया है. अदालत द्वारा जे दीपा और उनके भाई को जयललिता का वैध वारिस घोषित किया जा चुका. इसलिए अब वही दोनों अपनी बुआ की सारी संपत्ति के मालिक होंगे. दीपा ने पोएस गार्डन की कोठी पर कब्जे के लिए भी दरख्वास्त लगा रखी है. दीपा ने दिसंबर 2017 में जयललिता के विधानसभा क्षेत्र आरके नगर से उपचुनाव भी लड़ा था.

माना यह जा रहा है कि शशिकला को यदि अन्नाद्रमुक ने रत्ती भर भी भाव नहीं दिया तो वे अम्मा मक्कल के जरिए राज्य में तीसरा मोर्चा बनाने से गुरेज नहीं करेंगी. अन्नाद्रमुक के दो सहयोगियों रामदौस की पीएमके एवं विजयकांत की एमडीएमके भी उसमें शामिल हो सकते हैं. उधर कमल हासन ने भी असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम यानी मजलिस से गठबंधन का शिगूफा छोड़ा हुआ है. चुनाव के मौके पर अपने गठबंधनों में वांछित सीट नहीं मिलने पर अन्य दल भी उनके मोर्चे में शामिल हो सकते हैं. कुल मिलाकर शशिकला का रिहा होना तमिलनाडु ही नहीं, बीजेपी के कारण देश की राजनीति की भी बड़ी घटना है. देखना यही है कि वे चेन्नई पहुंच कर नए सिरे से राजनीतिक बिसात बिछाएंगी अथवा अन्नाद्रमुक पर दोबारा कब्जा करके सत्ता और द्रविड़ राजनीति में अपना मुकाम पक्का करेंगी? (डिस्क्लेमर: यह लेखक के निजी विचार हैं.)
ब्लॉगर के बारे में
अनंत मित्तल

अनंत मित्तलवरिष्ठ पत्रकार

लेखक वरिष्ठ पत्रकार,लेखक,अनुवादक हैं. प्रिंट, रेडियो, टीवी एवं डिजिटल पत्रकारिता का लंबा अनुभव. जनसत्ता, नवभारत टाइम्स, पीटीआई भाषा, दूरदर्शन आदि समूहों में संपादन, रिपोर्टिंग,प्रोडक्शन संबंधी कार्य किया है.

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First published: January 28, 2021, 10:35 AM IST
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