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अपनों से ही जूझ रही हैं कांग्रेस सरकारें...

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह भी मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की राह पर चल पड़े हैं! इससे पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह कई बार आमने-सामने आ चुके हैं.

Source: News18Hindi Last updated on: May 19, 2020, 3:25 PM IST
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अपनों से ही जूझ रही हैं कांग्रेस सरकारें...
कैप्टन अमरिंदर सिंह(फाइल फोटो)
कोरोना संकट के इस दौर में जब सरकारों पर कोरोना से लड़ने की जिम्मेदारी है, पंजाब सरकार मंत्रिमंडल और मुख्य सचिव की लड़ाई में उलझी हुई है. हालात यहां तक हो चुके हैं कि कैबिनेट मंत्रियों को मंत्रिमंडल की बैठक का बहिष्कार करना पड़ रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह भी मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की राह पर चल पड़े हैं! इससे पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह कई बार आमने-सामने आ चुके हैं. हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी स्थानीय ताकत और पार्टी में रसूख के दम पर नवजोत सिंह सिद्धू को किनारे लगा दिया, लेकिन कैबिनेट के बहिष्कार के बाद साफ हो गया है कि भले ही कैप्टन ने सिद्धू को किनारे लगा दिया हो, पर पंजाब में कैप्टन का विरोध अभी खत्म नहीं हुआ है.

फिलहाल सरकार पर कोई संकट नहीं
पंजाब विधानसभा का गणित फिलहाल पूरी तरह कांग्रेस और कैप्टन अमरिंदर सिंह के पक्ष में है. 117 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के 80 विधायक हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के पास सिर्फ 16 विधायक हैं. अगर एनडीए की सहयोगी एलजीपी को भी जोड़ दें, तो भी संख्या 18 ही हो पाती है. साफ है ऐसे में सरकार को तो फिलहाल कोई खतरा नहीं है.

धीरे-धीरे बढ़ रहा है कैप्टन का विरोध
जिस तरह पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का विरोध धीरे-धीरे बढ़ रहा हैं, उससे साफ है कि आने वाले समय में कैप्टन की राह इतनी आसान नहीं रहने वाली. कुछ समय पहले तक नवजोत सिंह सिद्धू अकेले ही पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के विरोधी थे. बाद में नवजोत सिंह सिद्धू के साथ विधायक परगट सिंह भी आ गए, लेकिन परगट सिंह को सिद्धू खेमे का बताकर उस विरोध को कैप्टन समर्थकों ने दरकिनार कर दिया. अब चीफ सेक्रेटरी के मामले पर जिस तरह विरोध की शुरुआत वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने की है, उससे साफ है कि इस बार विरोध को मुख्यमंत्री इतनी आसानी से नहीं दबा सकते. कारण है कि वित्तमंत्री के साथ देखते-देखते पूरी कैबिनेट ने ही मंत्रिपरिषद की बैठक का बहिष्कार कर दिया.

कांग्रेस की हर सरकार में दिख रहा है अंतर्कलह
दरअसल कांग्रेस की जिन-जिन राज्यों में सरकारें हैं वहां हालात करीब-करीब एक जैसे दिख रहे हैं. विधानसभा चुनाव में जिन चेहरों ने मिलकर कांग्रेस की सरकार बनाई, वो चेहरे सरकार बनते ही आपस में लड़ते-भिड़ते दिख रहे हैं. बात करें मध्य प्रदेश की तो प्रदेश में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया की लड़ाई की कीमत कांग्रेस को सरकार गंवाकर चुकानी पड़ी. विधानसभा चुनाव में इन दोनों नेताओं ने साथ मिलकर पार्टी को चुनाव लड़ाया और 15 वर्षों से चल रही भारतीय जनता पार्टी की सरकार को हटाकर कांग्रेस की सरकार बनवाई. लेकिन ये सरकार 2 साल भी नहीं चल सकी. बात करें राजस्थान की, तो राजस्थान से भी अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच अंतर्विरोध की खबरें अक्सर आती रहती हैं. कई बार ऐसे मौके आए हैं जब दोनों धड़े आमने-सामने हो गए हैं. ऐसे में राजस्थान सरकार पर हमेशा संकट बना रहता है. कुछ यही हाल महाराष्ट्र का भी है. महाराष्ट्र में भले ही कांग्रेस चौथे नंबर की पार्टी बन गई हो, लेकिन अभी भी वहां सरकार के फैसलों का विरोध विपक्ष से पहले कांग्रेस के नेता करते नजर आते हैं.(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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अनिल राय

अनिल रायएडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट)

अनिल राय भारत के प्रतिष्ठित युवा पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 18 साल से ज्यादा का अनुभव है. अनिल राय ने ब्रॉडकास्ट मीडिया और डिजिटल मीडिया के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया है. अनिल राय ने अपना करियर हिंदुस्तान समाचार पत्र से शुरू किया था और उसके बाद 2004 में वह सहारा इंडिया से जुड़ गए थे. सहारा में आपने करीब 10 वर्षों तक विभिन्न पदों पर कार्य किया और फिर समय उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड में चैनल प्रमुख नियुक्त हुए. इसके साथ ही वह न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में तीन वर्ष तक मैनेजिंग एडिटर रहे हैं. फिलहाल आप न्यूज़ 18 हिंदी में एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट) के तौर पर कार्य कर रहे हैं.

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First published: May 19, 2020, 2:36 PM IST
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